रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लगातार दूसरी बार आईपीएल का खिताब जीत लिया है. फाइनल में उन्होंने गुजरात टाइटंस को शिकस्त दी है. RCB की इस जीत में रजत पाटीदार, विराट कोहली, भुवनेश्वर कुमार, जोश हेजलवुड और क्रुणाल पंड्या की अहम भूमिका रही है. लेकिन इनके बीच एक और उभरता हुआ भारतीय सितारा है, जिसने चुपचाप लगातार कमाल का प्रदर्शन किया है. फाइनल में भी तीन विकेट चटकाकर उसने गुजरात की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी. नाम है रासिख सलाम डार.
18 साल में IPL डेब्यू, फिर 2 साल का बैन और इंजरी, अब बना RCB की खिताबी जीत का अनसंग हीरो
रासिख सलाम डार. आईपीएल 2026 शुुरू होने से पहले इस नाम की कोई चर्चा नहीं थी. आरसीबी की टीम में उनकी जगह भी पक्की नहीं थी. शुरुआती तीन मैचों में मौका भी नहीं मिला. लेकिन उसके बाद जब मौका मिला तो उसने पलटकर पीछे नहीं देखा. डार आरसीबी की खिताबी जीत के सबसे बड़े अनसंग हीरो के तौर पर उभरे हैं.


रासिख सलाम डार ने पहले तीसरे नंबर पर आए निशांत सिंधु को चलता किया. उसके बाद आखिरी के ओवर में विध्वंसक बैटिंग करने वाले राहुल तेवतिया को चलता किया और आखिर में तेजी से रन जुटाने की कोशिश कर रहे राशिद खान को भी चलता करके गुजरात के बड़े स्कोर की तरफ बढ़ने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. रासिख ने 4 ओवर के अपने कोटे में 27 रन देकर तीन विकेट चटकाए हैं.
आरसीबी की तरफ से विकेट चटकाने में दूसरे नंबर परआरसीबी की तरफ से इस साल सबसे ज्यादा विकेट भुवनेश्वर कुमार ने चटकाए हैं. जम्मू कश्मीर से आने वाले रासिख इस मामले में दूसरे नंबर पर हैं. उन्होंने अब तक 12 पारियों में 19 विकेट चटकाए हैं. इसमें क्वालिफायर 1 में गुजरात के सामने 24 रन देकर दो विकेट शामिल है. उन्होंने निशांत सिंधु और जेसन होल्डर के विकेट चटकाए थे. इससे पहले लीग मैच में रासिख ने लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ 4 ओवर में 24 रन देकर 4 विकेट चटकाए थे. यह आरसीबी की तरफ से किसी भी अनकैप्ड भारतीय प्लेयर का चौथा बेस्ट बॉलिंग फिगर है.
मॉर्डन टी20 क्रिकेट में बैटर सपाट पिचों पर गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा देते हैं. लेकिन इस सीजन रासिख ने नकल बॉल का ऐसा जाल बुना है कि बैटर उसमें फंसकर विकेट फेंक देते हैं. नकल बॉल ऐसे स्लोअर बॉल को कहते हैं जिसके रिलीज के दौरान बॉलर का एक्शन रत्ती भर भी चेंज नहीं होता. इसके चलते बॉलर्स को इन बॉल्स को पिक करने में परेशानी होती है. लखनऊ के खिलाफ लीग मैच में उन्होंने 24 गेंदों के स्पेल में 10 स्लोअर बॉल फेंकी.
भुवनेश्वर और हेजलवुड के बीच बनाई जगहआईपीएल के शुरुआती कुछ मुकाबलों में रासिख बेंगलुरु टीम का हिस्सा भी नहीं थे. सबकी नजरें टीम के स्टार बॉलर्स भुवनेश्वर कुमार और जोश हेजलवुड पर थी. तीसरे पेसर के तौर पर अभिनंदन सिंह को मौका मिला. तीन मैचों के बाद रासिख का मौका आया. और इस मौके को उन्होंने दोनों हाथों से भुनाया. उन्होंने चुपचाप और लगातार कमाल की गेंदबाजी की है. आंकड़ों की मानें, तो इस साल उनका प्रदर्शन दिग्गज ऑस्ट्रलियाई गेंदबाज हेजलवुड से भी बेहतर रहा है. उन्होंने पूरी कंट्रोल और अनुशासन के साथ गेंदबाजी की और अहम मौकों पर विकेट चटकाकर आरसीबी को खिताब जितवाने में अहम भूमिका निभाई. रासिख ने अपने प्रदर्शन से टीम को तनिक भी यश दयाल की कमी नहीं खलने दी है.
रासिख सलाम को कैसे मिली आईपीएल में जगह?जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले के एक छोटे से गांव में जन्म रासिख का सफर आसान नहीं रहा है. उनके पिता सरकारी स्कूल में टीचर हैं. वह अपने चार भाइयों में सबसे छोटे हैं. उनको जम्मू कश्मीर क्रिकेट टीम में इरफान पठान ने ट्रायल्स के जरिए जोड़ा था. उन्होंने ट्रायल्स के दौरान अपनी दो गेंदों से वेटरन ऑलराउंडर को प्रभावित किया था. जम्मू कश्मीर की ओर से खेलने के बाद पठान की सिफारिश पर ही रासिख को मुंबई इंडियंस ने ट्रायल्स के लिए बुलाया और साल 2019 में महज 18 साल की उम्र में उनको आईपीएल का टिकट मिला. मुंबई ने उनको 20 लाख रुपये में अपने साथ जोड़ा.
रासिख को मुंबई की ओर से एक मैच खेलने का मौका मिला. लेकिन, इसमें वो कोई छाप नहीं छोड़ पाए. उन्होंने 4 ओवर के स्पेल में 42 रन खर्चे. वहीं, इस दौरान कोई विकेट भी नहीं चटका पाए. लेकिन, इस दौरान उनको मुंबई के ड्रेसिंग रूम में लसिथ मलिंगा और जसप्रीत बुमराह के साथ वक्त बिताने का मौका मिला.
एज फ्रॉड में दो साल का बैन लगाआईपीएल खत्म होते ही रासिख को एक बड़ा झटका लगा. उम्र विवाद (Age Fraud) में दोषी पाए जाने के चलते BCCI ने उन पर दो साल का बैन लगा दिया. इसके चलते वे साल 2020 में अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने से चूक गए.
एक युवा खिलाड़ी के लिए करियर के शुरुआती दौर में ही ग्राउंड से बाहर होना किसी बुरे सपने से कम नहीं था. लेकिन रासिख ने हार नहीं मानी. बैन के दौरान वे मुंबई में रिलायंस स्टेडियम में प्रैक्टिस करते रहे. बैन से वापसी के बाद कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम ने उनको अपने साथ जोड़ा. लेकिन यहां भी किस्मत दगा कर गई. स्ट्रेस फ्रेक्चर के चलते वे फिर से वे खेल से दूर हो गए.
लेकिन रासिख ने हार नहीं मानी. चोट से उबरने और अपनी गेंदबाजी को मांजने लिए रासिख नेशनल क्रिकेट एकेडमी बेंगलुरु पहुंच गए. यहां उन्होंने स्विंग बॉलिंग से इतर स्लोअर और यॉर्कर पर काम किया. जब वे एनसीए में थे इस दौरान ऋषभ पंत भी उनके साथ थे.
पंत की सिफारिश पर दिल्ली में जगह मिलीआईपीएल 2024 से पहले पंत ने दिल्ली कैपिटल्स को रासिख के नाम की सिफारिश की. इसके चलते रासिख दिल्ली की टीम का हिस्सा बने. इस सीजन उनको आठ मैच खेलने को मिले. इसमें उन्होंने नौ विकेट चटकाए. फिर साल 2025 के मेगा ऑक्शन से पहले दिल्ली ने उनको रिलीज कर दिया.
आरसीबी ने 6 करोड़ का दांव लगायासाल 2025 के मेगा ऑक्शन में आरसीबी ने रासिख सलाम डार पर 6 करोड़ का दांव लगाया. तब कई लोगों को यह फैसला जमा नहीं. इस सीजन रासिख को ज्यादा मौके मिले भी नहीं. जोश हेजलवुड, भुवनेश्वर कुमार और यश दयाल जैसे अनुभवी तेज गेंदबाजों की मौजूदगी में रासिख को सिर्फ दो मैच मिले. इसमें उनके खाते में सिर्फ एक विकेट आया. लेकिन आरसीबी ने उनको अपने साथ बनाए रखा.
फिर शुरू हुआ प्रोजेक्ट रासिख डारजम्मू कश्मीर के लिए खेलते हुए रासिख अपनी जगह को लेकर आश्वस्त नहीं रहे. वे टीम में अंदर-बाहर होते रहे. साल 2025-26 में रासिख ने जम्मू कश्मीर की टीम को छोड़ने का फैसला किया. आईपीएल में अपने टीममेट क्रुणाल पंडया की सलाह पर उन्होंने बड़ौदा का रुख किया. यहां से कहानी बदलनी शुरू हुई. बड़ौदा की टीम में जितेश शर्मा भी रासिख के साथ थे.
लखनऊ के खिलाफ मुकाबले में रासिख ने 4 विकेट चटकाए. इस दौरान उन्होंने यॉर्कर और स्लोअर का बेहतरीन इस्तेमाल किया. इस मैच के बाद जितेश शर्मा ने बताया,
दबाव में बिखरते नहीं रासिखये हुनर रासिख में हमेशा से था. अब उन्होंने इन स्किल्स का सही इस्तेमाल सीख लिया है. जब आपको बेहतरीन कोच, मेंटॉर और अच्छा माहौल मिलता है तो आप सीखते हैं कि किस परिस्थिति में कौन सा हथियार इस्तेमाल करना है. रासिख ने अपनी यॉर्कर और स्लोअर गेंदों पर काफी मेहनत किया है. उनको पता था कि आईपीएल के लिए एक अलग लेवल की इंटेंसिटी चाहिए. ग्राउंड पर गलतियों की गुंजाइश कम करने के लिए उन्होंने इतना अभ्यास किया कि सब कुछ उनकी मसल मेमोरी में बस गया. बस यही चीज प्रेशर में काम आती है.
लखनऊ के खिलाफ मैच में रासिख की शुरुआत अच्छी नहीं रही. पावरप्ले में उनकी तीसरी ही गेंद पर ऐडन मारक्रम ने मिडऑन के ऊपर से छक्का जड़ दिया. पुराना रासिख शायद दबाव में आकर अपनी लय खो देता. लेकिन मेहनत और तजुर्बे ने उनको परिपक्व बना दिया है. उन्होंने तुरंत दो सटीक स्लोअर बॉल डालकर वापसी की. पिच को भांपने की यह चतुराई अब रासिख की बॉलिंग की नई पहचान है. कश्मीरी भाषा में रासिख का अर्थ स्थिरता होता है. उम्र भी रासिख के पक्ष में है. अगर वे अपने नाम के मुताबिक प्रदर्शन में स्थिरता बनाए रखते हैं तो भारतीय टीम का बुलावा भी उनसे ज्यादा दूर नहीं रहेगा.
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