कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने दूसरा मेडल जीत लिया है. मणिपुर के ऋषिकांता सिंह चनमबम ने मेंस 60 केजी वेटलिफ्टिंग स्नैच एंड जर्क कैटेगरी में सिल्वर मेडल अपने नाम किया. मणिपुर की धरती से निकले इस एथलीट ने 2025 में अपने प्रदर्शन से दर्शा दिया था कि वो जल्द ही दुनिया में देश का परचम लहराने के लिए तैयार हैं.
ऋषिकांता सिंह ने भारत को दिलाया दूसरा मेडल! स्नैच कैटेगरी में बनाया CWG रिकॉर्ड
Commonwealth Games 2026 : मेंस 60 केजी वेटलिफ्टिंग स्नेच एंड जर्क कैटेगरी में भारत के Rishikanta Singh Chanambam ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया. इससे पहले, 2025 में उन्होंने कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था.

अब उन्होंने ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतकर देश की झोली में दूसरा मेडल डाल दिया. उनसे पहले, मेंस हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग में बिहार के झंडू कुमार ने ब्राॅन्ज मेडल अपने नाम किया था.
मेडल जीतने से पहले इसी इवेंट की स्नैच कैटेगरी में उन्होंने 121 केजी लिफ्ट कर गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया. हालांकि, गोल्ड मेडल जीतने वाले मलेशिया के मोहम्मद अनिक कासदान ने भी बाद में इस रिकॉर्ड की बराबरी कर ली.
ऋषिकांता सिंह चनम्बम की कहानी दृढ़ संकल्प, कड़े संघर्ष और देश के लिए कुछ कर गुजरने के जज्बे की मिसाल है. 5 जुलाई 1998 को जन्मे ऋषिकांता मणिपुर से आते हैं. मणिपुर को इंडियन वेटलिफ्टिंग की नर्सरी कहा जाता है. मीराबाई चानू, कुंजारानी देवी जैसे वेटलिफ्टर्स मणिपुर से ही बिलॉन्ग करते हैं.
ऋषिकांता ने बेहद कम उम्र में ही वेटलिफ्टिंग को अपना करियर चुन लिया था. लेकिन, एक एथलीट के रूप में उनकी प्रतिभा को तब सही दिशा मिली, जब वो इंडियन आर्मी के स्पोर्ट्स प्रोग्राम से जुड़े. आर्मी के अनुशासित माहौल और नेशनल लेवल कोचिंग ने उनकी ताकत और तकनीक को और निखारा.
उन्होंने शुरुआत में 55 किलोग्राम वेट कैटेगरी में कंपीट करना शुरू किया था. 2022 में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी ऋषिकांता ने देश को इसी कैटेगरी में रिप्रजेंट किया था. लेकिन, इस बार वो 60 केजी वेट कैटेगरी में उतरे और सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया.
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करियर का टर्निंग पॉइंट रहा साल 2025उनके इंटरनेशनल करियर का पहला टर्निंग पॉइंट 2025 में आया. अहमदाबाद में हुए कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था. इस दौरान उन्होंने अपना पर्सनल बेस्ट प्रदर्शन करते हुए कुल 271 किलोग्राम (120 किलो स्नैच + 151 किलो क्लीन एंड जर्क) का वजन उठाया था. इसी ऐतिहासिक जीत के साथ उन्होंने 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए सीधे क्वालीफाई किया.
ऋषिकांता ने नॉर्वे में आयोजित वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 में भी हिस्सा लिया था. यहां उन्होंने वर्ल्ड के टॉप 11 वेटलिफ्टर्स में जगह बनाई थी. मेंस 60 केजी कैटेगरी में इस दौरान उन्होंने कुल 269 केजी उठाया था. वहीं, अब ग्लासगो में उन्होंने वह कर दिखाया, जिसका सपना हर भारतीय देखता है. मणिपुर से अब तक इतने वेटलिफ्टर्स आए, लेकिन ऋषिकांता कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतने वाले पहले वेटलिफ्टर हैं.
मेंस 60 केजी वेट कैटेगरी में ऋषिकांत ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया. हालांकि, इस दौरान उन्होंने स्नैच राउंड के अपने आखिरी प्रयास में 121 केजी का वेट उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी बना दिया. लेकिन, क्लीन एंड जर्क में वो 143 केजी ही उठा पाए. अपने दूसरे और तीसरे अटैंप्ट में वो 148 और 151 केजी का वेट उठाने में नाकाम रहे. इसके साथ उन्होंने कुल 264 केजी का वेट उठाया और भारत की झोली में दूसरा पदक डाल दिया. इससे पहले, झंडू कुमार ने मेंस हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था.
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