प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये लगातार तीसरा कार्यकाल चल रहा है. 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी को केवल तीन मौकों पर झुकना पड़ा है. पहला, CAA-NRC के विरोध में प्रोटेस्ट के चलते नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (NRC) को ठंडे बस्ते में डालना. दूसरा, एक साल तक चले किसान आंदोलन के कारण तीन कृषि कानून वापस लेना. तीसरा, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में चले प्रोटेस्ट के चलते धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा.
CJP प्रोटेस्ट में विदेशी फंडिंग... पैलेट गन चली? हर दावे और नैरिटव का पूरा सच जानें यहां
CJP के बनने से पहले, CJP के बनने के बाद और CJP के प्रोटेस्ट चलाने के बीच कई टिप्पणियां सामने आईं. कई नैरेटिव गढ़े गए, दावे किए गए, ब्लेमबाजी हुई. पेपर लीक को लेकर युवाओं का गुस्सा जंतर-मंतर पर दिखा. खासकर Gen-Z में. इस प्रदर्शन के दौरान क्या कुछ बदला समझें.

मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट' (NEET) के कथित पेपर लीक के विरोध में CJP ने प्रोटेस्ट शुरू किया था. दिल्ली के जंतर-मंतर पर ये प्रोटेस्ट एक महीने ज्यादा चला, जो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद खत्म हुआ.
पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ सीजेपी का प्रोटेस्ट अपने आखिरी पड़ाव में पूरी तरह से युवाओं का आंदोलन बन गया. खास तौर पर इस दौरान जेन-जी ने जिस तरह के नारे लगाए, सक्रियता दिखाई और अपनी मांग पर डटे रहे, वह भारत में सार्वजनिक प्रदर्शनों और आंदोलनों की कड़ी में एक नया अध्याय है. इस पूरे प्रदर्शन के दौरान कई आरोप भी लगे, जिसमें विदेशी फंडिंग और राजनीति से प्रेरित आंदोलन जैसे आरोप शामिल हैं. इसके अलावा, सीजेआई की टिप्पणियों पर भी काफी प्रतिक्रियाएं आईं.
15 मई को भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं को ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ बताया. इस बयान पर काफी विवाद हुआ. अगले दिन 16 मई को CJI सूर्यकांत ने अपने बयान पर सफाई जारी की. उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया.
CJI सूर्यकांत ने कहा कि उन्होंने देश के युवाओं की आलोचना नहीं की थी बल्कि उन लोगों को ‘परजीवी’ बताया था जो फर्जी डिग्रियों के सहारे वकालत के पेशे में घुस आए हैं. ये लोग मीडिया और सोशल मीडिया जैसे दूसरे सम्मानित पेशों में भी घुस चुके हैं. सीजेआई सूर्यकांत ने ये भी कहा कि देश के युवाओं के लिए उनके मन में काफी सम्मान है और वो उन्हें भारत की मजबूत नींव मानते हैं.

'कॉकरोच' कॉमेंट के कारण पहले ही आलोचना झेलने वाले CJI सूर्यकांत का नाम एक और विवाद से जुड़ गया. 22 जुलाई को CJI के सामने एक वकील आया. उसने CJI से CJP के 'चलो संसद' में छात्रों पर दिल्ली पुलिस की कथित ज्यादती की अर्जेंट सुनवाई की मांग की. CJI ने इनकार करते हुए कहा,
"हमारा समय बर्बाद मत कीजिए, और अपना समय बर्बाद मत कीजिए."
वकील ने आगे कहा कि उसके पास छात्रों पर पुलिस की ज्यादती दिखाने वाले वीडियो हैं. इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा,
"हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है. हमारे पास (वीडियो) देखने का समय नहीं है."
CJI सूर्यकांत के इन बयानों पर सोशल मीडिया में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. इस मामले में भी उन्हें सफाई देनी पड़ी. इंडिया टुडे की एसोसिएट एडिटर अनीषा माथुर से बात करते हुए
CJI ने अपने बचाव में कहा कि वकील को उचित प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करनी चाहिए. सही तरीके से याचिका दायर करने और उसकी खामियों को दूर करने के बाद दो दिन में मामला खुद लिस्ट हो जाता है. फिर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करता है.
CJP प्रोटेस्ट में विदेशी फंडिंग?CJP प्रोटेस्ट के विरोध में विदेशी फंडिंग का नैरेटिव खूब चला. जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए फूड डिलीवरी ऐप से रैंडम लोगों ने खाना भेजा. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में तो यहां तक कहा गया कि ऑर्डर दुबई, कतर और सऊदी से आ रहे हैं. ‘प्रोटेस्ट विरोधियों’ के लिए इतना काफी था ये कहने के लिए कि विरोध प्रदर्शन में ‘विदेशी ताकतों का हाथ’ है.
फॉरेन फंडिंग के सवाल पर भारत सरकार ने खुद तस्वीर साफ कर दी. 24 जुलाई को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने खुद कहा कि (CJP प्रोटेस्ट में) फॉरेन फंडिंग को लेकर कोई भी जानकारी अब तक नहीं मिली. उन्होंने कहा कि सरकार के पास इस आंदोलन में विदेश से पैसा आने की पुख्ता जानकारी नहीं है.
प्रोटेस्ट में विदेशी दखल के तौर पर सोशल एक्टिविटीज जरूर कंफर्म हुई. दिल्ली पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में माना कि पाकिस्तान से चलने वाले 400 सोशल मीडिया अकाउंट्स मिले. 25 जुलाई को सेंट्रल दिल्ली के डिप्टी पुलिस कमिश्नर (DCP) रोहित राजबीर सिंह ने बताया,
"400 से ज्यादा हैंडल्स की पहचान कर ली गई है. और उन्हें AI वीडियो, फेक कॉन्टेंट, डीप फेक वीडियो और फेक कॉन्टेंट और प्रदर्शन से जुड़ी फेक न्यूज फैलाने की वजह से ब्लॉक कर दिया गया है. ऐसे ही कुछ हैंडल्स ऑपरेशन सिंदूर के समय फेक न्यूज फैलाने में सक्रिय पाए गए थे."
दिल्ली पुलिस ने कंफर्म किया कि CJP प्रोटेस्ट के दौरान चली संदिग्ध ऑनलाइन एक्टिविटीज 'ऑपरेशन सिंदूर' में भी देखी गई थीं.
CJP प्रोटेस्टर्स पर पैलेट गन चली?20 जुलाई को CJP के 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प हुई. दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने प्रोटेस्टर्स पर खूब लाठियां भांजी. इस बीच, RAF पर आरोप लगा कि उसने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन से गोली चलाई गई.
इंडियन एक्सप्रेस ने 27 जुलाई को छपी अपनी रिपोर्ट में बताया कि सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) को पता चला कि मार्च के दौरान कनॉट प्लेस में तैनात RAF के एक जवान ने अपने पैलेट गन से कम से कम 7 गोलियां चलाईं. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया कि पांच गोलियां प्रदर्शनकारियों को लगीं, जबकि दो जमीन पर जा गिरीं.
तीन प्रोटेस्टर्स को पैलेट गन से गोली लगी. इनमें 25 साल के इरशाद शेख, दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र साहिल लोचब (19) और 28 साल के एक जर्नलिस्ट शामिल हैं. एक RAF कर्मचारी की लॉग एंट्री से CRPF को पैलेट गन से गोली चलने का पता चला.
वीडियो: CJP Protest हुआ खत्म, अमित शाह से राहुल गांधी ने क्या पूछ लिया?









