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भारतीय टीम के नाकारा करार दिए गए वो पांच लौंडे, जिन्हें अब लोग झुककर सलाम कर रहे हैं

सदियों तक याद रहेगी Sydney 2021 की सुपरहिट पिच्चर.

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Sydney Test Draw कराने के बाद Australia Cricket Team से हाथ मिलाते Ashwin और Hanuma Vihari (एपी फोटो)
बॉलीवुड में एक दौर था. पिच्चरें आती थीं. दो-चार-छह हीरोज वाली. सारे ऐसे लोग जिन्हें समाज नकार चुका है. जिन्हें देखते ही लोग कहते- अरे हटो यार, ये भी कोई लोग हैं. और फिर पिच्चर खत्म होते-होते वो दो-चार-छह लौंडे कुछ ऐसा कर गुजरते थे कि समाज को उनपर नाज़ होता था. हालांकि इन लोगों को समाज के नाज़ या नाराज़ होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता था.
ऐसे लड़कों को हमने 'तहलका', 'पांडव' जैसी पिच्चरों में खूब देखा है. लेकिन इन्हें देखते वक्त कभी नहीं सोचा था कि एक दिन ये लड़के भारत से दसियों हजार किलोमीटर दूर सिडनी में दिखेंगे. वो भी तब, जब पूरा भारत उम्मीद हार चुका होगा. तब ये लड़के आएंगे और कुछ ऐसा कर गुजरेंगे कि लोग कहेंगे-
'क्या हमें झुककर सलाम करना चाहिए?'
जवाब आएगा,
'हां, ये राजा हैं.'
मेहरबान, साहिबान, कदरदान. ये कोई परियों की कहानी नहीं है. ये आज के भारत का सच है. उस भारत का, जिसे दिग्गजों ने सिरे से नकार दिया था. जिसके लिए कहा गया था कि इनका तो कोई चांस ही नहीं है. उस भारत के लिए उन नकारे हुए लड़कों ने वो कर दिखाया, जिसके क़िस्से सदियों तक सुनाए जाएंगे. कौन हैं वो लड़के और क्या हैं उनके कारनामे? # रविंद्र लड़ाकू जडेजा सर जडेजा, जड्डू और अजय जडेजा के शब्दों में कहें तो जामनगर की शान. रविंद्र जडेजा को अक्सर बिट्स एंड पीसेज क्रिकेटर कहकर चिढ़ाया जाता है. जडेजा की बोलिंग और फील्डिंग की तारीफ करने वाले भी उनकी बैटिंग से बहुत सहमत नहीं दिखते. जबकि जडेजा जितने अच्छे बोलिंग और फील्डिंग में हैं, उतने ही अच्छे बैटिंग में
भी.
जामनगर के इस लड़ाके को अक्सर ट्रोल किया जाता है. कभी ट्वीट्स को लेकर, कभी जूतों को लेकर, तो कभी बीच मैदान तलवारबाजी को लेकर. हम जैसे लोग जड्डू की उन हरकतों का कभी सपोर्ट नहीं करते. लेकिन जड्डू को इससे क्या ही फ़र्क पड़ता है. वो तो अपनी पहली ड्यूटी- टीम इंडिया के लिए अपना सबकुछ लगाना, में ही मस्त हैं. पहली पारी में बैटिंग करते हुए जडेजा का बायां अंगूठा टूट गया था. दूसरी पारी में वो बोलिंग नहीं कर पाए. लेकिन इसके बाद भी ऋषभ पंत के रूप में टीम का चौथा विकेट गिरने के बाद जब कैमरा ड्रेसिंग रूम की ओर गया, तो वहां जडेजा पैड पहने दिखे. जडेजा टूटी उंगली के साथ बैटिंग के लिए तैयार थे. हालात यहां तक थे कि वह दोनों हाथों से केला नहीं छील पा रहे थे.
कैमरे में दिखा कि साथ बैठे नवदीप सैनी ने अपने हाथ से केला छीलकर उन्हें दिया, फिर जडेजा ने उसे अपने दाएं हाथ से खाया. बाएं हाथ की ये कंडीशन होने के बावजूद बैटिंग के लिए तैयार बैठकर जड्डू सिडनी के पहले हीरो थे. # चेतेश्वर दृढ़ पुजारा चेतेश्वर पुजारा. हाल के हफ्तों में इनके स्ट्राइक रेट पर जितना टेक्स्ट लिखा गया, उतना कागज़ पर होता तो कई जंगल तबाह हो गए होते. ऑस्ट्रेलिया से लेकर भारत तक के लोगों ने पुजारा के स्ट्राइक रेट पर खूब सवाल उठाए. उन्हें हर तरह से नाकारा सिद्ध कर दिया गया. कुछ कड़ी बातें मैनें भी बोलीं. कई दफ़ा कहा कि पुजारा को टीम से निकाल देना चाहिए.
लेकिन मेरी बातें उनके आउट होने के तरीके पर थीं, 2018 की सीरीज के बाद से चल रहे स्ट्रगल पर थीं. ना कि उनके स्ट्राइक रेट पर. ख़ैर सिडनी की पहली पारी में पुजारा ने 174 गेंदों में अपनी हाफ-सेंचुरी पूरी की. ये उनकी सबसे स्लो टेस्ट फिफ्टी थी. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कैप्टन रिकी पॉन्टिंग ने कहा,
'असल में, उन्होंने जैसी बैटिंग की उससे ऑस्ट्रेलिया खेल में बना रहा. भले ही उन्होंने 50 रन बनाए लेकिन टीम की इस हालत के लिए वह भी बाकियों जितने ही जिम्मेदार हैं.'
पॉन्टिंग का इतना कहना था कि भारतीय कीबोर्ड वॉरियर महासभा अपने ही प्लेयर पर टूट पड़ी. लेकिन पुजारा को इससे फ़र्क पड़ता, तो वो हमारी इस लिस्ट में जगह कैसे बनाते? सो पुजारा पर असर नहीं पड़ा. बल्कि दूसरी पारी में तो उन्होंने खूंटा पिच की जगह कीबोर्ड पर ही गाड़ दिया. और हालात ऐसे थे कि वही कीबोर्ड वॉरियर अब दुआ कर रहे थे- पुज्जी, Pleaeeeez.
अब इन वॉरियर्स से पुज्जी प्लीज़ हुए या नहीं, ये कौन जाने. लेकिन पुज्जी ने ऑस्ट्रेलिया वालों को खीज जरूर दिला दी. दूसरी पारी में उन्होंने 205 गेंदें खेलकर 77 रन बनाए. ऑस्ट्रेलिया के बोलर्स को थकाने वाले पुजारा हमारे हीरो नंबर दो हैं. # ऋषभ रेकलेस पंत शॉर्ट में बोले तो RR पंत. वैसे ऋषभ का पूरा नाम ऋषभ राजेंद्र पंत है. लेकिन सिडनी टेस्ट की दूसरी पारी में उन्होंने जो किया, उसके बाद मैं तो उन्हें ऋषभ RECKLESS (दुस्साहसी) पंत ही बुलाऊंगा. 407 का लक्ष्य मिलने के बाद 130 करोड़ भारतीय ड्रॉ से इतर कुछ सोच ही नहीं रहे थे. 5-10 करोड़ जो जीत की ओर थे, वो भी रोहित के विकेट के साथ ही धराशाई हो गए थे.
लेकिन पांचवे दिन 102 के टोटल पर रहाणे के आउट होने के बाद कांड हो गया. टीम मैनेजमेंट ने ऋषभ पंत को प्रमोट कर दिया. अपनी कीपिंग और सेट होकर आउट होने वाली बैटिंग के लिए आलोचना का शिकार हो रहे पंत उतरे. और सबसे पहला काम किया, नाथन लॉयन को SP अफिसिये (SCG) में ही कूट दिए. इतना मारे कि पुज्जी को परेशान कर रहे लॉयन से टिम पेन को Pain हो गया.
पंत ने ऑस्ट्रेलिया वालों को इतना फोड़ा, इतना फोड़ा कि NGT (पटाखे बैन करने वाले भले लोग) ने भी हाथ खड़े कर लिए. जीत के सपने देख रहे लैंगर और पेन को सेम वही फीलिंग आई, जैसी 1993 में गेंडास्वामी को आई थी.
Fuse Condutor Meme
साल 1993 में Brigadier Suryadev Singh ने गेंडास्वामी की मिसाइल के Fuse Conductor ही निकाल लिए थे.

अपनी पारी के दौरान पंत लगातार पेनकिलर्स लेकर खेल रहे थे. इसके बाद भी उनके हाथ में इतना दर्द था कि वह पानी की बोतल पकड़कर खुद से पानी नहीं पी पा रहे थे. लेकिन इससे उनके धूम-धड़ाके में कोई अंतर नहीं आया. अंतत: पंत को लॉयन ने ही आउट किया. लेकिन तब तक वह 118 गेंदों में 97 रन कूट चुके थे.
अब मामला उल्टा था. 130 करोड़ लोगों को जीत दिखने लगी थी. लेकिन थोड़ी ही देर बाद पुजारा भी आउट हो गए और मामला फिर गड़बड़ा गया. लेकिन इससे पंत का दुस्साहस कम नहीं हो जाता. जाने कितने एशियन विकेटकीपर ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट के पांचवे दिन वनडे जैसी बैटिंग करने का सपने देखते-देखते फॉर्महाउस खोल बैठे, लेकिन खेल नहीं पाए. ऐसे में पंत हमारे हीरो नंबर तीन. # हनुमा अंगद विहारी हनुमा विहारी. इंट्रो पढ़कर यहां तक आए होंगे तो पता ही होगा कि लिस्ट कैसे लोगों की है. तो इस लिस्ट में विहारी सबसे बिगड़ैल माने जा सकते हैं. इनसे किसी को कोई उम्मीद ही नहीं थी. क्योंकि वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ 96 का ऐवरेज रखने वाले विहारी बाकी टीमों के खिलाफ 19.5 का ऐवरेज रखते हैं. हमने भी इनसे उम्मीदें छोड़
दी थीं. क्या करें, आदत से मजबूर हैं. नतीजे नहीं दिखते तो थोड़ा इधर-उधर निकल जाते हैं.
ऋषभ के आउट होने के बाद विहारी बैटिंग के लिए उतरे. पुजारा ने आते ही उनसे लंबी मंत्रणा की. खुद पंत का रोल लिया और विहारी को दिया अपना रोल. लेकिन इसी चक्कर में गड़बड़ हो गई. तेज रन भागने के चक्कर में विहारी की हैमस्ट्रिंग खिंच गई. उनके लिए भागना तो दूर क्रीज़ पर रहना मुश्किल हो गया. लेकिन वह डटे रहे. दूसरे एंड से पुजारा आउट हो गए. अब अश्विन के साथ खड़े विहारी की जिम्मेदारी और बढ़ गई. इसके बाद उन्होंने लिया अंगद रूप और अपने पांव क्रीज़ पर जमा दिए. पेनकिलर्स की हेवी डोज लेकर विहारी ऑस्ट्रेलियन बोलर्स को पेन देते रहे. बीच-बीच में पहली फुर्सत में ड्रेसिंग रूम से पेनकिलर्स की हेवी डोज लेकर फिजियो और साथी प्लेयर्स आते रहे, विहारी गेंदें खाते रहे. पंत और पुजारा को खोने के बाद टीम ने ड्रॉ के लिए खेलना शुरू किया. इसमें विहारी का बड़ा रोल था और उन्होंने इसे पूरी शिद्दत से निभाया.
विहारी ने भयानक दर्द के साथ 161 मिनट तक बैटिंग की. और हासिल किया इस स्क्रिप्ट के उस हीरो का रोल, जो कहता है- तुम मेरी चिंता मत करो, आगे बढ़ो और काम पूरा करो. # रविचंद्रन रेस्टलेस अश्विन अश्विन के नाम टेस्ट में चार शतक और 11 अर्धशतक हैं. आंकड़े साफ कहते हैं कि उनको बैटिंग आती है. लेकिन बैटिंग आना और चौथी पारी में आकर ऑस्ट्रेलिया के बेस्ट-एवर अटैक के सामने मैच बचाना, दोनों अलग-अलग चीजें हैं. खासतौर पर तब, जब रात में सोने जाते वक्त आपकी पीठ अकड़ी रही हो. सुबह सोकर उठने पर आपसे सीधे खड़े ना हुआ जा रहा हो. आप खुद से झुककर अपने जूतों के फीते ना बांध पा रहे हों. ऐसे हाल में अगर आपको दो घंटे से ज्यादा बैटिंग करनी हो. वो भी उन ऑस्ट्रेलियंस के सामने जिन्हें अब जीत एकदम साफ दिखने लगी हो. सिर्फ 22 रन के अंदर पंत और पुजारा को आउट करने के बाद कंगारू बोलर और खूंखार हो चुके थे. उन्होंने लगातार शॉर्ट बॉल्स फेंक अश्विन को खूब परेशान किया. कई गेंदें उनके शरीर पर लगी. विकेट के पीछे से टिम पेन ने लगातार उनपर टॉन्ट मारे, लेकिन अश्विन डटे रहे. टीम इंडिया को 36 पर समेटने वाला अटैक, फील्डर्स के ताने, शरीर पर लगती गेंदें... कुछ भी अश्विन को रोक नहीं पाया. वह 128 मिनट तक डटे रहे. ऑस्ट्रेलिया की बोलिंग का बैट से और तानों का तानों से बखूबी जवाब दिया और बने हमारे हीरो नंबर पांच.
इन्हीं पांडवों के दम पर महाभारत जैसा युद्ध जीत पाई है आज भारतीय टीम. शाबाश टीम इंडिया!

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