एशियन गेम्स 2026 के बैडमिंटन सिंगल्स में भारत का हाथ पूरी तरह से खाली रह गया. 12 साल बाद भारतीय शटलर्स एशियाड में सिंगल्स में कोई पदक नहीं जीत सके. बड़े-बड़े नाम और मजबूत दावेदारों से लैस भारतीय बैडमिंटन दल का अभियान 27 अगस्त को खत्म हो गया.
Asian Games : 12 साल बाद बैडमिंटन के सिंगल्स में भारत खाली हाथ, वजह कहीं आयोजक तो नहीं?
Asian Games 2026 : भारतीय शटलर्स का कैंपेन 27 सितंबर को खत्म हो गया. 2014 के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब मेंस और विमेंस सिंगल्स में भारत का कोई भी शटलर मेडल नहीं जीत गए. PV Sindhu और Unnati Hooda का सफर क्वार्टर फाइनल में ही खत्म हो गया.

सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में पहुंचनी वाली पीवी सिंधू और उन्नति हूडा सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकीं. लेकिन, क्या इस निराशाजनक प्रदर्शन के पीछे सिर्फ भारतीय शटलर्स की नाकामी थी? कहीं आयोजकों की अव्यव्स्था ने भारतीय शटलर्स के अभियान पर तो बुरा इंपैक्ट नहीं डाल दिया?
24 घंटे के भीतर 3-3 मैचदरअसल, ये सवाल इसलिए क्योंकि भारतीय शटलर्स पीवी सिंधू और उन्नति हूडा को 24 घंटे के अंदर तीन सिंगल्स मुकाबले खेलने पड़े. वहीं, आयुष शेट्टी को भी एक ही दिन में दो-दो मैच खेलने पड़ गए. इतने कम समय में लगातार मैच मिलने के कारण अब एशियाड का शेड्यूल भी सवालों के घेरे में है.
भारतीय प्लेयर्स को इतना कम ब्रेक क्यों दिया गया? हालांकि, ऐसा सिर्फ भारतीय शटर्ल्स के साथ नहीं हुआ. देर रात मेंस सिंगल्स का प्री क्वार्टर फाइनल खेलने वाले वर्ल्ड नंबर वन जोनाथन क्रिस्टी को भी ऐसे ही मिसमैनेजमेंट का सामना करना पड़ा. नतीजा, वो भी क्वार्टर फाइनल मुकाबला हार गए.
लगातार मैचों का भारी दबावइस बार एशियाड में पीवी सिंधू का शेड्यूल बहुत ज्यादा व्यस्त रहा. विमेंस सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में उतरने से पहले उन्हें 24 घंटे से भी कम समय में अपना तीसरा मैच खेलना पड़ा था. इससे पहले के उनके दो मैच भी 12 घंटे के अंदर ही हुए थे. इतने कम समय में शरीर को दोबारा तरोताजा होने का मौका ही नहीं मिला.
कुछ ऐसी ही मुश्किल हालात का सामना उन्नति हूडा ने भी किया. उन्नति ने 26 सितंबर को दो मैच खेले और फिर ठीक अगली सुबह अपना तीसरा मैच खेला. इतनी थकान के बाद मैदान पर उतरना किसी भी खिलाड़ी के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होता है. सिंधू और उन्नति दोनों ने क्वार्टर फाइनल में तीन गेम तक पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी, लेकिन थकान और कम आराम के चलते वे आखिर में जीत हासिल नहीं कर पाईं.
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भारत के लिए निराशाजनक रहा दिनएशियन गेम्स में 27 सितंबर का दिन भारतीय शटलर्स के लिए बहुत उदासी भरा रहा. पीवी सिंधू के हारते ही सिंगल्स में भारत की उम्मीदें पूरी तरह टूट गईं. सिंधू का मुकाबला चीन की दिग्गज खिलाड़ी और टोक्यो ओलंपिक की चैंपियन चेन यू फेई से था. उन्होंने सिंधू को 21-11, 18-21, 21-10 के स्कोर से हरा दिया. सिंधू ने पहला गेम तो बहुत आसानी से जीत लिया.
लेकिन, इसके बाद चीनी खिलाड़ी ने अगले दोनों गेम जीतकर मैच अपने नाम कर लिया. उन्नति की भी कहानी कुछ ऐसी ही रही. दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी अकाने यामागुची के खिलाफ वो दूसरा गेम जीत गईं. लेकिन, तीन गेम के इस कड़े मुकाबले में वो भी 16-21, 21-14, 17-21 से हार गईं.
इससे पहले, तनीषा क्रास्टो-ध्रुव कपिला और त्रिशा जॉली-गायत्री गोपीचंद की जोड़ियां भी अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मैच हार गईं. माने भारत के शटलर्स 4 इवेंट्स के क्वार्टर फाइनल में पहुंचे थे. लेकिन, 27 सितंबर को सभी को हार का सामना करना पड़ा.
अन्य बड़े खिलाड़ियों का सफर भी जल्दी थमासिर्फ यही नहीं, भारत के बाकी बड़े नाम भी इस बार ज्यादा दूर तक नहीं जा सके. मेंस सिंगल्स में लक्ष्य सेन दूसरे दौर में सिंगापुर के लोह कीन यू से हारकर बाहर हो गए. इसके अलावा, हांगझू एशियाड की चैंपियन सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की पुरुष डबल्स जोड़ी भी इस बार अपना खिताब नहीं बचा पाई. दोनों शुरुआती दौर में ही टूर्नामेंट से बाहर हो गए.
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