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हॉकी वर्ल्ड कप में भारत का शर्मनाक सफर! कोच-कप्तान या श्रीजेश का विकल्प नहीं मिलना, क्या थी वजह?

भारतीय टीम ने 1975 में वर्ल्ड कप का खिताब जीता था. इसके बाद से भारत पोडियम तक नहीं पहुंचा सका. 51 साल का इंतजार 2026 वर्ल्ड कप के बाद भी जारी है. टीम इंडिया अब विश्व कप से बाहर हो चुकी है और अब चर्चा टीम के प्रदर्शन की हो रही है.

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भारतीय हॉकी टीम वर्ल्ड कप के दूसरे राउंड से ही बाहर हो गई. (Photo-Pti)

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  • भारतीय हॉकी टीम वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल तक पहुंचने में असफल रही और ग्रुप स्टेज को पार करने के बाद नीदरलैंड्स और अर्जेंटीना से हार के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो गई।
  • भारत के खराब प्रदर्शन के पीछे कमजोर डिफेंस, कम पेनल्टी कॉर्नर कन्वर्जन दर, अनुभवी गोलकीपर की कमी और कोच के रोटेशन फैसले जैसे कारण शामिल हैं।
  • वर्ल्ड कप में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद टीम के पास एशियन गेम्स से पहले कम समय है, जहां उसे बेहतर प्रदर्शन और आगामी ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन हासिल करने की चुनौती है।

क्या भारतीय हॉकी के लिए वर्ल्ड कप एक अहम टूर्नामेंट नहीं है? लगातार दो ओलंपिक में ब्रॉन्ज जीतने वाली टीम सेमीफाइनल तक भी नहीं पहुंच सकी. अब सवाल उठ रहा है कि गलतियां सिर्फ टर्फ पर हुईं या फिर मैदान के बाहर की चीजों का असर भी परफॉर्मेंस पर रहा? हॉकी वर्ल्ड कप से भारत के बाहर होने के बाद यही सवाल लगातार उठ रहे हैं. भारत के निराशाजनक सफर के पीछे के वजहें समझते हैं कि आखिर ऐसा हुआ क्यों?

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भारत का सफर

इस वर्ल्ड कप में भारत के पूल में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स थे. ग्रुप देखकर यह अंदाजा पहले ही लगाया जा रहा था कि इंग्लैंड के खिलाफ मैच अहम होने वाला है. भारत यह मैच हार गया. भारत के इंग्लैंड को वर्ल्ड कप में हराने का 31 साल से चल रहा इंतजार और लंबा हो गया. लेकिन चिंता शुरू हुई पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले के बाद. भारत ने यह मैच जीता तो सही, लेकिन पूरे मैच में पाकिस्तान को वापसी का मौका टीम इंडिया देती रही. भारतीय टीम की कमजोरी यहां खुलकर दिखने लगी. पाकिस्तान ने मिडफील्ड में जिस तरह से कंट्रोल हासिल किया और भारतीय डिफेंस पर दबाव बनाया, उससे स्कोरलाइन 3-0 से 4-2 तक पहुंच गई. भारत ने अपने ग्रुप में टॉप-2 में तो फिनिश किया, लेकिन यह साफ था कि आगे का सफर आसान नहीं होगा.

टॉप टीमों के सामने फ्लॉप रहा भारत

इसके बाद टीम का सामना नीदरलैंड्स से हुआ. वह टीम जिसके खिलाफ भारत को बड़े टूर्नामेंट्स में लंबे समय से जीत नहीं मिली है. नीली जर्सी पहनकर उतरी नीदरलैंड्स ने भारत को एक बार फिर चकमा दिया. भारत को दूसरे राउंड के पहले मैच में 3-1 से हार मिली. इसके बाद उसके सामने अर्जेंटीना थी. वह टीम जिसके खिलाफ भारत ने पिछले पांच मैचों में 23 गोल खाए थे. सेमीफाइनल की उम्मीद बनाए रखने के लिए भारत को किसी भी हाल में इस मैच को कम से कम दो गोल के अंतर से जीतना था. भारतीय डिफेंस शुरुआती मिनटों में ही चरमरा गया. पहले क्वार्टर में ही अर्जेंटीना ने 2-0 की बढ़त हासिल कर ली थी.

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भारतीय डिफेंस पड़ा कमजोर

भारतीय डिफेंस की यह कमजोरी वर्ल्ड कप से पहले भी दिख रही थी. टूर्नामेंट से पहले हुई प्रो लीग के एक चरण में भारत ने 25 गोल खाए थे. इनमें से 11 पेनल्टी कॉर्नर से आए थे. भारत के अटैकिंग खेल और गोल करने का कोई फायदा नजर नहीं आ रहा था, क्योंकि टीम का डिफेंस कमजोर नजर आ रहा था. टीम को अनुभवी गोलकीपर की कमी भी खली. श्रीजेश के बाद कभी कृष्णा पाठक तो कभी सूरज केरकेरा इस रोल में दिखे लेकिन दोनों ही वह दीवार नहीं बन पाए जिसकी भारत को जरूरत है.

फील्ड गोल को तरसा भारत

टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में भारत की सफलता में पेनल्टी कॉर्नर कन्वर्जन की अहम भूमिका रही थी. इस बार भी भारत ने पेनल्टी कॉर्नर से गोल तो किए, लेकिन ड्रैग फ्लिक से मिलने वाले निर्णायक गोलों का प्रभाव लगातार देखने को नहीं मिला. पूरे टूर्नामेंट में टीम को 25 पेनल्टी कॉर्नर मिले, जिनमें से उसने 7 को गोल में बदला. यानी भारत का पेनल्टी-कॉर्नर कन्वर्जन करीब 28 फीसदी रहा. टीम के कप्तान और ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह भी उम्मीद के मुताबिक परफॉर्म नहीं कर पाए. लेकिन परेशानी सिर्फ यहीं नहीं थी. भारत फील्ड गोल करने के मामले में पूरे टूर्नामेंट में संघर्ष करता दिखा. टीम ने सिर्फ 5 फील्ड गोल किए. टीम मौके बनाती रही, लेकिन उन्हें गोल में बदल नहीं पा रही थी. शीर्ष टीमों की तुलना में भारत फील्ड गोल के मामले में काफी पीछे रहा.

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क्रेग फुल्टन का विवादित बयान

बाकी कसर टीम के कोच क्रेग फुल्टन की रणनीति और बयानों ने पूरी कर दी. वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद उनसे कई फैसलों को लेकर सवाल किए गए. उनसे पूछा गया कि अर्जेंटीना के खिलाफ अहम मुकाबले में यशदीप सिवाच जैसे युवा खिलाड़ी को क्यों उतारा गया. फुल्टन ने कहा,

हम रोटेशन कर रहे थे. एशियन गेम्स से पहले सभी को मौका देना चाहते थे.

कोच के इस बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया. दिग्गज खिलाड़ी श्रीजेश ने कहा कि भारतीय टीम को वर्ल्ड कप को एशियन गेम्स की तैयारी के मंच के तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इससे यह सवाल भी उठा कि क्या भारत ने वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट को उतनी प्राथमिकता दी, जितनी उससे उम्मीद की जाती है. भारत एक बार फिर पोडियम तक नहीं पहुंच सका. 2023 एशियन गेम्स का चैंपियन होने के बावजूद दुनिया की टॉप टीमों के सामने भारत फ्लॉप रहा. वर्ल्ड कप में मेडल का 51 साल का इंतजार अब भी जारी है.

भारत के इस निराशाजनक प्रदर्शन के कई कारण रहे. भारत के पास इन कमियों पर काम करने के लिए ज्यादा समय नहीं है. 19 सितंबर से एशियन गेम्स की शुरुआत होगी. 2026 एशियन गेम्स में पुरुष हॉकी का गोल्ड जीतने वाली टीम को 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधी क्वालिफिकेशन मिलेगी.
 

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