The Lallantop

Ind vs NZ: वानखेड़े में जीत के लिए टॉस हारना जरूरी? रिकॉर्ड्स क्या कहते हैं?

वानखेड़े पर 27 वनडे मैचों में टॉस जीतने वाली टीम ने 17 बार बैटिंग ही चुनी है. 10 बार टॉस जीतने वाली टीम ने फील्डिंग करने का फैसला किया है. हार और जीत के नतीजे क्या रहे?

Advertisement
post-main-image
वर्ल्ड कप 2023 में दो बार टॉस जीतकर टीम ने पहले फील्डिंग की, और दोनों बार हारी. (फोटो- ट्विटर)

वानखेड़े स्टेडियम. 2011 वर्ल्ड कप का फाइनल यही खेला गया था. इस बार भारत बनाम न्यूजीलैंड सेमीफाइनल मैच का गवाह बनने जा रहा है (India vs New Zealand semifinal Wankhede). मैच से पहले टीम कॉम्बिनेशन से लेकर टीमों की रणनीति को लेकर काफी चर्चा चल रही है. इसी चर्चा का हिस्सा वानखेड़े की 22 यार्ड की पिच भी है. साथ ही ये भी चर्चा है कि मैच के दिन मौसम का क्या हाल रहेगा और टॉस जीतकर पहले क्या करना सही होगा.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

वानखेड़े पर इस वर्ल्ड कप में खेले गए मैचों की बात करें तो इस बार ये ग्राउंड बैटर्स पैराडाइज़ साबित हुआ है. भारत और दक्षिण अफ्रीका ने अपने मैचों में 350 से भी ज्यादा स्कोर किया है. मैदान पर खेले गए शुरुआती तीन मैचों में पहले बैटिंग करने वाली टीम को ही जीत मिली. ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान का मैच इकलौता ऐसा मैच रहा जहां दूसरी पारी में बैटिंग करने वाली टीम मैच जीती. वो भी मैक्सवेल की एकतरफा बैटिंग से.

ये तो बात हो गई इस वर्ल्ड कप में वानखेड़े पर खेले गए मैचों की. लेकिन इतिहास की बात करें तो इस ग्राउंड पर पहले बैटिंग करने वाली टीम को कोई खास फायदा नहीं मिलता. मैदान पर खेले गए 27 वनडे मैचों में से 14 पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने जीते हैं. वहीं 13 बार चेस करने वाली टीम को जीत नसीब हुई है. साफ है, मामला लगभग बराबर है. 2011 का फाइनल भी भारतीय टीम ने चेस करते हुए जीता था.

Advertisement

मैदान पर खेले गए पिछले 10 वनडे मैचों के आंकड़े बराबरी पर हैं. मतलब पहले खेलने वाली टीम ने पांच मैच जीते हैं और चेस करने वाली टीम ने भी पांच मैच अपने नाम किए हैं.

Image
टॉस जीतना कितना जरूरी?

वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में हर मैच में टॉस अहम भूमिका निभाता है. सबकॉन्टिनेंट में तो ये और जरूरी हो जाता है. लेकिन वानखेड़े के रिकॉर्ड्स इस बात की तस्दीक नहीं करते. मैदान पर खेले गए 27 वनडे मैचों में टॉस का रोल उतना खास नहीं रहा. 15 मैचों में टॉस हारने वाली टीम ने यहां बाजी मारी हैं. वहीं टॉस जीतने वाली टीम ने 12 मैच जीते हैं.

यही ट्रेंड पिछले 10 मैचों का भी है. टॉस हारने वाली टीम ने 6 मैच जीते हैं. टॉस जीतने वाली टीम चार मैच जीत सकी है. यानी वानखेड़े में टॉस हारना भी टीम के लिए 'ब्लेसिंग इन डिसगाइज़' हो सकता है. शायद यही दोनों टीमों के टीम मैनेजमेंट के दिमाग में होगा.

Advertisement

टॉस की बात हो ही रही है तो एक और आंकड़ा आपके सामने रखे देते हैं. वानखेड़े को बैटिंग के लिए मुफीद इसलिए भी माना जाता है क्योंकि 27 वनडे मैचों में टॉस जीतने वाली टीम ने 17 बार बैटिंग ही चुनी है. 10 बार टॉस जीतने वाली टीम ने फील्डिंग करने का फैसला किया है.

Image

टॉस जीतकर बैटिंग करने वाली टीम ने 17 में से 8 मैच जीते हैं. 9 बार टीमें हारी हैं. वहीं फील्डिंग करने वाली टीम ने चार मैच जीते हैं. 6 में टीम को हार का सामना करना पड़ा है.

वर्ल्ड कप 2023 की बात करें तो दो बार टॉस जीतने वाली टीम ने पहले फील्डिंग की, और दोनों बार हारी. वहीं टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने वाली टीम एक बार जीती है और एक बार हारी है. माने चार मैचों में टॉस जीतने वाली टीम सिर्फ एक बार मैच जीती है. साफ है कि टॉस हारना शायद वानखेड़े पर ज्यादा ठीक है. रिकॉर्ड तो यही संकेत देते हैं.                        

बॉलिंग पैराडाइज़ है वानखेड़े

न्यूजीलैंड के पूर्व कोच माइक हेसन ने सेमीफाइनल से पहले कहा है कि वानखेड़े न्यूजीलैंड की टीम के लिए बढ़िया ग्राउंड है. हेसन के मुताबिक वानखेड़े पर न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों को बाउंस मिलेगा. और अगर बाउंस मिला, तो गेंदबाज भारतीय टीम के टॉप ऑर्डर को सस्ते में निपटा सकते हैं. अब ये कितना सही साबित होता है, वो तो 15 नवंबर को ही पता चलेगा.

रिकॉर्ड के मुताबिक इस वर्ल्ड कप में वानखेड़े पर तेज गेंदबाजों ने 47 विकेट लिए हैं. 6.60 की इकोनॉमी से. वहीं स्पिनर्स ने 5.9 की इकोनॉमी से 11 विकेट चटकाए हैं. यही नहीं, दूसरी इनिंग में, लाइट्स के नीचे गेंद स्विंग और सीम भी होती है. वर्ल्ड कप 2023 में लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम ने चार मैचों में पहले पावरप्ले में 17 विकेट खोए हैं. वहीं पहले बैटिंग करने वाली टीम ने पहले पावरप्ले में सिर्फ 5 विकेट खोए हैं.

भारत और न्यूजीलैंड के बीच सेमीफाइनल मैच में पावरप्ले काफी अहम होगा. इस दौरान भारतीय टीम कैसे खेलेगी, मैच की रूप-रेखा उसी से तय हो जाएगी. बाकी टॉस में क्या होता है, उसके लिए कुछ घंटों का इंतजार और करना होगा. अगर पक्के क्रिकेट फैन हैं, तो आप भी यही चाहेंगे कि टॉस का मैच में खासा रोल न हो. जो हो वो मैदान में परफॉर्मेंस से डिसाइड हो.

(ये भी पढ़ें: वर्ल्ड कप सेमीफाइनल्स में टीम इंडिया का सफर, वो दो मैच आज भी बहुत दर्द देते हैं!)

वीडियो: ग्लेन मैक्सवेल 200 ने बिगाड़ा सचिन तेंदुलकर की टिप्स से बनी सेंचुरी का काम

Advertisement