वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में भारत ने टॉस जीता. कप्तान शुभमन गिल ने कहा कि भारत पहले गेंदबाजी करेगा. उस समय उन्हें लग रहा था कि पिच पर तेज गेंदबाजों को मदद मिलेगी. लेकिन जो हुआ वह ठीक इसका उलट था. भारतीय पेसर्स की जमकर कुटाई हुई. वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 405 रन का पहाड़ खड़ा कर दिया. यह वनडे क्रिकेट में वेस्टइंडीज का सर्वोच्च स्कोर है. आखिरी ओवर्स में अगर वेस्टइंडीज की रफ्तार धीमी नहीं होती तो यह स्कोर 420 के पार जा सकता था. इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या टीम इंडिया मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार को मिस कर रही है.
वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया की सबसे बड़ी कमजोरी दिख गई
वेस्टइंडीज ने भारत के खिलाफ दूसरे वनडे में 404 रन बनाए. यह वेस्टइंडीज के वनडे इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर है. भारतीय पेसर्स वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों के सामने फ्लॉप नजर आए.

भारत की शुरुआत तो उम्मीद के मुताबिक ही थी. तेज गेंदबाजों को मदद मिल रही थी. पांचवें ओवर की आखिरी गेंद पर प्रसिद्ध कृष्णा ने कीसे कार्टी को आउट करके टीम को पहली सफलता भी दिला दी. इसके बाद शुरू हुआ वेस्टइंडीज का अटैकिंग खेल. सबसे पहले जॉन कैंपबेल और शाई होप ने छोटी बाउंड्री का फायदा उठाना शुरू किया. दोनों के बीच दूसरे विकेट के लिए 110 रन की साझेदारी हुई. 101 रन बनाने के बाद जॉन कैंपबेल आउट हो गए. गुरनूर बरार ने कैंपबेल को आउट करके भारत को बड़ी सफलता दिलाई. उस समय ऐसा लगा कि भारत वापसी कर लेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
कैंपबेल के आउट होने के बाद आमिर जांगू क्रीज पर आए. उन्होंने भी उसी अंदाज में बल्लेबाजी की. होप को 27 रन के स्कोर पर कोहली ने जीवनदान दिया. कप्तान ने 94 गेंदों पर 104 रन की शानदार पारी खेली जिसमें आठ चौके और तीन छक्के शामिल थे. होप को जांगू का भी साथ मिला. जांगू 114 रन बनाकर नाबाद रहे.
भारतीय पेसर्स की बात करें तो गुरनूर बरार ने 96, और आकिब नबी ने 84 रन लुटाए. यह खिलाड़ी टीम को अहम समय पर ब्रेकथ्रू दिलाने में नाकाम रहे. इसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या टीम इंडिया को अनुभवी पेसर्स की जरूरत थी.
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सीनियर खिलाड़ियों को मिस कर रहा भारतभुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. दोनों ही खिलाड़ियों ने घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है. वह रणजी ट्रॉफी से लेकर IPL में प्रदर्शन कर रहे हैं. शमी ने 2025-26 घरेलू सीजन में 67 विकेट लिए थे. वहीं भुवी ने IPL 2026 में 28 विकेट लिए थे. उन्हें मौका नहीं मिल रहा है.
इसके लिए चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर की भी आलोचना हुई. अगरकर ने तब इशारों-इशारों में कहा था कि वह अब नए चेहरों को मौका देना चाहते हैं. हालांकि ये नए चेहरे अब तक प्रभावशाली नहीं रहे हैं. जसप्रीत बुमराह और सिराज की गैरमौजूदगी में भारतीय पेस अटैक कमजोर नजर आया.
परेशानी यह है कि एक साल बाद भारत को साउथ अफ्रीका में वर्ल्ड कप खेलना है. वहां की पिचें तेज गेंदबाजों के मुफीद होती हैं. ऐसे में तेज गेंदबाजों का सिलेक्शन काफी अहम होगा. भारत के पास जो विकल्प हैं उनके पास भी खुद को साबित करने के लिए बहुत समय नहीं है.
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