चंबल. मध्य प्रदेश का वो इलाका जो लूटपाट और डकैती के लिए मशहूर था. लेकिन इसी चंबल से एक ऐसे शख्स निकले, जिन्होंने IIT क्रैक किया. इसके बाद UPSC की कठिन परीक्षा पास की. आज वो एक अधिकारी बन गए हैं. हम बात कर रहे हैं देव प्रभाकर सिंह तोमर की. देव प्रभाकर के दादा को सरकारी रिकॉर्ड चंबल के डकैत के तौर पर बताता है. लेकिन प्रभाकर और उनका परिवार उन्हें ‘बागी’ कहते हैं.
दादा 'चंबल के डकैत', पोता IIT-UPSC 'फोड़' दिया
मध्य प्रदेश के चंबल के एक ऐसे शख्स ने UPSC क्रैक किया, जिसके दादा डाकू हुआ करते थे. उन शख्स का नाम देव प्रभाकर सिंह तोमर है. प्रभाकर ने पहले IIT क्रैक कर विदेश में नौकरी की. इसके बाद नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी में लग गए.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभाकर ने हाल ही में जोश टॉक्स को एक इंटरव्यू दिया. उन्होंने इस इंटरव्यू में अपने पूरे सफर के बारे में बताया. प्रभाकर बताते हैं कि उनकी यात्रा IIT और UPSC क्रैक करने से शुरू नहीं होती है. बल्कि, उनके दादा और पिता से शुरू होती है.
उस दौर में उनके दादा के सरकारी अधिकारियों से काफी विवाद होते थे. इसलिए वो 'बागी' बन गए. उनके परिवार ने उस दौर को भी देखा, जब घर में खाने-पीने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था. परंतु प्रभाकर के पिता को कुछ अलग करना था. इसलिए वो अपना गांव छोड़कर ग्वालियर चले गए. वहां उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और बाद में टीचर बन गए.
प्रभाकर के पिता के टीचर बनने के बाद स्थिति सामान्य हुई. उन्होंने भी अपने पिता की तरह पढ़ाई का रास्ता चुना. वो बताते हैं कि पांचवीं तक पढ़ाई मध्य प्रदेश बोर्ड से की. इसके बाद उनका एडमिशन सीबीएसई बोर्ड में करा दिया गया. शुरुआत के दिनों में उन्हें अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई करने में काफी समस्या होती थी. फिर बाद में चीजें आसान हो गईं.
UPSC करने का फैसला
11वीं में पढ़ते समय प्रभाकर के स्कूल के दोस्त IIT करने की बात करते थे. इसलिए उनका भी मन IIT करने का हुआ. उन्होंने पढ़ाई शुरू की और पहले ही प्रयास में एग्जाम क्रैक कर IIT रोपड़ में एडमिशन ले लिया. उन्होंने यहां से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की. इसके बाद वो नौकरी के लिए नीदरलैंड चले गए.
प्रभाकर ने यहां फिलिप्स कंपनी में काम किया, लेकिन उनका मन नहीं रमा. इसी दौरान उन्होंने UPSC करने का फैसला लिया और नौकरी छोड़कर भारत लौट आए. यहां उन्होंने दिल्ली में टीचर की नौकरी करते हुए UPSC की तैयारी शुरू की.
यह भी पढ़ें: बच्ची को देख मां के लिए कहा- 'कौन से वाले पापा', 5 साल बाद कोर्ट ने शख्स को दोषी माना, अब सजा होगी
पहले दो प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली. लेकिन लड़के ने हार नहीं मानी. प्रभाकर ने फिर से तैयारी शुरू की. उन्होंने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की और UPSC 2025 की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 629 हासिल की. उनका इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस (IRTS) के लिए चयन हुआ. आज वो रेल मंत्रालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
वीडियो: वाराणसी पुलिस का डांस वीडियो वायरल, DCP ने बताया AI Generated, विपक्ष ने उठाए सवाल













