रविंद्र जडेजा मौजूदा टेस्ट टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं. उन पर टीम के बॉलिंग अटैक को लीड करने की भी जिम्मेदारी है. इसी कारण जब जडेजा ने गॉल टेस्ट में नो-बॉल डाली तो सोशल मीडिया पर इसे लेकर उनकी काफी आलोचना होने लगी. इस नो-बॉल का खामियाजा भी भारत को भुगतना पड़ा.
रविंद्र जडेजा के 350वें विकेट पर भारी पड़ी एक नो बॉल, फैन्स भड़के
साल 2021 के बाद से रविंद्र जडेजा टेस्ट मैच में सबसे ज्यादा नो बॉल डालने वाले स्पिनर हैं. वह बीते छह सालों में 84 नो बॉल डाल चुके हैं. गॉल टेस्ट में भी उन्होंने नो बॉल डाली है.

श्रीलंकाई टीम जब दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने उतरी तो उनके सामने 372 रनों का लक्ष्य था. पारी के 16वें ओवर में धनंजया डी सिल्वा क्रीज पर थे. उनकी लाहिरू उदारा के साथ अच्छी साझेदारी पनपती दिख रही थी. ओवर की पांच गेंदों में जडेजा ने कोई रन नहीं दिया. आखिरी गेंद पर धनंजया डी सिल्वा ने शॉट खेलने की कोशिश की. गेंद बल्ले से लगकर केएल राहुल के दस्तानों में चली गई. टीम जश्न मनाने लगी. यहां तक कि ड्रेसिंग रूम में बैठे गौतम गंभीर भी तालियां बजाते हुए नजर आए, लेकिन महज 5 सेकंड बाद यह माहौल बदल गया.
रविंद्र जडेजा की नो-बॉलअचानक से साइरन बजा. हर कोई हैरान था कि यह हुआ क्या? अंपायर ने बताया कि गेंद डालते हुए जडेजा का पैर क्रीज के बाहर था. इसी कारण डी सिल्वा को भी नॉट-आउट करार दिया गया. रविंद्र जडेजा और कप्तान शुभमन गिल बहुत निराश हो गए, वहीं डी सिल्वा के चेहरे पर हल्की मुस्कान थी. जडेजा की इस नो-बॉल की सोशल मीडिया पर भी काफी आलोचना हुई. लोग नाराज थे कि जडेजा जैसा दिग्गज खिलाड़ी टेस्ट में ओवरस्टेप नो-बॉल कैसे डाल सकता है.
साल 2021 के बाद से रविंद्र जडेजा टेस्ट में सबसे ज्यादा नो-बॉल डालने वाले स्पिनर हैं. वह बीते छह सालों में 84 नो-बॉल डाल चुके हैं. वहीं दूसरे नंबर पर मौजूद नोमान अली ने 40 नो-बॉल डाली हैं. जडेजा ने इसी टेस्ट में अपने 350 विकेट भी पूरे किए हैं, लेकिन नो-बॉल ने इस उपलब्धि को ओवरशैडो कर दिया है.
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वहीं धनंजया डी सिल्वा ने इस जीवनदान का फायदा भी उठाया. दिन के आखिर तक वह नाबाद रहे. स्टंप्स तक वह 73 गेंदों में 31 रन बनाकर क्रीज पर जमे हुए थे. उनका साथ दे रहे पहली पारी में शतक लगाने वाले सोनल दिनुशा ने 36 गेंदों में 25 रन बना लिए थे. श्रीलंका ने चार विकेट खोकर 84 रन बना लिए. वह जीत से अब भी 288 रन दूर था. वहीं भारतीय टीम को मैच के आखिरी दिन जीत के लिए महज छह विकेट की जरूरत थी.
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