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हॉकी वर्ल्ड कप में चीन के खिलाफ इस एक गलती ने भारतीय टीम से जीत छीन ली!

भारत के लिए इस ड्रॉ की बहुत अहमियत है. इस मैच को भारत के लिए ग्रुप का सबसे मुश्किल मैच माना जा रहा था.

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चीन की टीम पेरिस ओलंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट है. (Photo-Hockey India)

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  • भारतीय महिला हॉकी टीम ने विश्व कप के अपने पहले मैच में ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट चीन के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेला, जो उनके ग्रुप राउंड में तीसरे स्थान पर रहने का कारण बना।
  • मैच के दौरान भारत ने पहला क्वार्टर दबाव में खेलकर 1-0 की बढ़त ली लेकिन एक गलती से चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिला, जो मैच को बराबरी पर ले आया।
  • भारत को अगले मैच में 18वीं रैंक वाली साउथ अफ्रीका के खिलाफ जीत दर्ज करनी होगी ताकि वह टूर्नामेंट के अगले दौर के लिए टॉप दो में बना रहे।

भारतीय महिला हॉकी टीम ने ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट चीन के खिलाफ 2-2 के ड्रॉ के साथ वर्ल्ड कप की शुरुआत की है. टीम फिलहाल ग्रुप राउंड में तीसरे स्थान पर है. भारत जिस ग्रुप में है, उस लिहाज से 2-2 से ड्रॉ खेलना भी काफी अहम है. ये अलग बात है कि भारत ये मैच जीत भी सकता था लेकिन सिर्फ एक गलती टीम को भारी पड़ गई. 

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चलिए आपको बताते हैं कि मैच में हुआ क्या?

भारत ने जल्दबाजी में लिया फैसला

भारतीय टीम ने पहले क्वार्टर में कमाल का खेल दिखाया. रैंकिंग में वर्ल्ड नंबर-दो चीन पर उन्होंने लगातार दबाव बनाए रखा. चीन को मूव बनाने के मौके नहीं दिए. खासतौर पर नवनीत कौर, जो मैदान पर हर जगह नजर आ रही थीं. चाहे ऑफेंस हो या डिफेंस. आखिरकार उन्होंने ही अपने गोल से टीम को 1-0 लीड दिलाई. लेकिन इसके बाद टीम से एक गलती हो गई. 

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आखिरी मिनट में रेफरी ने चीन को पेनाल्टी स्ट्रोक दिया. रेफरी के मुताबिक भारत की शिल्पी डबास ने चीन की जैंग यिंग को ब्लॉक किया. भारतीय टीम ने ज्यादा सोचे बिना टीवी रेफरल ले लिया. अंपायर ने रेफरल के बाद बताया कि पेनल्टी स्ट्रोक कायम रहेगा. चीन ने इसी स्ट्रोक को गोल में बदल दिया और 1-1 से बराबरी कर ली. भारत को मैच के आखिर में इसी रेफरल की जरूरत थी.

आखिरी क्वार्टर में थी जरूरत

आखिरी क्वार्टर में मैच 2-2 से ड्रॉ था. तभी भारतीय खिलाड़ियों ने अपील की कि चीन के सर्कल के अंदर उनके डिफेंडर के पैर में गेंद लगी है. इसी वजह से उन्होंने कॉर्नर की अपील की लेकिन फील्ड अंपायर ने इनकार कर दिया. भारत को उस समय अपने रेफरल की जरूरत थी लेकिन वह उसे पहले ही क्वार्टर में खो चुका था. अगर वह रेफरल होता तो शायद भारत के पास इस ड्रॉ मैच को जीतने का मौका होता. 

मैच खत्म होने के बाद भारतीय हेड कोच श्योर्ड मरीन्ये चीन की कोच एलिसन एनन से इसे लेकर बात करते हुए भी दिखाई दिए. उन्होंने मैच के बाद इंटरव्यू में भी अपनी निराशा जाहिर की. उनके मुताबिक आखिरी क्वार्टर में अंपायर्स को पेनल्टी कॉर्नर देना चाहिए था. इसके बावजूद भारत के लिए इस ड्रॉ की बहुत अहमियत है. इस मैच को भारत के लिए ग्रुप का सबसे मुश्किल मैच माना जा रहा था.

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भारत को अब अपना अगला मैच 18वीं रैंक वाली साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेलना है. अगर भारत को अपने पूल में टॉप 2 में रहना है तो यह मैच हर हाल में जीतना होगा.  विश्वकप के बदले फॉर्मेंट के हिसाब से इस बार हर पूल से टॉप दो टीमें दूसरे दौर का पूल राउंड खेलेंगी. जिसमें आठ टीमें होंगी. इस पूल में चार-चार टीमों के दो पूल होंगे लेकिन टीमें तीन नहीं बल्कि दो-दो मैच खेलेंगी. 

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