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मिड डे मील में नमक कम था, टीचर ने सर्फ डाल दिया, 40 बच्चे अस्पताल में भर्ती

Nalanda detergent in mid day meal: बिहार के नालंदा में एक स्कूल में मिड डे मील का खाना खाने के बाद कई छात्र बीमार पड़ गए. बच्चों ने कथित तौर पर सर्फ मिली सब्जी खा ली, जिसके बाद उन्हें पेट दर्द और उल्टी होने लगी.

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बच्चों ने खाने में कम नमक की शिकायत की थी. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • नालंदा के पारसी मिडिल स्कूल में मिड डे मील में नमक की जगह सर्फ पाउडर परोसने से लगभग 40 छात्र बीमार हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
  • दूसरे स्कूल से आया मिड डे मील भोजन था जिसमें एक शिक्षक ने गलती से नमक की जगह डिटर्जेंट वाला सर्फ डिब्बा खोलकर सब्जी में डाल दिया, जिससे खाने का स्वाद अजीब हो गया।
  • घटना के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन ने जांच शुरू कर खाद्य नमूने जांच के लिए भेजे हैं, तथा दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

बिहार के नालंदा में एक स्कूल में मिड डे मील खाने के बाद करीब 40 छात्र बीमार पड़ गए. बच्चों को खाने में नमक कम लगा था. उन्होंने मिड डे मील का मैनेजमेंट देख रहे लोगों से थोड़ा नमक मांगा था. लेकिन कथित तौर पर एक शिक्षक ने 'गलती' से नमक की जगह सर्फ का पाउडर सब्जी में परोस दिया. कई बच्चों ने डिटर्जेंट वाला खाना खा लिया, जिसके बाद उन्हें पेट दर्द और उल्टी होने लगी. उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया जहां सभी की हालत स्थिर बताई गई है.

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यह मामला नूरसराय थाना के पारसी मिडिल स्कूल का है. इंडिया टुडे से जुड़े रणजीत कुमार सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों के लिए दूसरे स्कूल से मिड डे मील का खाना आया था. उनको आलू-सोयाबीन की सब्जी और चावल परोसे गए थे. एक बच्ची ने सब्जी में नमक कम बताते हुए नमक मांगा था, लेकिन टीचर ने गलती से सर्फ दे दिया.

स्कूल के एक टीचर ने बताया,

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दो डिब्बा रखा हुआ था. गलती से नमक के बदले सर्फ वाला डिब्बा परोस दिया, जिसे बच्चों ने खा लिया. उनकी तबीयत खराब होने लगी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया.  

एक छात्र ने बताया, 

हमने सोयाबीन की सब्जी और चावल खाया था. टेस्ट थोड़ा अजीब लगा था. जैसे कुछ मसाला मिलाया हो. 

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बच्चों का इलाज बिहार शरीफ मॉडल अस्पताल में चल रहा था. डॉक्टर ने बताया कि सभी बच्चे स्थिर हैं. सिविल सर्जन ने बताया कि बच्चे ठीक होकर एक घंटे बाद घर चले जाएंगे. मामले पर बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि पूरी टीम बेहद मुस्दैती से बच्चों की देखभाल कर रही है. स्वास्थ्य महकमा हर बच्चे को परिवार की तरह देख रहा है. मैंने भी बच्चों से बात की. हाल चाल पूछा.

टीचर की लड़ाई बनी घटना का कारण?

आरोप यह भी लग रहे हैं कि शिक्षकों की आपसी लड़ाई के कारण ये घटना हुई. लेकिन मंत्री ने कहा, 

“बच्चे पूरी रह अबोध और निष्पक्ष होते हैं. बच्चों को लड़ाई से मतलब नहीं होता है. उन्हें पढ़ाई से मतलब होता है. सरकारी स्कूल में ज्यादातर गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं. उनकी सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.”

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मंत्री ने कहा है कि मामले में जो भी दोषी पाए जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी. घटना की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मामले की जांच में जुट गए हैं. खाने के नमूने जांच के लिए भेजे हैं.

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