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AAP नेता सत्येंद्र जैन गिरफ्तार, STP टेंडर घोटाले में ACB ने और किस-किसको धरा?

दिल्ली जल बोर्ड के STP टेंडर में कथित भ्रष्टाचार और गड़बड़ी के मामले में ACB ने पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर एक खास कंपनी को फायदा पहुंचाया गया और अधिकारियों तक कथित रिश्वत की रकम पहुंचाई गई.

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दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन गिरफ्तार. (फोटो- India Today)

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  • आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को एंटी करप्शन ब्यूरो ने 18 अगस्त को दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के टेंडर में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया।
  • यह मामला 2024 में जारी किए गए टेंडर से जुड़ा है, जिसमें टेंडर की शर्तों में बदलाव कर एक खास कंपनी यूरोटेक एनवायरमेंट को लाभ पहुंचाने का आरोप है, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
  • एसीबी ने इस मामले में जांच जारी रखी है और आरोपितों के खिलाफ धन की धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी की मनी ट्रेल की विस्तृत जांच आगे बढ़ाई जाएगी।

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को एंटी करप्शन ब्यूरों ने मंगलवार, 18 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया. उनके साथ 5 और लोगों की गिरफ्तारी हुई है. दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़े टेंडर में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के मामले में ये बड़ी कार्रवाई की गई है. ये कथित गड़बड़ियां उस समय हुईं, जब सत्येंद्र जैन दिल्ली सरकार में जल मंत्री थे. इसके अलावा दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास थी. 

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गिरफ्तार लोगों में सत्येंद्र जैन के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव, एएन एंटरप्राइजेज के नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवायरमेंट के मालिक राजा कुमार कुर्रा और सृजनहार के मालिक पंकज वर्मा शामिल हैं.

क्या है मामला?

मामला 2024 का है. दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के अपग्रेडेशन और क्षमता बढ़ाने के लिए जारी किए गए टेंडर से जुड़ा है. आरोप है कि टेंडर की शर्तों और स्पेसिफिकेशन में इस तरह बदलाव किए गए, जिससे एक खास टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर यूरोटेक एनवायरमेंट प्राइवेट लिमिटेड को फायदा पहुंचाया जा सके. एसीबी का दावा है कि टेंडर के लिए पायलट स्टडी नहीं कराई गई थी और इसमें ऐसी टेक्निकल कंडीशन लगाई गई थीं कि दूसरी कंपनियों के लिए कंपटीशन सीमित हो गया था. इस अनियमितता का असर सरकारी खजाने पर भी पड़ा.

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11 मई 2024 को इस केस में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के साथ IPC की धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं लगाई गई थीं.

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निजी कंपनी और अधिकारियों में सांठगांठ

इंडिया टुडे से जुड़े अरविंद ओझा की रिपोर्ट के मुताबिक, एसीबी का कहना है कि जांच में निजी कंपनियों और सरकारी अधिकारियों के बीच कथित साठगांठ और टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने का संकेत मिला है.

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सबसे गंभीर आरोप दिल्ली जल बोर्ड के तत्कालीन CEO उदित प्रकाश राय पर लगा है. ACB के मुताबिक, राय और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों में एएन इंटरप्राइजेज के जरिए करीब 1.52 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए. जांच एजेंसी का आरोप है कि ये पैसा रिश्वत के तौर पर दिया गया था. बाद में इससे अचल संपत्तियां खरीदी गईं. एजेंसी के मुताबिक, एएन इंटरप्राइजेज को ये पैसा यूरोटेक से जुड़ी संस्थाओं के जरिए मिला था. ACB अब इस पूरे पैसे के लेन-देन और कथित रिश्वत की रकम के अंतिम इस्तेमाल की जांच कर रही है.

एजेंसी ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है. इसमें और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं. इस केस में टेंडर प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार, सरकारी खजाने को हुए नुकसान और रिश्वत की पूरी मनी ट्रेल की जांच की जा रही है.

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