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6 महीने में 27 नेशनल रिकॉर्ड! भारतीय एथलीट्स के जलवे की पूरी इनसाइड स्टोरी

क्या खिलाड़ियों की मेहनत कई गुना बढ़ गई है? क्या टेक्नोलॉजी ने बड़ा बदलाव किया है? या फिर भारतीय एथलेटिक्स किसी नए दौर में प्रवेश कर चुका है? आखिर कैसे 6 महीने में टूट गए 27 नेशनल रिकॉर्ड?

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भारतीय एथलेटिक्स में नया दौर आया है जहां रिकॉर्ड्सटूट रहे हैं. (Photo-PTI)

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  • जनवरी 2026 से लेकर अब तक भारतीय एथलेटिक्स में 27 नेशनल रिकॉर्ड टूटे हैं, जिसमें मैराथन, पोल वॉल्ट, 100 मीटर और मिक्स्ड 4×100 मीटर रिले सहित कई इवेंट शामिल हैं।
  • कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के लिए उच्च क्वालिफिकेशन स्टैंडर्ड्स, बढ़ती आंतरिक प्रतिस्पर्धा और कॉर्पोरेट प्रायोजन ने भारतीय एथलीटों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया है।
  • रिकॉर्ड टूटने से एथलीटों का प्रदर्शन सुधरा है और उन्हें मेडल जीतने की दिशा में प्रोत्साहन मिला है, जिससे भविष्य में और ऊंचे स्तर पर प्रदर्शन की सम्भावना बढ़ी है।

6 महीने, 21 एथलीट और 27 नेशनल रिकॉर्ड. भारतीय एथलेटिक्स में इन दिनों रिकॉर्ड टूटना जैसे आम बात हो गया है. 1 जनवरी 2026 से लेकर आज तक कई नेशनल रिकॉर्ड टूट चुके हैं. इनमें कुछ रिकॉर्ड ऐसे थे, जो सालों से कायम थे. वहीं, कुछ रिकॉर्ड लगभग हर बड़े टूर्नामेंट के साथ टूटते रहे. कुछ ऐसे भी रहे, जो एक ही टूर्नामेंट के दौरान कई बार टूटे.

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लेकिन, कहानी सिर्फ रिकॉर्ड बनने और टूटने की नहीं है. असली सवाल यह है कि आखिर पिछले छह महीनों में भारतीय एथलेटिक्स में ऐसा जबरदस्त उछाल कैसे आया? कैसे भारतीय एथलीट लगातार फिनिशिंग लाइन के साथ-साथ रिकॉर्ड टाइमिंग भी तोड़ते रहे?

क्या खिलाड़ियों की मेहनत कई गुना बढ़ गई है? क्या टेक्नोलॉजी ने बड़ा बदलाव किया है? या फिर भारतीय एथलेटिक्स किसी नए दौर में प्रवेश कर चुका है? आइए, इसकी पूरी कहानी समझते हैं.

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सबसे पहली वजह है टाइमिंग

ये रिकॉर्ड ऐसे साल में टूटे हैं, जिसमें कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स होने हैं. इन दोनों प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन ने जो क्वालिफिकेशन स्टैंडर्ड तय किए, वे काफी ऊंचे और चुनौतीपूर्ण थे. कई इवेंट्स ऐसे थे, जिनमें क्वालिफाई करने के लिए खिलाड़ियों को या तो मौजूदा नेशनल रिकॉर्ड की बराबरी करनी थी या उसे तोड़ना था.

कॉमनवेल्थ गेम्स में सिर्फ मेडल ही दांव पर नहीं होता. यहां अच्छा प्रदर्शन करने पर खिलाड़ियों को प्राइज मनी, सरकारी नौकरी और प्रमोशन जैसे कई फायदे भी मिलते हैं. ऐसे में खिलाड़ियों ने कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के लिए खुद को पहले से कहीं ज्यादा पुश किया. कठिन क्वालिफिकेशन स्टैंडर्ड ने उन्हें अपनी सीमाओं से आगे जाने के लिए प्रेरित किया. इसी का नतीजा रहा कि लगातार नए नेशनल रिकॉर्ड बनते गए.

पोल वॉल्ट के नेशनल रिकॉर्ड होल्डर देव मीणा भी इससे सहमत हैं. उन्होंने लल्लनटॉप को बताया,

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मुझे लगता है कि एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए जो क्वालिफिकेशन मार्क तय किए गए, उन्होंने हमें अतिरिक्त मेहनत करने के लिए प्रेरित किया. मेरे इवेंट में 5.45 मीटर का मार्क एशियन गेम्स का क्वालिफिकेशन स्टैंडर्ड था. उसे हासिल करने के लिए मैंने खुद को अपनी लिमिट तक पुश किया और पहले से ज्यादा मेहनत की, ताकि मैं क्वालिफाई कर सकूं.

अगली बड़ी वजह है इंटरनल कॉम्पिटिशन

लगभग हर इवेंट में कॉम्पिटिशन पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है. अब सिर्फ एक या दो नहीं, बल्कि कई एथलीट्स मेडल और नेशनल रिकॉर्ड के दावेदार बनकर उभर रहे हैं. यही प्रतिस्पर्धा खिलाड़ियों को लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित कर रही है.

उदाहरण के तौर पर पोल वॉल्ट में देव मीणा को लगातार कुलदीप यादव से चुनौती मिल रही है. दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को बेहतर प्रदर्शन के लिए मजबूर किया और रिकॉर्ड भी लगातार बेहतर हुए. 100 मीटर में गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर के बीच भी शानदार मुकाबला देखने को मिला. हालात ऐसे रहे कि सिर्फ फाइनल ही नहीं, बल्कि हीट्स में भी रिकॉर्ड टूटते रहे.

इसी तरह हाई जंप में तेजस्विन शंकर और सर्वेश कुशारे के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा रही. तेजस्विन अब फुल फ्लेज हाई जंप नहीं करते, लेकिन तब भी उनका नेशनल रिकॉर्ड कई एथलीट्स को प्रेरित करता रहा. लॉन्ग जंप में शैली सिंह और एंसी सोजन जैसी अन्य दावेदारों के बीच लगातार बेहतर प्रदर्शन की होड़ देखने को मिली.

और यह जग जाहिर है कि जितना मजबूत घरेलू कॉम्पिटिशन होगा, उतनी ही तेजी से खिलाड़ियों का प्रदर्शन सुधरेगा और नेशनल रिकॉर्ड टूटने की संभावना भी बढ़ेगी.

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तीसरी अहम वजह है, एथलेटिक्स में कॉर्पोरेट्स की एंट्री 

पिछली सदी तक भारतीय एथलेटिक्स में स्पॉन्सर्स की काफी कमी थी. हालांकि, धीरे-धीरे काफी बदलाव आया है. मौजूदा समय में कई कॉर्पोरेट कंपनी खिलाड़ियों को स्पॉन्सर कर रही हैं. इससे खिलाड़ियों को कई तरह के फायदे होते हैं. आर्थिक मदद के साथ-साथ खिलाड़ियों को एक्सपोजर भी मिलता है. वह लगातार विदेशी कंडीशंस में ट्रेनिंग करते हैं और फिर वहीं कंपीट भी करते हैं. रिलायंस इस समय एथलेटिक्स के सबसे बड़े स्पॉन्सर्स में शामिल हैं. इस बारे में लल्लनटॉप ने रिलायंस फाउंडेशन के एथलेटिक्स डायरेक्टर जेम्स हिलियर से बात की, जिन्होंने इस बारे में विस्तार से बताया.

उन्होंने कहा कि फाउंडेशन ने अपने एथलीट्स के आसपास एक मजबूत और व्यवस्थित सपोर्ट सिस्टम तैयार किया है. यहां पूरी प्लानिंग के साथ काम किया है और खिलाड़ियों को उनके प्रदर्शन को लेकर स्पष्ट दिशा दी जाती है. एथलीट और कोच, दोनों के लिए एक ऐसा सिस्टम बनाया है जो उन्हें लगातार बेहतर बनने में मदद करता है. उन्होंने कहा,

एथलीट जानते हैं कि जब वे डाइनिंग हॉल में खाना खा रहे हैं, तो उन्हें सर्वश्रेष्ठ पोषण मिल रहा है. जब वे यात्रा कर रहे हैं, तो उन्हें सबसे बेहतर फ्लाइट और सुविधाएं दी जा रही हैं. उन्हें सिर्फ ठहरने के लिए होटल का कमरा नहीं दिया जाता, बल्कि ऐसा वातावरण दिया जाता है जहां वे अच्छी तरह आराम कर सकें और पूरी तरह तरोताजा होकर प्रतियोगिता में उतरें.

फाउंडेशन के शुरुआती दिनों को याद करते हुए जेम्स ने बताया,

हमने शुरुआत सिर्फ तीन लोगों की टीम से की थी. उस समय हमारे साथ एक भी एथलीट नहीं था. आज हमारे साथ 100 से ज्यादा एथलीट हैं, जो इसी फिलॉसफी पर भरोसा करते हैं. हम हर दिन यही कोशिश करते हैं कि उन्हें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं और माहौल मिले. हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में यही सिस्टम भारतीय एथलेटिक्स को और ऊंचाइयों तक ले जाएगा.

कुल मिलाकर भारतीय एथलेटिक्स में इन रिकॉर्ड्स की कहानी बहुत गहरी और असरदार है, जो बदलाव कुछ समय पहले हुए उसका फल अब दिख रहा है. भारतीय एथलीट्स अब क्वालिफाई करने के लिए नहीं, बल्कि मेडल जीतने के लिए खेल रहे हैं. 

6 महीने में टूटे 27 रिकॉर्ड्स 

इस सीज़न (2026) में 27 नेशनल रिकॉर्ड्स टूटे

1. राम बाबू (मैराथन रेस वॉक) 
2. मंजू रानी (मैराथन रेस वॉक) 
3. रवीना (हाफ मैराथन रेस वॉक) 
4. साहिल (हाफ मैराथन रेस वॉक)

गुरिंदरवीर – अनिमेष: इस सीज़न में भारत का 100 मीटर का नेशनल रिकॉर्ड तीन बार बदला गया

5. गुरिंदरवीर ने फेडरेशन कप के सेमीफाइनल में 10.17 सेकेंड का समय लिया.

6. अनिमेष ने सेमीफाइनल में 10.15 सेकेंड के साथ इसे बेहतर किया.

7. गुरिंदरवीर ने फाइनल में इसे और बेहतर करते हुए 10.09 सेकेंड का समय लिया.

पुरुषों के पोल वॉल्ट नेशनल रिकॉर्ड में इस सीज़न में चार बार सुधार हुआ

8. कुलदीप ने नेशनल इंडोर चैंपियनशिप में 5.41 मीटर की ऊंचाई पार करके नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया.

9. देव मीणा ने फेडरेशन कप में 5.42 मीटर की ऊंचाई पार की.

10. कुलदीप और देव दोनों ने 5.45 मीटर की ऊंचाई पार की.

11. देव ने इंटर स्टेट चैंपियनशिप में 5.46 मीटर की ऊंचाई पार की और एशियाई खेलों के क्वालिफिकेशन मार्क को पार किया.

महिलाओं के पोल वॉल्ट नेशनल रिकॉर्ड में इस सीज़न में तीन बार सुधार हुआ

12. बरनिका इलांगोवन ने नेशनल इंडोर चैंपियनशिप में 4.22 मीटर की ऊंचाई पार करके नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा.

13. उन्होंने कंबाइंड इवेंट्स इंडोर चैंपियनशिप में इसे और बेहतर करते हुए 4.23 मीटर किया.

14. सिंधुश्री जी ने इंटरस्टेट चैंपियनशिप में 4.25 मीटर की ऊंचाई पार करके इसे एक बार फिर बेहतर किया.

15. पारुल चौधरी (5000m)

16. पूजा (हाई जंप)

17. तेजस शिर्से (110m हर्डल्स)

18. गुलवीर सिंह (5000m)

19. विशाल TK (400m)

इस सीज़न में मिक्स्ड 4×100m रिले का नेशनल रिकॉर्ड दो बार टूटा

20. भारत की 4×100m मिक्स्ड रिले टीम B

21. भारत की 4×100m मिक्स्ड रिले टीम ने वर्ल्ड रिले में इतिहास रचा और 41.35 सेकेंड का शानदार समय लेकर नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा

टीम: अनिमेष • राघुल • नित्या • स्नेहा

22. अनुष्का यादव (महिलाओं का हैमर थ्रो)

23. सर्वेश कुशारे (हाई जंप)

24. एंसी सोजन (लॉन्ग जंप)

25. तेजस्विन शंकर (डेकाथलॉन)

26. गुरिंदरवीर सिंह (60m)

27.  सावन बरवाल ने भारत का सबसे पुराना नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा!

सावन बरवाल ने इतिहास रचते हुए मैराथन में भारत का सबसे लंबे समय से कायम नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा. उन्होंने NN मैराथन रॉटरडैम में 2:11:58 का समय लेकर 20वां स्थान हासिल किया.

उन्होंने दिग्गज शिवनाथ सिंह के 2:12:00 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, जो 1978 में जालंधर में बना था.

यह रिकॉर्ड 47 साल, 10 महीने और 15 दिन तक कायम रहा- जो इसे भारतीय एथलेटिक्स का सबसे पुराना नेशनल रिकॉर्ड बनाता है.

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