पश्चिम बंगाल के बरुईपुर रेप और मर्डर केस में आधी रात बड़ा एक मोड़ आया है. 12 साल की बच्ची के साथ रेप और हत्या के आरोप में गिरफ्तार प्रभाष मंडल की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई है. पुलिस का दावा है कि क्राइम सीन रीक्रिएशन के दौरान उसने पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर फायरिंग की. सिससिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर उस रात हुआ क्या हुआ?
बरुईपुर रेप-मर्डर केस: आरोपी का आधी रात को एनकाउंटर, पिस्तौल छीन कर रहा था भागने की कोशिश
बरुईपुर रेप-मर्डर केस में एक आरोपी का पुलिस ने आधी रात एनकाउंटर कर दिया है. पुलिस ने बताया कि 12 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी के मामले में पुलिस आरोपी को क्राइम सीन रीक्रिएट करने गई थी, जिस दौरान उसने भागने की कोशिश की.


पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर में 11 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी. इस मामले में पुलिस क्राइम सीन रीक्रिएट करने आरोपी को लेकर वारदात वाली जगह पर गई थी. 8 जुलाई की रात करीब 12 बजकर 45 मिनट पर जांच अधिकारी अपनी टीम के साथ आरोपी प्रभाष मंडल को लेकर बरुईपुर थाने से सूर्यपुर इलाके में पहुंचे थे. इस जगह पर वारदात की पूरी कड़ी दोबारा समझी जानी थी, जिसे पुलिस की भाषा में क्राइम सीन रीक्रिएशन कहा जाता है.
पुलिस का दावा है कि रीक्रिएशन शुरू होने से ठीक पहले प्रभाष मंडल ने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीन लिया. इसके बाद उसने पुलिस टीम पर एक राउंड फायर किया और भागने की कोशिश की. पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें प्रभाष घायल हो गया. उसे तुरंत बरुईपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस का कहना है कि अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
यह पूरी घटना 4 जुलाई की है. 4 जुलाई को 11 साल की बच्ची घर से अपने दोस्त के लिए बर्थडे गिफ्ट खरीदने निकली थी. इसके बाद वो वापस नहीं लौटी. अगले दिन उसका शव एक तालाब में बोरे के अंदर मिला. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि बच्ची के साथ रेप हुआ था और उसे जिंदा हालत में तालाब में फेंका गया था.
इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इनमें प्रभाष मंडल, दिबाकर सरदार और आनंद सरदार शामिल थे. पुलिस एक चौथे संदिग्ध की भी तलाश कर रही है, जिसकी पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है. वहीं एनकाउंटर के बाद प्रभाष मंडल की मां ने उसकी लाश को देखने से इंकार कर दिया है.
मां ने शव देखने से इनकार कियाआजतक से जुड़े अनुपम की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभाष मंडल की मां संध्या मंडल ने बताया कि सुबह करीब साढ़े पांच से छह बजे के बीच पुलिस उनके घर आई. पुलिस ने उनसे पूछा कि क्या प्रभाष मंडल उनका बेटा है. जब उन्होंने हां कहा, तो पुलिस ने बताया कि प्रभाष की मौत हो गई है और उसका शव अस्पताल में है. इसके बाद संध्या मंडल ने बताया कि, उन्होंने पुलिस से साफ कह दिया कि वे बेटे का शव देखने भी नहीं जाएंगी. उन्होंने कहा,
अब उसे देखकर क्या करूंगी? मुझमें वहां जाने की भी ताकत नहीं है.
जब उनसे पूछा गया कि क्या बेटे की मौत का दुख नहीं है, तो उन्होंने कहा,
मां हूं, दुख तो होगा. लेकिन उसने जो किया, उसी का नतीजा उसे मिला. मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है. मैं नहीं जाऊंगी. मैं उसका शव भी नहीं लाऊंगी. आप लोग जो करना चाहें, कर दें. उसे दफना दें या कहीं भी ले जाएं.
इससे पहले भी प्रभाष की मां ने कहा था कि अगर उनका बेटा इस अपराध में शामिल है तो उसे बाकी आरोपियों के साथ मौत की सजा मिलनी चाहिए. संध्या ने बताया कि उनके तीन बेटे हैं और प्रभाष दूसरा बेटा था. वो पहले कैटरिंग का काम करता था जबकि उसकी पत्नी कोलकाता में बतौर हाउस हेल्प काम करती है. उन्होंने कहा कि पहले प्रभाष का व्यवहार ठीक था, लेकिन कुछ समय से उसकी संगत खराब हो गई थी. उन्होंने कई बार उसे नशे और गलत आदतों से दूर रहने के लिए समझाया, लेकिन उसने किसी की बात नहीं सुनी. उनका कहना था कि उन्हें नहीं पता कि 4 तारीख की रात क्या हुआ, लेकिन अगर उनका बेटा दोषी है तो उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए.
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बाकी आरोपी कहां हैं?दूसरे आरोपी दिबाकर सरदार के परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, दिबाकर की मां मधुबाला सरदार का कहना है कि, उनके बेटे को गलती से गिरफ्तार किया गया है. उनके मुताबिक गांव के किसी दूसरे दिबाकर की जगह पुलिस ने गलत व्यक्ति को पकड़ लिया. परिवार का कहना है कि दिबाकर 4 जुलाई की रात करीब आठ बजे मछली की दुकान से घर लौट आया था और उसके बाद कहीं नहीं गया. दिबाकर के छोटे भाई भास्कर ने भी दावा किया कि पुलिस ने परिवार को दिबाकर से मिलने तक नहीं दिया है. उनका कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या करें.
वहीं तीसरे आरोपी आनंद सरदार की बात करें तो उसका घर इस समय खाली पड़ा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक बच्ची का शव मिलने के बाद गुस्साई भीड़ ने उसके घर पर तोड़फोड़ की थी. इससे पहले ही उसका परिवार वहां से भाग गया था. पड़ोसियों का कहना है कि आनंद ड्राइवर था और उसका भाई भी ड्राइवर है. आनंद बच्ची के पिता के साथ काम करता था और उनकी लकड़ी के फर्नीचर की ढुलाई करता था. लोगों का कहना है कि इस घटना से पहले उसके खिलाफ किसी बड़े आपराधिक मामले की जानकारी नहीं थी. बाद में पुलिस ने उसे बरुईपुर बाजार इलाके से गिरफ्तार किया.
इस मामले में लोगों का गुस्सा इतना बढ़ गया था कि बच्ची का शव मिलने के बाद 26 साल के इंद्रजीत मंडल को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था. उस पर इस अपराध में शामिल होने का शक था. हालांकि पुलिस इस पूरे मामले की जांच अलग से कर रही है. अब इस केस में एक आरोपी की एनकाउंटर में मौत हो चुकी है. तीन में से दो आरोपी पुलिस हिरासत में हैं. चौथे संदिग्ध की तलाश जारी है.
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