टीम इंडिया गॉल टेस्ट के पहले दिन मेजबान श्रीलंका पर बढ़त बनाने में सफल रही. इसका श्रेय जाता है टीम इंडिया के नंबर 3 बैटर देवदत्त पडिक्क्ल और ओपनर केएल राहुल को. देवदत्त ने इस दौरान टेस्ट करियर की पहली सेंचुरी लगाई. लेकिन, जिस चीज ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया वो है देवदत्त की टाइमिंग. साथ ही जिस अंदाज में उन्होंने मेजबानों के स्पिन के जाल को भेदने की तैयारी की.
देवदत्त पडिक्कल ने गॉल में कैसे तोड़ा श्रीलंकाई स्पिन का मायाजाल?
Ind vs SL Galle Test: देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ गॉल में 131 रनों की दमदार पारी खेली. उनके बैकफुट गेम, स्वीप्स और स्पिनर्स को अटैक करने की क्षमता ने टीम इंडिया को मुकाबले के पहले दिन बढ़त दिलाई.

2 साल बाद टीम इंडिया में वापसी कर रहे देवदत्त ने पहले दिन 131 रनों की पारी खेली. उनका साथ दिया केएल राहुल ने, जिन्होंने रिटायर्ड हर्ट होने से पहले 77 रनों की दमदार पारी खेली. इसके कारण बारिश से प्रभावित पहले दिन के खेल में 73 ओवर्स के बाद टीम इंडिया ने 2 विकेट पर 288 रन बनाए.
26 साल के देवदत्त की सेंचुरी कई मायनों में खास थी. हालात मुश्किल थे. श्रीलंका के स्पिनरों से कड़ी चुनौती मिल रही थी. लेकिन, क्या आपको पता है इसके लिए देवदत्त ने खास तैयारी की थी. ये बात खुद टीम इंडिया के बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने बताई. कोटक ने कहा,
पडिक्कल की तैयारी का मैदान पर दिखा असरमैं उनके लिए बहुत खुश हूं क्योंकि वह असल में अपने मौके का इंतज़ार कर रहे थे. वह अपने बैक-फुट गेम पर काम कर रहे थे. जब हमें पिच से टर्न की उम्मीद होती है तो हम ऐसा करने की कोशिश करते हैं. हमने बैक-फुट गेम के अलावा स्टेप-आउट और स्वीप पर भी काम करने की कोशिश की.
पडिक्कल की पारी कोटक की बातों का एक तरह से सबूत थी. श्रीलंका के स्पिनरों को हावी होने देने के बजाय, उन्होंने क्रीज़ में अपनी गहराई का फ़ायदा उठाया. ज़रूरत पड़ने पर आगे बढ़े और लगातार स्वीप शॉट खेलकर उनकी लाइन बिगाड़ी. गॉल के किंग कहे जाने वाले प्रभात जयसूर्या के खिलाफ उनका ये तकनीक काफी असरदार रहा. पडिक्कल ने बाएं हाथ के स्पिनर के खिलाफ आगे बढ़कर लॉन्ग-ऑन के ऊपर से छक्का लगाया. इससे पता चला कि मौका मिलते ही वह हमला करने के लिए तैयार थे.
स्वीप शॉट उनका एक और बड़ा हथियार था. पडिक्कल ने अपनी पारी के दौरान स्वीप शॉट से लगभग 40 रन बनाए. इससे ये पता चलता है कि उन्होंने टर्निंग पिच के हिसाब से कितनी सोच-समझकर अपना गेम तैयार किया था. उनका शतक वॉर्म-अप मैच में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद आया. इससे टीम मैनेजमेंट को और सबूत मिला कि उनकी तैयारी का फायदा उन्हें रनों के रूप में मिल रहा था.
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मौके का इंतज़ार करने से लेकर उसे भुनाने तकपडिक्कल को यह मौका इसलिए मिला क्योंकि साई सुदर्शन पैर की उंगली में चोट के कारण उपलब्ध नहीं थे. उन्होंने अपनी वापसी को सिर्फ एक मौका नहीं माना, बल्कि इसे मजबूती से भुनाया. कोटक के मुताबिक, बैटिंग के तय क्रम से बहुत फर्क नहीं पड़ता है. उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह ज़्यादा जरूरी है कि खिलाड़ी हालात के हिसाब से खुद को ढाल सके. न कि यह कि वह नंबर 3, 4 या 5 पर बैटिंग करता है. सुदर्शन की जब वापसी होगी, तो यही फ्लेक्सिबिलिटी अहम साबित हो सकती है. कोटक ने कहा,
मैं देखूंगा कि वो कैसे बैटिंग करते हैं. हालात के हिसाब से खुद को कैसे ढालते हैं? मैच के अलग-अलग स्टेजेज को कैसे हैंडल करते हैं.
श्रीलंका के स्पिन और फील्डिंग कोच जॉर्डन ग्रेगरी ने भी पडिक्कल के इंपैक्ट को माना. साथ ही श्रीलंका के खिलाफ खेल को आगे ले जाने के लिए उनकी और राहुल की तारीफ की. ग्रेगरी ने कहा,
मुझे लगता है कि सबसे पहले तो पडिक्कल को इसका श्रेय जाना चाहिए. मुझे लगता है कि उन्होंने आज शानदार बैटिंग की और केएल ने भी. चोटिल होना उनके लिए दुर्भाग्यपूर्ण रहा.
हालांकि, पडिक्कल का काम अभी खत्म नहीं हुआ है. भारत पहले से ही मजबूत स्थिति में है. ऐसे में पडिक्कल अपनी पारी को और आगे बढ़ाना चाहेंगे. शायद अपनी सेंचुरी को डबल सेंचुरी में भी बदलना चाहेंगे. वह ऋषभ पंत के साथ पहले ही 52 रन जोड़ चुके हैं. दोनों इस पार्टनरशिप को और आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक होंगे.
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