बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन और BJP सांसद मनन कुमार मिश्रा ने लॉ स्टूडेंट्स से माफी मांगी है. एक पत्र में उन्होंने खेद जताया कि अगर उनकी किसी बात से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उन्हें इसका अफसोस है. मनन मिश्रा ने NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के सभी छात्रों के राज्य की बार काउंसिलों में बतौर वकील एनरोलमेंट पर रोक लगाई थी. विवाद बढ़ने के बाद इस फैसले को वापस ले लिया गया.
BCI अध्यक्ष मनन मिश्रा ने लॉ स्टूडेंट्स से माफी मांगी, NALSAR के छात्रों के वकील बनने पर रोक लगाई थी
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन और BJP सांसद Manan Kumar Mishra ने लॉ छात्रों से माफी मांगी है. उन्होंने NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों के बार काउंसिलों में बतौर वकील एनरोलमेंट पर रोक लगाई थी. क्या है पूरा मामला?

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद और पिछले 11 साल 9 महीने से लगातार BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने 15 अगस्त को जारी एक लेटर में लिखा,
“अगर मौजूदा विवाद से जुड़ी किसी भी चीज, मेरे किसी शब्द या पत्र से हमारे लॉ के छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं इसके लिए ईमानदारी से खेद और माफी मांगता हूं.”
मनन कुमार मिश्रा ने अपने लेटर में किसी यूनिवर्सिटी का नाम नहीं लिया और न ही किसी खास विवाद का सीधे तौर पर जिक्र किया गया. उन्होंने लिखा,
"ऐसा कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए. अफसोस जाहिर करना अहंकार का मामला नहीं है. बस यह मानना है कि हमारे छात्रों की भावनाएं और चिंताएं मायने रखती हैं."
(पूरा लेटर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
BCI की वेबसाइट के मुताबिक, मनन कुमार मिश्रा पहली बार 17 अप्रैल 2012 से 16 अप्रैल 2014 तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन रहे. इसके बाद 9 नवंबर 2014 से अब तक वे लगातार BCI के चेयरमैन पद पर बने हुए हैं.
क्या है पूरा मामला?NALSAR यानी ‘नेशनल अकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च’ हैदराबाद की एक प्रतिष्ठित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी है. मामला यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह से जुड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक, NALSAR के दीक्षांत समारोह में चीफ गेस्ट के तौर पर CJI जस्टिस सूर्यकांत को बुलाने की बात चल रही थी. लेकिन 2026 बैच के कई छात्र इसके खिलाफ थे.
450 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की थी कि CJI को कॉन्वोकेशन में बुलाने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए. स्टूडेंट्स ने CJI की कुछ हालिया न्यायिक सुनवाइयों को लेकर आपत्ति दर्ज की थी. खास तौर पर 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद की तरफ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले का जिक्र किया गया था.
BCI ने लिया एक्शनइसके बाद BCI ने इस मामले में कड़ा एक्शन लिया. BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की तरफ से जारी एक लेटर में कहा गया कि 2026 में NALSAR से लॉ डिग्री लेने वाले छात्रों को फिलहाल किसी स्टेट बार काउंसिल में वकील के तौर पर एनरोल नहीं किया जाए.
कुछ ही घंटो में यू-टर्न लियासोशल मीडिया पर बार काउंसिल के इस फैसले का जमकर विरोध हुआ. भारी दबाव के बीच BCI ने अपने फैसले में बदलाव किया है. नए लेटर में BCI की ओर से बताया गया कि ज्यादातर स्टूडेंट बेकसूर थे. यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को बुलाने का विरोध करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी. BCI की ओर से आगे बताया गया कि मामले की जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी छात्र के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा.
CJI ने लगाई फटकारBCI के एक्शन के खिलाफ भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने भी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि यह उनके और छात्रों के बीच का मामला है. CJI ने कहा कि छात्रों को विरोध करने का अधिकार है और BCI को इसमें दखल देने की जरूरत नहीं है.
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छात्रों ने माफी की मांग की थीNALSAR छात्रों के खिलाफ एक्शन भले ही वापस ले लिया गया, लेकिन जिस तरह से BCI ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला लिया, उसे लेकर उनकी आलोचना होती रही. BCI चेयरमैन के पत्र की भाषा की भी आलोचना हुई, क्योंकि उन्होंने इस कथित कैंपेन को ‘घिनौनी राजनीति’ कहा था.
NALSAR और ‘नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी’ (NLSIU) के छात्रों और पूर्व छात्रों ने मनन मिश्रा से बिना शर्त माफी की मांग की थी. इसके बाद 15 अगस्त को उन्होंने एक पत्र जारी कर माफी मांगी.
BCI अध्यक्ष ने कहा कि न्यायपालिका, बार, यूनिवर्सिटीज और लॉ के छात्रों के बीच का रिश्ता किसी भी अस्थायी विवाद की तुलना में कहीं ज्यादा गहरा है. उन्होंने कहा कि मतभेदों को बातचीत और आपसी सम्मान के जरिए सुलझाया जाना चाहिए.
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