The Lallantop

अर्जेंटीना के मैच में क्यों नहीं हो सकते इंग्लैंड के रेफरी? फीफा का पूरा नियम जान लीजिए

वर्ल्ड कप के बाकी मैचों में रेफरी की नियुक्ति हर मैच के हिसाब से की जाती. इसमें रेफरी के पिछले प्रदर्शन को देखा जाता है. साथ ही वह जिस देश का है उसके भौगोलिक और राजनीतिक पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता.

Advertisement
post-main-image
अर्जेंटीना के मैच में क्यों नहीं हो सकते इंग्लैंड के रेफरी. (Photo-REUTERS)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • अर्जेंटीना ने प्री क्वार्टर फाइनल में जीत हासिल की, जिसके बाद इजिप्ट के फुटबॉल फेडरेशन ने मैच के रेफरी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, लेकिन फीफा ने अपना समर्थन जारी रखा।
  • फीफा वर्ल्ड कप में न्यूट्रल अंपायरिंग को सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक और भौगोलिक टकराव से बचने हेतु इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच अंपायरिंग को प्रतिबंधित करता है।
  • फीफा का नियम है कि किसी भी मैच के लिए रेफरी की नियुक्ति उनके पिछले प्रदर्शन के आधार पर तय की जाती है, और हितों के टकराव से बचने के लिए संबंधित टीम के रेफरी को उस ब्रैकेट में तैनात नहीं किया जाता।

अर्जेंटीना के प्री क्वार्टर फाइनल मैच की जीत को लेकर काफी विवाद हुआ. इजिप्ट के फुटबॉल फेडरेशन ने इस मैच के रेफरी को लेकर शिकायत दर्ज की. लेकिन, फीफा अपने रेफरी के साथ खड़ा है. वह इस तरह की शिकायत पर रेफरी बदलने को तैयार नहीं है. अर्जेटीना के अगले मैच में कोई भी रेफरी हो सकता है सिवाय इंग्लैंड के. वर्ल्ड कप के मैचों में न्यूट्रल अंपायरिंग पर बहुत ध्यान दिया जाता है. इसी वजह से अर्जेंटीना के मैच में कभी भी इंग्लैंड के रेफरी शामिल नहीं हो सकते. ठीक ऐसा ही इंग्लैंड के लिए भी है. इंग्लैंड के किसी भी मैच में अर्जंटीना का कोई रेफरी शामिल नहीं हो सकता.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
44 साल पहले की लड़ाई

इस नियम के पीछे एक बड़ी वजह है. वह है फाकलैंड वॉर. यह लड़ाई 2 अप्रैल 1982 में शुरू हुई. इस दिन अर्जेंटीना की सेना इंग्लिश साम्राज्य के फाकलैंड आईलैंड में घुस गई थी. यह लड़ाई 74 दिन चली. 74 दिन बाद जून में अर्जेंटीना ने सरेंडर कर दिया. इस लड़ाई में अर्जेंटीना के 649 सैनिकों की मौत हुई. वहीं 255 ब्रिटिश सैनिकों की भी मौत हुई. वहीं फाकलैंड आईलैंड के भी तीन लोगों की मौत हुई थी.  

क्या है फीफा का नियम?

वर्ल्ड कप के बाकी मैचों में रेफरी की नियुक्ति हर मैच के हिसाब से की जाती है. इसमें रेफरी के पिछले प्रदर्शन को देखा जाता है. साथ ही वह जिस देश का है, उसके भौगोलिक और राजनीतिक पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है. जिस ब्रैकेट में किसी रेफरी के देश की टीम मौजूद है, उस ब्रैकेट के मैचों में उस देश के रेफरी को नियुक्त नहीं किया जाता है.

Advertisement

उदाहरण के तौर पर इंग्लैंड या नॉर्वे की टीम टूर्नामेंट के उस हिस्से (bracket) में है, जहां आगे जाकर उसका सामना अर्जेंटीना या स्विट्जरलैंड से हो सकता है. ऐसे में इस ब्रैकेट के किसी भी मैच में इन देशों के रेफरी नहीं होंगे. यह सबकुछ सिर्फ यह तय करने के लिए कि किसी भी तरह हितों का टकराव न हो. 

स्टोक्स के रिटायरमेंट के बाद भी विवाद! अब ICC ने ECB को तलब कर दिया 

अर्जेंटीना ने भी इजिप्ट के खिलाफ अपने मैच को लेकर आपत्ति जताई थी. टीम ने राउंड ऑफ 16 के मुक़ाबले में न्यूट्रल रेफ़री लेटेक्सियर की बैकग्राउंड पर आपत्ति जताई थी. फ्रांस ने 2018 में अर्जेंटीना को वर्ल्ड कप से बाहर कर दिया था. वहीं, 2022 के फ़ाइनल में भी अर्जेंटीना का सामना फ्रांस से ही था. इसी कारण टीम फ्रेंच रेफरी की नियुक्ति को लेकर खुश नहीं थी.

Advertisement

वीडियो: T20 में टीम इंडिया की इंग्लैंड के खिलाफ हार की गौतम गंभीर ने क्या वजह बताई?

Advertisement