ईस्ट जोन ने 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी अपने नाम कर ली. साउथ जोन के खिलाफ फाइनल मुकाबले में पहली इनिंग्स में मिली लीड के कारण ईस्ट जोन ने ट्रॉफी अपने नाम कर ली. पहली इनिंग्स में 708 रन बनाने वाली ईस्ट जोन की टीम ने दूसरी इनिंग्स में 7 विकेट पर 388 रन बनाए. उनकी टोटल लीड 760 रनों की हो गई थी. इसी कारण मुकाबला ड्रॉ घोषित कर दिया गया.
ईशान किशन ने 13 साल बाद ईस्ट जोन को बनाया दलीप ट्रॉफी चैंपियन
Duleep Trophy Final : कप्तान Ishan Kishan की अगुवाई वाले ईस्ट जोन ने साउथ जोन को हराकर 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया. इस दौरान ईशान ने पहली इनिंग्स में 270 रनों की जबरदस्त पारी खेली थी.

ईस्ट जोन की तरफ से मोहम्मद कोनेन कुरैशी ने दूसरी इनिंग्स में सेंचुरी लगाई. उन्होंने नाबाद 116 रन बनाए. ये उनके दूसरे फर्स्ट क्लास मैच में पहली सेंचुरी है. कुरैशी ने अनुकूल रॉय (64) के साथ 7वें विकेट के लिए 150 रन की पार्टनरशिप की. उन्होंने 179 गेंद में अपनी सेंचुरी पूरी की. हालांकि, दोनों टीम के प्लेयर्स ने लंच के बाद हाथ मिलाकर मैच ड्रॉ स्वीकार कर लिया. लेकिन, इससे मैच के रिजल्ट पर कोई असर नहीं पड़ा. क्योंकि इससे पहले ही ईस्ट जोन की टीम ने 372 रनों की लीड हासिल कर ली थी.
साउथ जोन के बॉलर्स रहे बेअसरपहली पारी की तरह दूसरी इनिंग्स में ईस्ट जोन के बैटर्स ने साउथ जोन के बॉलर्स को बेअसर साबित कर दिया. अंतिम दिन ईस्ट जोन ने 212 रन पर 5 विकेट से आगे खेलना शुरू किया. लेकिन, पहली इनिंग्स की तरह दूसरी इनिंग्स में भी साउथ जोन के बॉलर्स दिशाहीन ही रहे. मोहम्मद सिराज कुछ समय के लिए पूरे जोश, तेजी और आक्रामकता के साथ गेंदबाजी करने आए. व्यक्तिगत रूप से उनका प्रयास संतोषजनक रहा, लेकिन टीम के लिहाज से वह बेअसर साबित हुए.
सिराज को दूसरे छोर से सहयोग नहीं मिला. साउथ जोन का कमजोर बैटिंग प्रदर्शन भी टीम सेेलेक्शन की खामियों पर सवाल खड़े करता है. साउथ जोन मैनेजमेंट ने करुण नायर, मयंक अग्रवाल और साई किशोर जैसे फॉर्म में चल रहे प्लेयर्स को नजरअंदाज कर दिया. उनकी जगह शामिल किए गए प्लेयर्स अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके.
ये भी पढ़ें : कौन हैं 21 साल का पाकिस्तानी पेसर रजाउल्लाह? डेब्यू में ही अंग्रेजों के उड़ाए होश, दिला दी वकार यूनुस की याद!
किशन ने खेली जबरदस्त पारीइसके उलट, ईस्ट जोन के कई खिलाड़ियों ने अवसर का पूरा फायदा उठाया. कप्तान किशन ने पहली पारी में शानदार 270 रन बनाकर रेड बॉल की अपनी तैयारी का मजबूत संकेत दिया. वहीं, अपना 100वें फर्स्ट क्लास मैच खेल रहे अनुभवी मोहम्मद शमी ने भी शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने कई यंग्सटर्स से बेहतर बॉलिंग की. टीम के उनके साथी विकेटकीपर बैटर कुमार कुशाग्र ने भी अपनी छठी फर्स्ट क्लास सेंचुरी लगाई. वहीं, झारखंड के शिखर मोहन ने भी तकनीक और संयम से भरी शानदार अर्धशतकीय पारी खेली.
किशन की कप्तानी भी शानदार रही. 708 रनों का पहाड़ खडा़ करने के बाद उनका एक ही टारगेट था. साउथ जोन के 10 विकेट हासिल करना. पहली पारी में लीड इस पिच पर मैच जिता देगी, ये बात किशन को बैटिंग के दौरान ही पता लग गया था. इसे लेकर किशन ने कहा कि जब आप टीम के कप्तान होते हैं तो सबसे पहली चीज कंडिशंस को समझना होती है.
उनके मुताबिक, दो दिन बैटिंग करते वक्त उन्हें पता लग गया था कि ये पहली इनिंग का ही मैच था. इसलिए उनका पूरा फोकस 10 विकेट हासिल करने पर था. साथ ही उन्होंने ये भी तय कर लिया था कि वो दूसरी इनिंग में बॉलिंग नहीं करेंगे. क्योंकि उनके पास 372 रनों की लीड थी, जो जीत के लिए काफी थी.
वीडियो: ईशान किशन ने मोहम्मद शमी की वापसी पर क्या कह दिया?











