देवदत्त पडिक्कल अभी लाइफ के बेस्ट फॉर्म में हैं. श्रीलंका के लिए गॉल में बुरा सपना बनकर उभरे देवदत्त ने कोलंबो में अपना जलवा जारी रखा. गॉल में पहली इनिंग्स में सेंचुरी जड़ने वाले देवदत्त ने कोलंबो में भी सैकड़ा ठोक दिया. कोलंबो टेस्ट में 117 रन बनाकर आउट होने से पहले देवदत्त ने शानदार बैटिंग की. हालांकि, उन्हें शुरुआत में ही दो जीवनदान मिल गए थे. इसका खामियाजा अब श्रीलंका को पूरे मैच में उठाना पड़ेगा.
पडिक्कल की बैक-टू-बैक सेंचुरी! श्रीलंका को ये गलती मैच हरा देगी
Ind vs SL Colombo Test : टीम इंडिया के नंबर 3 बैटर Devdutt Padikkal ने इतिहास रच दिया. गॉल के बाद उन्होंने कोलंबो में भी पहली इनिंग्स में सेंचुरी ठोक दी. हालांकि, इस दौरान श्रीलंकाई प्लेयर्स ने दो बड़ी गलतियां की, जिसका खामियाजा अब उन्हें पूरे मैच में भुगतना पड़ेगा.

पिछले कुछ समय से नंबर 3 पोजिशन को लेकर काफी बहस चल रही थी. करुण नायर, साई सुदर्शन, वॉशिंगटन सुंदर और ध्रुव जुरेल जैसे तमाम दावेदार इस पोजिशन पर ट्राई किए गए. लेकिन, फाइनली अब इस बहस का अंत शायद देवदत्त पडिक्कल कर देंगे. श्रीलंका में बैक-टू-बैक सेंचुरी जड़कर उन्होंने नंबर 3 पोजिशन पर अपनी जगह लगभग पक्की कर ली है. हालांकि, इस दौरे पर अगर साई सुदर्शन फिट होकर आते तो उन्हें ही नंबर 3 की जगह मिलती. लेकिन, जिस तरह अब देवदत्त ने मौके को भुनाया है. टीम मैनेजमेंट शायद अब इस पोजिशन पर एक्सपेरिमेंट नहीं करना चाहेगा.
देवदत्त को शुरू में मिले दो जीवनदानपहले प्रैक्टिस मैच में नाबाद 142 रन, फिर गॉल की पहली पारी में 167 रन और अब कोलंबो में 117 रन की पारी. देवदत्त पडिक्कल श्रीलंकाई टीम के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनकर उभरे हैं. कोलंबो में अपनी सेंचुरी पूरी करने के लिए पडिक्कल ने 168 बॉल्स लीं. उन्होंने अपनी पारी के दौरान कुल 10 चौके लगाए. शुरुआती स्ट्रगल को छोड़ दें तो वो सबसे ज़्यादा सेटल्ड नज़र आए. उनकी पारी में कंट्रोल, पेशंस और कॉन्फिडेंस सब नज़र आ रहा था. यही कारण है कि जैसे उन्होंन अपनी सेंचुरी पूरी की. इंडियन ड्रेसिंग रूम ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया.
मैच के दौरान देवदत्त 11वें ओवर में बैटिंग करने उतरे. ओपनर केएल राहुल जब आउट हुए तब टीम इंडिया का स्कोर 37 पर एक था. शुरुआत में वो थोड़ा स्ट्रगल करते दिखे. पहली बॉल पर ही उन्हें सोनल दिनुशा ने जीवनदान दे दिया. अभी वो सेटल भी नहीं हुए होंगे कि 1 रन के स्कोर पर कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने उनका दूसरा कैच गिरा दिया. हालांकि, ये कैच थोड़ा मुश्किल था. स्लिप में खड़े धनंजय के पास रिएक्ट करने का उतना मौका नहीं था. लेकिन, ऐसे बैटर्स ज़्यादा मौके नहीं देते. ये बात श्रीलंकाई टीम बहुत जल्द समझ गई.
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सेट होने के बाद किसी को नहीं बख्शाशुरू में उन्होंने यशस्वी के साथ 29 रन जोड़े. इस पार्टनरशिप में ज़्यादा रन यशस्वी ने ही बनाए. लेकिन, उनके आउट होने के बाद देवदत्त ने कप्तान शुभमन गिल के साथ शानदार बैटिंग की. दोनों ने 120 रनों की साझेदारी की. मैच का रुख पूरी तरह से टीम इंडिया के फेवर में कर दिया. पडिक्कल ने 90 गेंदों में अपना पचासा पूरा किया. टी ब्रेक तक 63 रन बनाकर नाबाद रहे. हालांकि, इस ब्रेक से ठीक पहले कप्तान गिल 50 बनाकर आउट हो गए.
टी ब्रेक तक जम जाने के बाद, पडिक्कल आक्रामक होते चले गए. उन्होंने ऑफ साइड पर ड्राइव, पुल और कट शॉट्स लगाना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने कोई जोखिम नहीं उठाया. उल्टा वो काफी सहज नज़र आ रहे थे. एक के बाद एक उन्होंने सभी श्रीलंकाई बॉलर्स का टेस्ट लिया. सबसे कमाल तो उन्होंने नाइंटीज में पहुंचने के बाद किया. अमूमन बैटर्स के लिए 90 से 100 रन का फेज नर्वस नाइंटीज वाला फेज माना जाता है. लेकिन, देवदत्त को 91 से 99 तक पहुंचने में समय भी नहीं लगा. उन्होंने दो बाउंड्रीज लगाईं. फिर शांति से लॉन्ग ऑन की तरफ सिंगल के साथ दूसरी टेस्ट सेंचुरी पूरी कर ली.
मुश्किल समय में आई सेंचुरीदेवदत्त ने 117 रन बनाए. लेकिन, ये सेंचुरी काफी मुश्किल समय में आया. एक तरफ गिल आउट हुए. दूसरी तरफ टी ब्रेक के तुरंत बाद ऋषभ पंत चोटिल हो गए. कलाई पर चोट के कारण उन्हें महज 3 रन के स्कोर पर रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा. लेकिन, इससे देवदत्त की बैटिंग पर कोई फर्क नहीं पड़ा. उन्होंने ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा के साथ पारी को आगे बढ़ाया. इस जोड़ी ने भी 74 रनों की पार्टनरशिप कर टीम इंडिया को एक मजबूत टोटल तक पहुंचाने में मदद की.
जडेजा दिन का खेल खत्म होने से पहले 43 रन बनाकर आउट हुए. पहले दिन स्टंप्स तक टीम इंडिया ने 85 ओवर में 5 विकेट पर 300 रन बना लिए हैं. ध्रुव जुरेल 7 और टेस्ट डेब्यू कर रहे ऑलराउंडर सारांश जैन 4 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं. हालांकि, जिस एक चीज ने मैनेजमेंट को बहुत राहत दी होगी. वो है देवदत्त पडिक्कल की बैटिंग. 4 टेस्ट मैचों की 6 पारियों में पडिक्कल ने 400 से ज़्यादा रन बना लिए हैं. उनका औसत भी 75 के ऊपर ही है. इस दौरान 4 बार उन्होंने 50 या उससे अधिक की पारी खेली है. कमाल की बात तो ये है कि देवदत्त ने छोटे से करियर में देश से बाहर दो सेंचुरी और एक हाफ सेंचुरी लगा दी है.
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