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त्रिशा-गायत्री ने BWF Worlds में जीता ब्रॉन्ज, वर्ल्ड नंबर 1 जोड़ी को दिखाया हार का खौफ

BWF World Championship : भारत की विमेंस डबल्स की Treesa Jolly और Gayatri Gopichand की जोड़ी ने नई दिल्ली में चल रहे वर्ल्ड चैंपियनश‍िप में ब्रॉन्ज मेडल जीता. सेमीफाइनल में उन्हें वर्ल्ड नंबर वन Liu Sheng Shu और Tan Ning की चीनी जोड़ी ने हराया.

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त्रिशा और गायत्री की जोड़ी ने BWF वर्ल्ड चैंपियनश‍िप में ब्रॉन्ज मेडल जीता. (फोटो-PTI)

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  • भारत ने 17 साल बाद नई दिल्ली में BWF वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप की मेजबानी की, जिसमें गायत्री गोपीचंद और त्रिशा जॉली की जोड़ी ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
  • 2011 के बाद पहली बार भारत ने विमेंस डबल्स में मेडल जीता है, जो घर पर मेजबानी और पिछले लगातार मेडल जीतने के दबाव के कारण महत्वपूर्ण था।
  • भले ही अंतिम मैच में हार हुई, ब्रॉन्ज मेडल भारत के लिए उपलब्धि है और अगला कदम इस सफलता को आगे बढ़ाकर आने वाले टूर्नामेंटों में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।

भारत 17 साल बाद BWF वर्ल्ड बै‍डमिंटन चैंपियनश‍िप होस्ट कर रहा है. नई दिल्ली में चल रहे इस ग्लोबल इवेंट में भारत 2011 से हर एडिशन में मेडल जीतता आया है. अब ये सिलसिला घर पर भी जारी रहे, ये गायत्री गोपीचंद और त्रिशा जॉली की जोड़ी ने इंश्योर कर दिया. कभी टॉप 10 में शामिल रही ये भारतीय जोड़ी इस बार कॉम्पिटिशन में अनसीडेड थी. लेकिन, इस जोड़ी ने भारत को ब्रॉन्ज मेडल जिता दिया.

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22 अगस्त को विमेंस डबल्स के सेमीफाइनल में उन्हें चीन की वर्ल्ड नंबर 1 जोड़ी से हार का सामना करना पड़ा. हालांकि, वर्ल्ड नंबर वन लियू शेंग शू और टान निंग की चीनी जोड़ी को उन्हें हार का खौफ जरूर दिखा दिया. 1 घंटे 11 मिनट तक चले मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने पहला सेट अपने नाम कर लिया था. लेकिन, उसके बाद मोमेंटम को अपने पक्ष में नहीं रख सके. वो ये मुकाबला 21-18, 13-21, 8-21 से हार गईं.

यह मैच दो हिस्सों में बंटा था. पहले हिस्से में गायत्री और त्रिशा बिल्कुल नंबर 1 जोड़ी की तरह खेल रही थीं. घरेलू दर्शकों का भी उन्हें पूरा सपोर्ट मिल रहा था. इसी बीच, दुनिया की इस नंबर 39 जोड़ी ने ऐसा आक्रामक खेल दिखाया, जिससे दुनिया नंबर एक जोड़ी भी हैरान रह गई. खासकर त्रिशा ने पूरे जोश और एग्रेशन के साथ अपने गेम की क्लास दिखाई. वो फ्रेंटकोर्ट और बैककोर्ट दोनों जगह खतरनाक गेम खेल रही थीं. इस दौरान उन्हें गायत्री का भी पूरा साथ मिला.  

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वर्ल्ड नंबर 1 जोड़ी को चौंका दिया

पहले गेम में 14-16 के स्कोर पर टान और लियू ने एक कमज़ोर लिफ्ट दी. त्रिशा ने इसपर शानदार जंप स्मैश लगाया. वह उस वक्त खाली कोर्ट में आसानी से टैप करके भी पॉइंट ले सकती थीं. लेकिन, उन्होंने जोरदार स्मैश मारने का फैसला किया. ये स्मैश ये बताने के लिए था कि भले ही सामने वर्ल्ड नंबर 1 जोड़ी है. ये दोनों आसानी से पॉइंट्स देने वाली नहीं हैं.

हालांकि, ऐसा नहीं था कि वो आंखमूंद कर सिर्फ अटैक कर रही थीं. दोनों ने शानदार‍ डिफेंस भी किए. फिर आया मैच का टर्निंग पॉइंट. दोनों 15-18 से पिछड़ रही थीं. लेकिन, इसके बाद लगातार 6 पॉइंट्स जीतकर उन्होंने गेम अपने नाम कर लिया. वर्ल्ड नंबर 1 जोड़ी बेबस नज़र आ रही थी. हार से वो सिर्फ एक गेम दूर थीं.

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मोमेंटम लूज करते ही गंवाया मैच

दूसरे गेम की भी भारतीय जोड़ी ने जबरदस्त शुरुआत की. दोनों ने काउंटर अटैक जारी रखा. लेकिन, 12-12 के स्कोर पर मैच का पूरा रुख बदल गया. टान और लियू ने पेशंस दिखाया. वो रैली में बने रहे. शटल को फ्लैट और शॉर्ट रखा. स्मैश मारने का इंतज़ार करने लगे. वहीं, भारतीय जोड़ी डिफेंस में थोड़ी सुस्त पड़ गई. उन्होंने अपना काउंटर अटैक वाला गेम छोड़ दिया.

जैसे वो जीत के करीब जाने लगे, डिफेंसिव खेलने में घुस गए. नतीजा, बिना वजह की गलतियां होने लगीं. टान और लियू को तो इसी मौके का इंतजार था. उन्होंने लगातार 8 पॉइंट्स जीते और 12-12 के स्कोर वाले गेम को एकतरफ़ा बना दिया. हर भारतीय पॉइंट पर होने वाला शोर थम गया. गत चैंपियन ने दूसरा गेम 21-13 से जीत लिया.

तीसरा गेम में भारतीय जोड़ी मोमेंटम हासिल ही नहीं कर पाई. पहले गेम में काउंटर अटैक करने वाली ये जोड़ी शेल में चली गई. वहीं, चीनी जोड़ी जो पहले गेम में हारने के बाद बहुत हताश नज़र आ रही थी. उन्हें जीत साफ-साफ दिखने लगी. उन्होंने देरी नहीं की. अपना नैचुरल गेम खेला और मुकाबला एकतरफा अंदाज में 21-8 से अपने नाम कर लिया.  

अफसोस होगा पर ये जीत खास

हालांकि, ये हार सबसे ज़्यादा त्रिशा और गायत्री को ही चुभेगी. उनके पास पहले गेम से मिली लीड थी. मोमेंटम था. लेकिन, वो इसे बरकरार नहीं रख सकीं. बहरहाल, ब्रॉन्ज मेडल भी इन दोनों के लिए बड़ी उपलब्ध‍ि है. भारत ने अंतिम बार विमेंस डबल्स में मेडल 2011 में जीता था. तब अश्विन पोनप्पा और ज्वाला गुट्टा की जोड़ी ने भी कांसा अपने नाम किया था. ये मेडल कई मायनों में खास है क्योंकि घर पर जब साख दांव पर लगी थी, इन दोनों ने जिम्मेदारी ली. उन्होंने साबित कर द‍िया वो इस मंच के लिए बनी हैं. 

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