भारतीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने इतिहास रच दिया. कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने गोल्ड मेडल जीत लिया. जूडो में ये कारनामा करने वाली वो देश की पहली खिलाड़ी बनीं. 48 किलोग्राम के फाइनल में उन्होंने कनाडा की हेडी क्वाच को 2-1 से हराया. इसके ठीक बाद, हर्ष सिंह ने भी पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता. उन्होंने फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को 10-0 से हराया.
जूडोका अस्मिता और हर्ष ने जीते गोल्ड, यामिनी मौर्य भी फाइनल में पहुंचीं
भारतीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने इतिहास रच दिया. कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता और ऐसा करने वाली देश की पहली खिलाड़ी बनीं. उनके बाद, हर्ष सिंह ने भी 60 केजी कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता. इनके अलावा, यामिनी मौर्य भी फाइनल में पहुंच चुकी हैं.

इनके अलावा, यामिनी मौर्य भी विमेंस 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में पहुंच चुुकी हैं. अगर वो भी अपना मुकाबला जीत जाएंगी तो भारत के कुल 6 गोल्ड मेडल हो जाएंगे. भारत ने अब तक 5 स्वर्ण पदक जीते हैं.
अस्मिता ने रचा इतिहासविमेंस 48 केजी कैटेगरी में शुरुआत से दोनों खिलाड़ियों ने बहुत संभल कर खेला. वह मैट के किनारे पर फिजकल एक्सचेंज करतीं रहीं. पहला पॉइंट क्वाच को मिला, जिन्होंने अस्मिता को थ्रो किया. इसके बाद अस्मिता ने शिडो पेनल्टी से अंक लिया. निर्धारित समय (रेगुलेशन टाइम) तक स्कोर 1-1 से बराबर था. इसके बाद, मैच का फैसला ‘गोल्डन स्कोर’ के जरिए होना था.
गोल्डन स्कोर का मतलब एक्सट्रा टाइम में जो खिलाड़ी पहले कोई स्कोर (जैसे इप्पोन या वाज़ा-आरी) हासिल करता है, वही विजेता होता है. गोल्डन स्कोर के दौरान अस्मिता ने अपनी मानसिक मजबूती का बेहतरीन प्रदर्शन किया. उन्होंने आखिर में ने एक सटीक दांव लगाते हुए ‘यूको’ (Yuko) हासिल किया. इसके साथ ही मैच 2-1 से अपने नाम कर लिया. मैट से उतरते ही कोच ने उन्हें बाहों में भर लिया.
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आपको बता दें कि अस्मिता डे त्रिपुरा के बेलोनिया की रहने वाली हैं. वो जूडो खिलाड़ी बनने से पहले एथलीट थीं. वह ट्रैक के 800 मीटर में दौड़ती थीं. बाद में डिस्ट्रिक्ट ट्रायल के दौरान उनकी जूडो में दिलचस्पी आने लगी और इसी की ट्रेनिंग करने लगीं. उन्होंने भोपाल के SAI रीजनल सेंटर में कोच यशपाल सोलंकी से ट्रेनिंग ली है.
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