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टीम ऑस्ट्रेलिया ये गंदा काम क्यों कर बैठी!

ऑस्ट्रेलिया को ये नहीं करना था.

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ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम (फोटो - PTI)

क्रिकेट. एक खेल है. खेल, जो कभी मजे के लिए खेले जाते थे. तो कभी इन्हें फिट रहने के लिए खेला गया. फिर ये सरकारी नौकरी के लिए खेले गए और आजकल बहुत सारे पैसे और ग्लैमर के लिए खेले जाते हैं. गुस्साइए मत. पैसे के लिए होने वाला हर काम खराब नहीं होता है.

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हां, तो बात खेलों की हो रही थी. इन खेलों में क्रिकेट का अपना ही जलवा है. बहुत कम देशों में कायदे से खेले जाने वाले इस खेल के अरबों फ़ैन्स हैं. और इन अरबों फ़ैन्स को एक बात अक्सर तकलीफ देती है- इस खेल में राजनीति का घुसना. फिर चाहे वो विभिन्न बोर्ड्स में बैठे राजनीति वाले लोग हों, या फिर किसी राजनैतिक कारण के चलते खेलों में आने वाली रुकावट.

और हम इस टॉपिक पर इसलिए चर्चा कर रहे हैं, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने अफ़ग़ानिस्तान के साथ खेलने से मना कर दिया. और वो भी विशुद्ध राजनैतिक कारणों से. तो चलिए शुरू करते हैं.

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# Australia vs Afghanistan

ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम. इस टीम को बड़ी आसानी से क्रिकेट की सबसे कामयाब टीम कह सकते हैं. और उतनी ही आसानी से इसे क्रिकेट की सबसे घमंडी टीम भी कहा ही जा सकता है. इस टीम ने हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान के साथ होने वाली वनडे सीरीज़ में खेलने से मना कर दिया. ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड ने इस मामले पर कहा,

'यह निर्णय तालिबान द्वारा महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर प्रतिबंधों की हालिया घोषणा के बाद लिया गया है. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया, अफ़ग़ानिस्तान समेत दुनियाभर में महिलाओं और पुरुषों को खेल में लाने और उनके विकास को लेकर प्रतिबद्ध है.

साथ ही हम महिलाओं और लड़कियों के लिए बेहतर परिस्थितियों की उम्मीद में अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट बोर्ड की मदद करना जारी रखेंगे. हम इस मामले पर समर्थन के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार को धन्यवाद देते हैं.’

यानी ऑस्ट्रेलिया एक ओर तो क्रिकेट के विकास के लिए प्रतिबद्ध है. और दूसरी ओर एक विकासशील देश के साथ होने वाली सीरीज़ रद्द कर रहा है. ये कैसी माया है? पहली चीज तो ये, कि खेलकूद राजनीति से बहुत अलग चीज हैं. दोनों जितने अलग रहेंगे, उतना ही सही रहेगा. क्योंकि मैदान में उतरा प्लेयर अपने खेल से लोगों को वो खुशियां दे सकता है, जो बाकी कोई मीडियम नहीं दे सकता.

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क्रिकेट हो या कोई और खेल, इसे देखने वाले किसी चारदीवारी को नहीं मानते, किसी बॉर्डर को नहीं मानते और ना ही ये चीजें खेल देखने वालों को परेशान करती हैं. फिर अपना हित साधने के लिए कोई बोर्ड या टीम, दो देशों के बीच होने वाली किसी सीरीज़ को कैसे रद्द कर सकता है? तालिबान जो कर रहा है, उसका समर्थन बिल्कुल नहीं किया जा सकता. लेकिन उसकी गलती का खामियाजा अफ़ग़ानिस्तान के क्रिकेटर क्यों भुगतें? उन्हें किस बात की सजा मिल रही है?

क्रिकेटर्स तो अपना काम ही कर रहे हैं. और अगर किसी भी देश को तालिबान के राज से दिक्कत है, तो उससे राजनीतिक तरीके से निपटें. खेलों को बीच में लाना कहां का न्याय है? अफ़ग़ान क्रिकेटर्स तो पूरी ईमानदारी से अपना काम कर रहे हैं. उन्हें खेलने ना देने से ना तो तालिबान का स्टैंड बदलेगा और ना ही अफ़ग़ानिस्तान के हालात.

ये बदलने के लिए जिस राजनैतिक दबाव की जरूरत है, वो क्रिकेट की पिच पर नहीं आएगा. उसके लिए दुनिया भर के तमाम देशों को मिलकर, तालिबान से बात करनी होगी. उन्हें समझाना होगा कि दुनिया अब 2023 में पहुंच चुकी है. ये सदियों पहले का समय नहीं है, जबकि किसी को गुलाम बनाकर, उस पर अपनी मनमर्जी चलाई जा सके. लेकिन ये काम वही कर पाएगा, जो इसके लिए ईमानदार होगा. किसी टूर को रद्द करने से इस समस्या का हल नहीं निकलेगा.

वीडियो: राशिद खान ने ऑस्ट्रेलिया को अफ़ग़ानिस्तान के साथ सीरीज़ रद्द करने सही जवाब दे दिया!

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