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दूसरे दलों से BJP में आने वाले नेताओं की चांदी, अब तक 8 को बनाया मुख्यमंत्री

सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री बनने वाले हैं. 15 अप्रैल को वे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. सम्राट चौधरी ने लालू यादव की पार्टी राजद से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. फिर जदयू में रहे और साल 2017 में बीजेपी जॉइन की. सम्राट से पहले भी बीजेपी कई ऐसे नेताओं को मुख्यमंत्री बना चुकी है, जिनका BJP-RSS बैकग्राउंड नहीं रहा है.

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सम्राट चौधरी से पहले बीजेपी दूसरे दल से आए 8 नेताओं को मुख्यमंत्री बना चुकी है. (इंडिया टुडे)
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आलोक रंजन

सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. सम्राट चौधरी पहली बार राजद से विधायक बने थे. फिर वाया जदयू बीजेपी में शामिल हुए. नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को छोड़ दें तो बीजेपी के लिए ये तीसरा मौका है, जब किसी दूसरे दल से आए नेता को मुख्यमंत्री बनाया गया है. नॉर्थ ईस्ट को मिला ले तो ये आंकड़ा 8 तक पहुंचता है.

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सम्राट चौधरी से पहले दूसरे दलों से आने वाले 8 नेताओं को बीजेपी ने मुख्यमंत्री बनाया है. इनमें झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई और असम के मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा शामिल हैं. लंबे समय तक माना जाता रहा है कि बीजेपी काडर बेस्ड पार्टी है. यहां BJP-RSS से आने वाले नेताओं को ज्यादा प्राथमिकता मिलती है. लेकिन जैसे-जैसे बीजेपी की पकड़ सत्ता पर मजबूत होती गई है, 'पार्टी विद द डिफरेंस' अपनी इस पहचान से दूर जाती दिखी है. सम्राट चौधरी के अलावा दूसरे दलों से बीजेपी में आने वाले और किन-किन नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया गया है, इस पर एक नजर डालते हैं.

हिमंता बिस्वा सरमा (असम)
कांग्रेस के कद्दावर नेता और मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की सरकार में कैबिनेट मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अगस्त 2015 में बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने पूरे नॉर्थ ईस्ट से कांग्रेस की सफाई में अहम भूमिका निभाई. साल 2016 और 2021 में उन्होंने असम में बीजेपी को चुनावी सफलता दिलाई. साल 2021 में बीजेपी ने उनको मुख्यमंत्री बनाया. हिमंता ने अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय में बीजेपी/NDA की सरकार बनाने में भी मदद की.

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पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश)
पेमा खांडू साल 2000 में कांग्रेस में शामिल हुए थे. पार्टी में कई भूमिकाएं संभालीं. जुलाई 2016 में कांग्रेस ने उनको अरुणाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया. दिसंबर 2016 में अपनी पार्टी के अधिकतर सदस्यों के साथ उन्होंने दल बदल कर लिया. कांग्रेस से लगभग पूरी सरकार बीजेपी में चली गई. साल 2019 में बीजेपी ने उन पर भरोसा जताया. फिर से उनको मुख्यमंत्री बनाया. जून 2024 में उनके नेतृत्व में पार्टी ने तीसरी बार सत्ता हासिल की. बीजेपी को 60 सदस्यों वाली विधानसभा में 46 सीटें मिलीं. पेमा खांडू के पिता दोरजी खांडू भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. साल 2011 में एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी.

माणिक साहा (त्रिपुरा) 
बीजेपी ने साल 2022 में विप्लव देव को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री पद से हटाया. उनकी जगह डॉ. माणिक साहा को मुख्यमंत्री बनाया गया. माणिक साहा साल 2016 में कांग्रेस से बीजेपी में आए थे. पार्टी ने साल 2020 में उन्हें राज्य का अध्यक्ष भी बनाया था. साल 2023 में राज्य में विधानसभा चुनाव हुए. इस चुनाव में बीजेपी को जीत मिली. और मार्च 2023 में माणिक साहा ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

एन बीरेन सिंह (मणिपुर)
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह साल 2017 में बीजेपी में शामिल हुए थे. उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओकरम इबोबी सिंह के खिलाफ बगावत करके पार्टी छोड़ दी थी. उससे पहले वो डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपल्स पार्टी में भी रह चुके थे.

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बसवराज बोम्मई (कर्नाटक)
बसवराज बोम्मई जुलाई 2021 से मई 2023 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे. उन्होंने साल 2008 में बीजेपी जॉइन की थी. इससे पहले वे जनता दल और जदयू में थे. उनके पिता SR बोम्मई साल 1988-89 में बहुत कम समय के लिए मुख्यमंत्री रहे थे.

सर्बानंद सोनोवाल (असम) 
साल 2016 में पहली बार बीजेपी ने असम में सरकार बनाई. पार्टी ने सर्बानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री बनाया. सोनोवाल साल 2011 में बीजेपी में शामिल हुए थे. उनकी राजनीतिक शुरुआत ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) से हुई थी. वहीं बाद में उन्होंने असम गण परिषद में भी काम किया.

अर्जुन मुंडा (झारखंड)
अर्जुन मुंडा साल 2003 से 2006 तक बीजेपी के मुख्यमंत्री रहे. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) से की थी. साल 1995 में संयुक्त बिहार में वे पहली बार विधायक बने थे. साल 2000 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वे बीजेपी में शामिल हुए थे. साल 2000 में ही झारखंड बिहार से अलग हुआ.

गेगोंग अपांग (अरुणाचल प्रदेश)
गेगोंग अपांग लगभग 22 साल तक अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे है. पहली बार वे साल 1980 में कांग्रेस पार्टी से मुख्यमंत्री बने थे. साल 1999 तक वे मुख्यमंत्री बने रहे. साल 2003 में वे बीजेपी में शामिल हुए और फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बने. 42 दिन तक उन्होंने एनडीए सरकार का नेतृत्व किया. अगस्त 2003 में उन्होंने बीजेपी जॉइन की थी. 

लेकिन साल 2004 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले फिर से कांग्रेस में शामिल हुए. चुनावो में कांग्रेस सफल रही. पार्टी ने उनको फिर से मुख्यमंत्री बनाया. साल 2007 तक वे मुख्यमंत्री बने रहे. फिर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते कुर्सी छोड़नी पड़ी. साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अपांग ने फिर से बीजेपी जॉइन कर ली.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शोः बिहार सीएम की रेस में सबसे आगे कैसे निकल आए सम्राट चौधरी?

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