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भुवी 15 की जगह क्यों 78 नंबर जर्सी पहन रहे? खुद बताई इसके पीछे की पूरी कहानी

Bhuvi Jersey Change Story : भारतीय पेसर Bhuvneshwar Kumar ने अपनी 15 नंबर की जर्सी का दिलचस्प राज खोला है. साथ ही उन्होंने T20 में इम्पैक्ट प्लेयर रूल और लगातार बन रहे 200 रनों के स्कोर पर भी बेबाक राय रखी है. भुवी का मानना है कि इस आक्रामक दौर में भी गेंदबाज बेबस नहीं हैं और वे गेम कंट्रोल कर सकते हैं.

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भुवनेश्वर कुमार कमबैक पर 15 की जगह 78 नंबर जर्सी क्यों पहन रहे हैं. (Courtesy : AFP/Screengrab)

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  • भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने टीम इंडिया में वापसी पर अपनी जर्सी नंबर 78 चुना क्योंकि उनके पसंदीदा नंबर 15 पहले ही किसी और खिलाड़ी को मिल चुका था और वह नंबर का अंक योग 6 होना चाहते थे।
  • भुवनेश्वर कुमार ने IPL में बेहतर प्रदर्शन के कारण टीम में वापस आने का मौका पाया, लेकिन टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजों की आक्रामकता और नए रूल्स के चलते खुद को लगातार रणनीति के अनुसार ढालना पड़ रहा है।
  • टी20 क्रिकेट में बढ़ती बल्लेबाजी की ताकत के बीच भुवनेश्वर ने अपनी गेंदबाजी तकनीक में बदलाव किया है और आने वाले मैचों में उनकी कार्यक्षमता पर नजर रखी जाएगी कि वे पावरप्ले में अधिक रन देने के बावजूद टीम के लिए प्रभावशाली साबित होंगे या नहीं।

बल्लेबाजों की नाक में दम करने की कला में भुवनेश्वर कुमार (Bhuvneshwar Kumar) ने सालों तक मास्टरी की है. लेकिन जब अपनी जर्सी का नंबर चुनने की बारी आई, तो इस भारतीय तेज गेंदबाज का गणित एकदम अलग ही था. इस चॉइस के पीछे एक लॉजिक था. नंबर के अंकों का टोटल 6 होना चाहिए. यही कारण है कि जब उन्हें टीम इंडिया में कमबैक पर 15 नंबर की जर्सी नहीं मिली. उन्होंने 78 नंबर की जर्सी चुन ली.

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भुवी से जुड़ी ये बड़ी दिलचस्प बात है. उनकी पहचान सही लाइन लेंथ पर बॉलिंग करने वाले बॉलर की रही है. हालांकि, उनके मुताबिक नई जर्सी के साथ उन्हें थोड़ा एडजस्ट करना पड़ा. भुवी ने बताया,

मैं चाहता था कि अंकों का टोटल 6 हो. मैंने 15 समेत कई नंबर ट्राई किए थे. लेकिन वो पहले ही दूसरे खिलाड़ी ले चुके थे. यही इकलौता नंबर बचा था, जिसका टोटल 6 होता है. इसलिए मैंने इसे चुन लिया. मुझे 15 नंबर देखने की आदत भी पड़ गई थी.

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भुवी ने बताया कि अपनी जर्सी के पीछे अपना सरनेम छपा होना भी एक ऐसी चीज थी, जिसके साथ उन्हें तालमेल बिठाना पड़ा. उन्होंने कहा, 

शुरुआत में मेरी जर्सी पर कुमार भी नहीं लिखा था. मुझे यह समझने और एक्सेप्ट करने में थोड़ा टाइम लगा कि यह मेरी जर्सी है और मुझे इसे पहनना है.

कैसे बदल गया है T20I क्रिकेट?

सिर्फ यही एक चीज नहीं थी, जिसके साथ एडजस्ट करने में उन्हें थोड़ा टाइम लगा. भुवी ने अपने आस-पास गेम को बदलते हुए देखा है. एक क्रिकेटर के तौर पर उनके इवोल्यूशन में IPL ने बड़ा रोल प्ले किया है. खासकर तब जब बैट और बॉल के बीच का बैलेंस लगातार बदल रहा है. भुवी ने कहा कि उन्होंने खुद को काफी इवॉल्व किया है. इसका श्रेय उन्होंने IPL को दिया.

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IPL में इम्पैक्ट प्लेयर रूल आने से बैटर्स को और ज्यादा आक्रामक होने की छूट मिल गई है. कई बैटर्स तो पहली ही गेंद से कूटने की कोशिश करते हैं. बॉलर्स के लिए इसका मतलब है कि उन्हें लगातार खुद को ढालना पड़ रहा है.  हालांकि, भुवी का मानना ​​है कि बॉलर्स को यह मानकर नहीं बैठ जाना चाहिए कि वे पूरी तरह से हमलावर बल्लेबाजों के रहमो-करम पर हैं. उन्होंने कहा,

मुझे पता है कि इम्पैक्ट प्लेयर रूल आ गया है. इसने बल्लेबाजों की सोच को काफी बदल दिया है. वे पहली ही गेंद से रन ठोकने को देखते हैं. हालांकि, मेरा हमेशा से मानना ​​रहा है कि हम अक्सर बॉलर्स को 'बेचारा' मान लेते हैं. असल में ऐसा नहीं है. एक बॉलर के तौर पर, आप गेम को कंट्रोल कर सकते हैं. बैटर्स को अपनी मर्जी के मुताबिक शॉट खेलने पर मजबूर कर सकते हैं.

यह नजरिया उनके तगड़े अनुभव से निकला है. भुवी ने क्रिकेट के अलग-अलग फॉर्मेट और T20 क्रिकेट के अलग-अलग फेज में बॉलिंग की है. उन्होंने देखा है कि जैसे-जैसे बैटिंग की रणनीतियां ज्यादा आक्रामक होती गई हैं, बॉलर्स पर प्रेशर भी बढ़ता गया है. उनके मुताबिक, इसका सॉल्यूशन यह मानने में नहीं है कि यह फॉर्मेट पूरी तरह से बैटर्स के कब्जे में है. जरूरत इस मुकाबले को एक अलग नजरिए से समझने की है.

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जब 200 रन भी काफी नहीं होते

आंकड़े खुद अपनी कहानी कहते हैं. जो स्कोर कभी पहाड़ जैसा लगता था. अब टीमें उसे आसानी से हासिल होने वाला टारगेट मानने लगी हैं. खासकर T20 क्रिकेट में. यह बदलाव सिर्फ फ्रेंचाइजी क्रिकेट तक ही लिमिटेड नहीं है. भुवी ने कहा,

इसमें कोई शक नहीं कि पिछले चार सालों में गेम काफी बदल गया है. और यह सिर्फ फ्रेंचाइजी क्रिकेट की बात नहीं है. इंटरनेशनल क्रिकेट में भी काफी बदलाव आए हैं. आजकल जिस तरह से रन कुटे जा रहे हैं. 200 रन तो पार स्कोर बन गया है. कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि 200 रन भी काफी नहीं हैं. लेकिन हां, समय के साथ गेम में बदलाव आया है.

भुवी के मताबिक, उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह भी गेम के साथ-साथ खुद को इवॉल्व करते रहें. उन्होंने जर्सी का नंबर भले ही साधारण लॉजिक के साथ चुना हो. लेकिन उनकी बॉलिंग की स्ट्रैटेजी मुश्किल समीकरण पर टिकी है. T20 क्रिकेट की बदलती जरूरतों के हिसाब से खुद को ढालना. साथ ही गेम पर अपना कंट्रोल बनाए रखना. जैसे-जैसे बल्लेबाज रन बनाने की लिमिट्स को और आगे बढ़ाते जा रहे हैं. 

भुवी का मैसेज एकदम लाउड एंड क्लियर है. बॉलर केवल नुकसान रोकने के लिए मैदान पर नहीं उतरते. उनके पास अभी भी यह तय करने का पूरा दम है कि गेम किस दिशा में जाएगा.

भुवी खुद वापसी पर रहे हैं महंगे 

भुवी को 4 साल बाद टीम इंडिया के स्क्वॉड में चुना गया है. उनके इस कमबैक के पीछे IPL में उनका प्रदर्शन ही रहा है. हालांकि, अपने कमबैक पर भुवी खुद रन पर बहुत लगाम लगाने में सफल नहीं रहे हैं. उन्होंने पहले मैच में 49 रन लुटाए थे. अब दूसरे मुकाबले में उन्होंने 1 विकेट लेकर 50 रन दे दिए. इसके पीछे पावरप्ले में 3 ओवर बॉलिंग करना भी शामिल है. हालांकि, अगर ओवरऑल कर‍ियर को देखें तो उनकी इकॉनमी 7 के करीब है. ये T20I क्रिकेट के लिहाज से शानदार है. ऐसे में देखने लायक होगा को कि वो आने वाले मैच में कैसे इसे बदलते हैं. 

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