कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सौरव दास को दिल्ली में रहने का सबूत देने को कहा गया है. ‘पीस बॉन्ड’ का उल्लंघन करने के मामले में ये आदेश स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ऋतुराज ने दिया है. सौरव दास और आशुतोष रांका अपने जमानतदारों के साथ एसईएम की कोर्ट में पेश हुए थे. मजिस्ट्रेट ने कहा कि सौरव दास ने जो डॉक्युमेंट्स जमा किए हैं, उसमें दिल्ली में उनके आवास से जुड़ा कोई कागज नहीं है. न तो उन्होंने रेंट एग्रीमेंट जमा किया है और न ही कोई लीज के पेपर ही सबमिट किए हैं.
'दिल्ली में रहने का सबूत दो,' CJP के सौरव दास से SEM कोर्ट ने कागज मांगे
दिल्ली में ‘पीस बॉन्ड’ के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने CJP नेता सौरव दास से दिल्ली में रहने का सबूत मांगा है. रेंट एग्रीमेंट या लीज के दस्तावेज जमा करने के लिए उन्हें समय दिया गया है.

कोर्ट के ऐसा कहने के बाद सौरव दास के वकीलों ने ये दस्तावेज जुटाने के लिए और ज्यादा समय मांगा. मजिस्ट्रेट ने भी उनकी मांगें मान लीं और अगली सुनवाई की तारीख 17 नवंबर को तय कर दी. उसी दिन सौरव दास के दस्तावेजों की जांच की जाएगी. दिल्ली पुलिस के वकील प्रशांत प्रकाश और भैरव दास ने दलील दी थी कि सौरव दास ने यह साबित करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं दिया है कि वह दिल्ली में रह रहे हैं. इसके बाद कोर्ट ने उनके घर से जुड़े कागज मांगे थे.
क्या है मामला?12 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया गया था. कॉकरोच जनता पार्टी के ये दोनों नेता गेट फांदकर जंतर-मंतर के प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल में घुस गए थे. ये घटना एसआईआर में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रोटेस्ट के बाद हुई.
इसके बाद दिल्ली पुलिस ने रांका और सौरव दास को हिरासत में ले लिया. उन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई. पहले उन्हें 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया. बाद में कोर्ट ने उनकी हिरासत दो दिनों के लिए बढ़ा दी. ठीक एक हफ्ते तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद दोनों नेताओं को 21 अक्टूबर को रिहा कर दिया गया. इसके लिए दोनों ने 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानती मुचलके भरे थे.
रिहाई की शर्त के तौर पर दोनों नेताओं ने लिखित आश्वासन दिया था कि वो शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखेंगे. उन्होंने यह भी भरोसा दिया था कि जब तक जंतर-मंतर को आधिकारिक तौर पर दोबारा प्रदर्शन स्थल घोषित नहीं किया जाता, तब तक वो वहां प्रदर्शन करने की अपील नहीं करेंगे.
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