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Asian Games : सीमा ने जीता ब्रॉन्ज, मां को मालूम ही नहीं बेटी जापान में है

Asian Games 2026 : भारतीय एथलीट सीमा को ट्रेनिंग के दौरान कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. उनके पास ट्रेनिंग के लिए जूते नहीं थे. ऐसे में परिवार ने घर की बकरियां बेचकर उनकी मदद की.

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सीमा ने 10000 मीटर इवेंट में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता. (Courtsey- PTI)

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  • हिमाचल प्रदेश के सीमा कुमारी ने एशियन गेम्स में 10000 मीटर ट्रैक इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत के 16 साल के मेडल सूखे को समाप्त किया।
  • सीमा कुमारी ने स्कूल तक पहुंचने के लिए हर दिन 45 मिनट पैदल चलना पड़ता था, और उनके परिवार ने उनके करियर के लिए कई बार घर की बकरियां बेचकर आर्थिक सहयोग दिया।
  • सीमा का आगामी इवेंट 28 सितंबर को 5000 मीटर दौड़ है, जहाँ वे देश का प्रतिनिधित्व करेंगी और फिर से मेडल की उम्मीद जताई जा रही है।

हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव की रहने वाली सीमा कुमारी ने जापान में इतिहास रच दिया. उन्होंने 10000 मीटर के इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल हासिल करके सभी को हैरान कर दिया. जब एशियन गेम्स के मेडलिस्ट के दावेदारों की गिनती हो रही थी, तब सीमा का नाम शायद ही किसी ने शामिल किया हो. लेकिन, इस खिलाड़ी ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर 16 साल का सूखा खत्म किया. स्टेडियम में दर्शकों ने और कई लोगों ने टीवी पर उन्हें इतिहास रचते देखा. लेकिन, उनकी मां ने यह रेस नहीं देखी, क्योंकि वो ये जानती ही नहीं थी कि उनकी बेटी जापान में हैं.

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45 मिनट पैदल चलकर जाती थीं स्कूल

यह कहानी है सीमा की, जिन्होंने हिमाचल के पहाड़ी रास्तों से निकलकर ट्रैक की क्वीन बनने का सपना देखा. उनके इस सफर की शुरुआत स्कूल से हुई. उन्हें स्कूल जाने के लिए हर रोज 45 मिनट पैदल चलना पड़ता था. इससे उनका स्टेमिना और एंड्यूरेंस काफी बढ़ गए था. कुछ समय बाद शहर में एक टैलेंट हंट आयोजित हुआ. इसी हंट में केहर सिंह पटियाल की नजर सीमा पर पड़ी. वह सीमा के स्टेमिना से काफी प्रभावित हुए. रेस के बाद उन्होंने सीमा के कुछ फिजिकल टेस्ट किए. इसी में उन्हें अंदाजा हुआ कि सीमा की रफ्तार भी अच्छी है. उन्होंने सीमा को प्रोफेशनल ट्रेनिंग देने का फैसला किया. सीमा धर्मशाला में केहर के साथ ट्रेनिंग करने लगीं. महज 6 महीने के अंदर उन्होंने अंडर-16 चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत लिया. यहीं से सीमा का सफर शुरू हुआ और धीरे-धीरे वह अलग-अलग इवेंट में हिस्सा लेने लगीं.

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परिवार ने बेच दी घर की बकरियां

सीमा को ट्रेनिंग के दौरान कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. उनके पास ट्रेनिंग के लिए जूते नहीं थे. सीमा के पिता ने बेटी को जूते दिलाने के लिए घर की बकरी बेच दी. वह हर तरह से सीमा को सपोर्ट कर रहे थे. सीमा पिता के करीब थीं. साल 2012 में उनके पिता को सांप ने डंस‍ लिया. इसकी वजह से उनकी मृत्यु हो गई. पिता के बाद भाइयों ने सीमा के एथलेटिक्स करियर की जिम्मेदारी उठाई. सीमा को SAI ट्रायल्स के लिए नए जूतों की जरूरत थी. इस बार उनके भाई ने घर की बकरी बेच दी. सीमा ट्रेनिंग करती रहीं. उनकी मेहनत और परिवार के त्याग ने उन्हें इंटरनेशनल स्तर तक पहुंचा दिया. 24 सितंबर को उन्होंने देश के लिए एशियन गेम्स मेडल जीता.

सीमा ने गोल्ड जीतने के बाद इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने अपनी मां को एशियन गेम्स के बारे में नहीं बताया था. सीमा ने कहा,

मेरी मां रेस के दौरान बहुत नर्वस हो जाती हैं. इसलिए मैं उन्हें रेस के बारे में नहीं बताती हूं. उन्हें रेस के समय यही लग रहा था कि मैं इंडिया में हूं और ट्रेन कर रही हूं.

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प्रधानमंत्री ने सीमा के लिए ट्वीट किया. (Courtesy : X)

सीमा के ऐतिहासिक मेडल के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी. उन्होंने एक्स पर लिखा,

एशियन गेम्स में महिलाओं की 10,000 मीटर रेस में मेडल जीतने पर सीमा पर गर्व है! उन्हें बधाई. उनके दृढ़ प्रदर्शन ने कई सालों बाद इस इवेंट में भारत को मेडल दिलाया है. यह शानदार उपलब्धि उनकी सहनशक्ति, अनुशासन और सालों की कड़ी मेहनत को दर्शाती है. आने वाले समय में उन्हें ऐसी ही कई और सफलताएं मिलें.

एशियन गेम्स में सीमा का सफर अभी खत्म नहीं हुआ है. वह 28 सितंबर को एक बार फिर ट्रैक पर उतरेंगी. वह 5000 मीटर में भी देश का प्रतिनिधित्व करेंगी. अब भारत को एक बार फिर सीमा से मेडल की उम्मीद होगी. 

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