Esports में भारतीय टीम बड़े मौके से चूक गई. वह भी इसलिए, क्योंकि जिस टीम के खिलाफ उन्हें मैच खेलना था, वह देरी से आई. यह मामला एशियन गेम्स का है. E-football में भारत की ओर से दानियाल पटेल और चिनमय साहू की जोड़ी हिस्सा ले रही थी. ग्रुप राउंड के अपने दूसरे मुकाबले में उन्हें मंगोलिया का सामना करना था. मंगोलिया की टीम समय पर नहीं आ सकी. इस कारण भारत को वॉकओवर मिल गया. लेकिन इस जीत से भारत को भारी नकुसान हो गया. माने वॉकओवर ही भारतीय दल के 'गेम ओवर' का कारण बन गया.
जीत के भी 'हारे'! E-Football प्लेयर्स के लिए वॉकऑवर बन गया 'गेम ओवर'
भारतीय टीम ने ग्रुप राउंड के पहले मैच में उजबेकिस्तान का सामना किया था. इस मैच में भारत ने 0-0 से ड्रॉ खेला था. इसके बाद टीम का सामना मंगोलिया से था. नॉकआउट में पहुंचने के लिए भारत के लिए यह मैच जीतना जरूरी था.

भारतीय टीम ने ग्रुप राउंड के पहले मैच में उजबेकिस्तान का सामना किया था. इस मैच में भारत ने 0-0 से ड्रॉ खेला था. इसके बाद टीम का सामना मंगोलिया से था. भारत को नॉकआउट में जगह बनाने के लिए यह मैच बड़े अंतर से जीतना था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
देरी से आया मंगोलिया का खिलाड़ीद ब्रिज की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगोलिया टीम के लीडर तय समय से तीन मिनट देरी से आए. इस कारण मैच को रद्द करके टीम इंडिया को विजेता घोषित कर दिया गया. भारत को इसका नुकसान हो गया. दरअसल भारत को अपने ग्रुप में टॉप पर आने के लिए बड़े अंतर से जीत चाहिए थी. ताकी वह पॉइंट डिफरेंस के आधार पर आगे बढ़ सके. मैच रद्द होने से भारत को अंक तो मिले, लेकिन उनका गोल डिफरेंस 0 ही रहा. इस वजह से वह दूसरे स्थान पर रहे. भारत के ग्रुप से उजबेकिस्तान आगे बढ़ा. उजबेकिस्तान ने मंगोलिया को मोबाइल में 6-3 और कंसोल में 12-0 से हराया था. इस तरह से उन्होंने 15 पॉइंट्स का डिफरेंस हासिल किया. वह टेबल के टॉप पर रहे और क्वार्टरफाइनल में जगह बनाई.
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भारतीय टीम खेलना चाहती थी मुकाबलाभारतीय टीम को यह नतीजा मंजूर नहीं था. वह मैच खेलना चाहती थी. उन्होंने रेफरी से अपील की. उन्होंने कहा कि मंगोलिया के खिलाड़ी भले ही देरी से आए हैं, लेकिन भारत मैच खेलना चाहता है. रेफरी ने नियम का हवाला देते हुए इनकार कर दिया. भारत को रिव्यू का ऑप्शन दिया गया. इसके लिए, उन्हें 500 डॉलर का भुगतान करना था. भारतीय दल जानता था कि इसका कोई फायदा नहीं है. रिव्यू में नियम नहीं बदले जाएंगे. इस कारण उन्होंने चैलेंज न करने का फैसला किया.
भारतीय टीम इस इवेंट में मेडल की दावेदार थी. खासतौर पर दानियाल. इन खेलों से महज एक महीने पहले दानियाल एशिया के eFootball मोबाइल चैंपियन बने थे. उन्हें मेडल का बड़ा दावेदार माना जा रहा था. लेकिन महज एक नियम ने उनसे मौका छीन लिया.
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