The Lallantop

भारत में 'देसी स्मार्टफोन' की लाइन लगने वाली है, ₹62500 करोड़ की बात है!

अचानक से जो ईयरफोन और स्मार्ट वॉच बनाने वाली कंपनियों को INDIAN BRAND, Make in India, Build an Indian brand बनने का चस्का लगा है, उसके पीछे सरकार की Mobile Phone Manufacturing Scheme है. दो महीने पहले केंद्रीय कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) के साथ टोटल 62,500 करोड़ रुपये के बजट को अप्रूवल दिया है.

Advertisement
post-main-image
देसी स्मार्टफोन बनाने का चस्का कई कंपनियों को लगा है

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • लंदन आधारित कंपनी Nothing ने अपने सब-ब्रांड CMF की 51.1 प्रतिशत हिस्सेदारी भारतीय कंपनी Optiemus को 22 सितंबर को बेच दी, जिससे CMF अब भारतीय कंपनी बन गया।
  • भारतीय स्मार्टफोन बाजार में अचानक देसी ब्रांडों की संख्या बढ़ने के पीछे भारत सरकार की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) है, जिसे हाल ही में 62,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी मिली।
  • MPMS स्कीम के तहत भारतीय ब्रांडों को सेल पर अधिक इंसेंटिव मिलने से नए इंडियन स्मार्टफोन ब्रांड उभर रहे हैं, और विदेशी ब्रांड भी हिस्सेदारी खरीदकर देसी बनने का प्रयास कर रहे हैं।

इंडिया के स्मार्टफोन मार्केट में 22 सितंबर को एक घटना हुई. लंदन बेस्ड टेक स्मार्टफोन ब्रांड Nothing ने अपने सब-ब्रांड CMF को एक इंडियन कंपनी Optiemus को बेच दिया. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विस कंपनी Optiemus ने CMF में 51.1 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है. माने अब CMF एक इंडियन कंपनी है.

Advertisement

महज एक महीने पहले तक इंडियन स्मार्टफोन के नाम पर हमारे पास सिर्फ Lava हुआ करता था. लेकिन कुछ दिनों पहले बोल्ट ने अपने स्मार्टफोन लॉन्च किए. इसी महीने में एक और देसी कंपनी MIVI अपने स्मार्टफोन लेकर आ रही है. सोचने वाली बात है कि अचानक से क्या हो गया.

# क्या विदेशी कंपनियों का प्रभाव कम हो गया? 
# क्या इंडियन यूजर्स का ऐप्पल, सैमसंग, गूगल, वीवो, ओप्पो से मोहभंग हो गया? 
# क्या चीनी कंपनियों के फोन में दम नहीं रहा?

Advertisement

ऊपर कही बातों में से कछु भी नहीं हुआ है. आज भी आईफोन के लिए लंबी लाइन लगती है. पिक्सल के अपने मुरीद हैं तो देश में नंबर वन कंपनी वीवो है. चीनी स्मार्टफोन हर दिन बेहतर ही हो रहे हैं. सैमसंग के फ्लैगशिप डिवाइस का एंड्रॉयड में कोई तोड़ ही नहीं है. फिर ऐसा क्या हुआ जो अचानक से इंडियन स्मार्टफोन ब्रांड लॉन्च होने लगे.

MPMS का चक्कर बाबू भईया

अचानक से जो ईयरफोन और स्मार्ट वॉच बनाने वाली कंपनियों को INDIAN BRAND, Make in India, Build an Indian brand बनने का चस्का लगा है, उसके पीछे सरकार की Mobile Phone Manufacturing Scheme है. दो महीने पहले केंद्रीय कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) के साथ टोटल 62,500 करोड़ रुपये के बजट को अप्रूवल दिया है.

Advertisement

ये भी पढ़ें: Apple के बाद सैमसंग ने भी बढ़ाए फोन के दाम, AI यहां भी झटका देने लगा

भारत सरकार MPMS स्कीम के तहत हजारों करोड़ रुपये पांच साल के दौरान खर्च करेगी. नई स्कीम का उद्देश्य बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रोनिक्स मैन्युफैक्टरिंग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI-LSEM) की जगह लेना है, जो 31 मार्च 2026 को खत्म हो चुकी है. आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम की वजह से ही देश में ऐप्पल जैसी कंपनी ने अपने डिवाइस बनाना स्टार्ट किए थे.

पता है-पता है, आप कहोगे MPMS का फायदा तो दूसरी स्मार्टफोन कंपनियों को भी तो होगा. सैमसंग से लेकर ऐप्पल और वीवो भी आजकल देश में स्मार्टफोन बनाती हैं. एकदम ठीक बात, लेकिन इस स्कीम में एकदम देसी कंपनियों के लिए अलग कोटा है. शुद्ध INDIAN BRAND होने के तीन बड़े फायदे हैं.

  • MPMS स्कीम की मदद से भारत में मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को बिक्री पर 2.25 पर्सेंट से 5 पर्सेंट तक का इंसेंटिव दिया जाएगा. लेकिन इंडियन ब्रांड को 5 पर्सेंट पूरा मिलेगा.
  • कंपनियां मोबाइल फोन के मुख्य पार्ट्स और सब-असेंबली भारत से खरीदती हैं तो उनको 1.5 पर्सेंट तक का एडिशनल इंसेंटिव मिलेगा.
  • भारतीय ब्रांडों को डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए सेल पर 3 पर्सेंट का एडिशनल इंसेंटिव दिया जाएगा.

कुल जमा 9.5 फीसदी इंसेंटिव आपको अलग से मिलेगा जो आप शुद्ध देसी ब्रांड हुए. इसी वजह से अचानक से इंडियन स्मार्टफोन ब्रांड लॉन्च हो रहे. जहां लॉन्च का जुगाड़ नहीं वहां विदेशी कंपनी में हिस्सेदारी खरीदकर उसे देसी बनाया जा रहा है. OnePlus और Realme की पेरेंट कंपनी Oppo ने अपने डिवाइस बनाने के लिए Amber Enterprises India से हाथ मिलाया है जो 2027 से इनका प्रोडक्शन संभालेगी. माने हर किसी को MPMS में हिस्सेदारी चाहिए.

इसमें कोई बुराई भी नहीं. प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI-LSEM) ने वाकई देश में प्रोडक्शन को बढ़ावा दिया. लेकिन इंडियन स्मार्टफोन ब्रांड का इतिहास उनके साथ नहीं है. एक समय माइक्रोमैक्स, कार्बन, इंटेक्स समेत कई कंपनियां मैदान में थीं. लेकिन जल्दी ही पूरी तरह से गायब भी हो गईं. उम्मीद करते हैं MPMS स्कीम की मदद से वाकई कुछ इंडियन स्मार्टफोन ब्रांड बाजार में दम दिखाएंगे. यहीं बनेगा तो उम्मीद करते हैं किफायती भी होगा.

वीडियो: सैमसंग, आईफ़ोन अब नो कॉस्ट EMI पर नहीं मिलेंगे?

Advertisement