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एशियन गेम्स में 'कंफर्ट जोन' में थे सीनियर खिलाड़ी? मंत्रालय करेगा समीक्षा

खेल मंत्रालय ने एशियन गेम्स से पहले कहा था कि इन खेलों के लिए 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए. इसके बावजूद भारत का प्रदर्शन कई खेलों में निराशाजनक रहा. इसी कारण अब प्रदर्शन की समीक्षा होगी.

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खेल मंत्री मंसुख मांडविया सभी नेशनल फेडरेशंस के साथ एशियन गेम्स के प्रदर्शन की समीक्षा करेंगे. (Photo-PTI)

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  • भारत ने एशियन गेम्स 2026 में कुल 85 मेडल हासिल किए, जिसमें कई खेलों में पहली बार और ऐतिहासिक मेडल शामिल हैं, लेकिन बैडमिंटन और शूटिंग में प्रदर्शन अपेक्षित स्तर से कम रहा।
  • भारत के इस खराब प्रदर्शन के पीछे मुख्य कारण खिलाड़ियों का कमजोर प्रदर्शन, चोटिल होना और अनुभवी खिलाड़ियों का कम्फर्ट जोन में होना बताया गया है, जबकि कई खेलों पर भारी खर्च भी हुआ।
  • खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय खेल महासंघों के साथ 13 अक्टूबर को समीक्षा बैठक निर्धारित की है, जिसमें टॉप्स योजना और खेलों में हुए खर्च की समीक्षा कर भविष्य की रणनीतियाँ तय की जाएँगी।

भारत ने एशियन गेम्स 2026 में 85 मेडल हासिल किए. भारतीय एथलीट्स ने कई इवेंट्स में पहली बार और ऐतिहासिक मेडल जीते. कुछ ऐसे खेल भी थे जहां भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा. खासतौर पर बैडमिंटन और शूटिंग. इन खेलों में भारत को कई मेडल्स की उम्मीद थी. भारत के  कई अनुभवी खिलाड़ी भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए. खेल मंत्रालय अब सभी नेशनल फेडरेशनों के साथ मिलकर प्रदर्शन की समीक्षा करेगा.

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भारत ने चीन में हुए पिछले एशियन गेम्स में 106 मेडल जीते थे जिनमें 24 गोल्ड शामिल थे. इस बार मेडल और गोल्ड, दोनों की संख्या में बहुत कमी आई है. खेल मंत्रालय के एक सूत्र ने न्यूज एजेंसी से कहा,  

हमें कम से कम 150 पदक जीतने चाहिए थे और हम जीत भी सकते थे. कुछ अनुभवी खिलाड़ी साफ तौर पर ‘कम्फर्ट जोन’ में थे. इसका असर उनके प्रदर्शन में दिखा. मंत्रालय 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय खेल महासंघों के साथ बैठक में इसकी समीक्षा करेगा.

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खेल मंत्रालय करेगा समीक्षा

खेल मंत्रालय मुख्य रूप से स्टार खिलाड़ियों से निराश है. मंत्रालय को इस बात से ताज्जुब है कि ओलंपिक मेडलिस्ट एशियाड में पदक नहीं जीत पाए. 23 इवेंट्स में करीब 89 अनुभवी खिलाड़ी नाकाम रहे. टॉप्स के तहत नौ इवेंट्स के 34 खिलाड़ियों पर 27 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए. इसके बाद भी प्रदर्शन निराशाजनक रहा. इसमें बैडमिंटन और निशानेबाजी के प्रमुख खिलाड़ी हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय टॉप्स (Target Olympic Podium Scheme) की भी समीक्षा करेगा. टॉप्स के खिलाड़ियों को मनचाहे कोच, विदेश में अभ्यास और हर सुविधा के लिए सरकार ने भारी खर्च किया. फिर भी मेडल नहीं आए.  

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एथलेटिक्स में खिलाड़ी हुए थे चोटिल

एथलेटिक्स में भारत को पिछले एशियन गेम्स में छह मेडल मिले थे. इस बार किसी भी इवेंट में गोल्ड को डिफेंड नहीं कर सके. एथलेटिक्स में बड़ी परेशानी खिलाड़ियों की चोट रही. 100 मीटर हर्डल की एथलीट ज्योति याराजी ने चोट के कारण हिस्सा ही नहीं लिया. ट्रिपल जंप में प्रवीण चित्रावेल पहले ही अटेम्प्ट में चोटिल हो गए. वहीं 400 मीटर हर्डल्स के यशस पलाक्षा अपनी हीट के बीच से हट गए थे. 

मंत्रालय को लगता है कि इस तरह आखिरी समय पर हटना सही नहीं है. इन खिलाड़ियों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे. वहीं बैडमिंटन में भी इस बार भारत को केवल एक ब्रॉन्ज मेडल हासिल हुआ. इंडिविजुअल इवेंट में कोई मेडल नहीं मिला. खेल मंत्रालय ने एशियन गेम्स से पहले कहा था कि इन खेलों के लिए  700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए थे. अब वह इसे लेकर पूरी समीक्षा के लिए तैयार है.

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