जैवलिन थ्रोअर आशीष यादव (Ashish Yadav) ने वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैम्पियनशिप्स 2026 (World Athletics U20 Championships 2026) में कमाल कर दिया. उन्होंने USA के ओरेगन में चल रहे इस इवेंट की मेन्स कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता. आशीष वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैम्पियनशिप्स में मेडल जीतने वाले दूसरे भारतीय हैं. करीब एक दशक पहले नीरज चोपड़ा ने इवेंट में पहली बार जैवलिन थ्रो में मेडल जीता था.
आशीष यादव ने वर्ल्ड एथलेटिक्स U20 चैम्पियनशिप्स में जीता सिल्वर, नीरज का कारनामा दोहराया
भारत के जैवलिन थ्रोअर आशीष यादव (Ashish Yadav) ने वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैम्पियनशिप्स 2026 (World Athletics U20 Championships 2026) में शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने मेन्स इवेंट में सिल्वर मेडल अपने नाम किया. आशीष इस टूर्नामेंट में मेडल जीतने वाले भारत के दूसरे एथलीट हैं.

19 साल के आशीष यादव ने जैवलिन थ्रो इवेंट में अपनी ताकत दिखाई. उन्होंने 74.09 मीटर का बेस्ट थ्रो करके सिल्वर मेडल जीता. वह दूसरे नंबर पर रहे. साउथ अफ्रीका के जान-हेंड्रिक हेमन्स ने 80.50 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता. जबकि, डोमिनिका के एडिसन जेम्स 73.89 मीटर थ्रो के साथ तीसरे नंबर पर रहे. उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला.
आशीष के लिए यह सिल्वर मेडल बेहद खास है. वह वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैम्पियनशिप्स में जैवलिन में मेडलर जीतने वाले सिर्फ दूसरे भारतीय एथलीट हैं. इससे पहले साल 2016 में नीरज चोपड़ा ने इसी टूर्नामेंट गोल्ड मेडल जीता था. तब नीरज ने वर्ल्ड रिकॉर्ड रिकॉर्ड बनाते हुए 86.48 मीटर का थ्रो किया था. जूनियर लेवल पर यह रिकॉर्ड आज भी नीरज चोपड़ा का नाम दर्ज है.
मेन्स जैवलिन थ्रो इवेंट में आशीष से मेडल की उम्मीद थी. जिस पर वह खरे उतरे. हालांकि, उनकी शुरुआत अच्छी नहीं रही. आशीष ने पहला थ्रो 69.96 मीटर का किया. उनका दूसरा थ्रो फाउल रहा.
लेकिन, आशीष ने तीसरे अटैम्प्ट में शानदार वापसी की. उन्होंने 74.09 मीटर का थ्रो करके दूसरा स्थान हासिल कर लिया. इसके बाद, आशीष ने 72.31 मीटर, 70.62 मीटर और 67.98 मीटर के थ्रो किए. सिल्वर मेडल की रेस में कोई दूसरा प्लेयर उनसे आगे नहीं निकल सका.
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आशीष वर्ल्ड अंडर-20 चैम्पियनशिप्स में सीजन के बेस्ट थ्रो का मार्क क्रॉस नहीं कर पाए. आशीष का पर्सनल और इस सीजन का बेस्ट थ्रो 74.49 मीटर है. यह थ्रो उन्होंने इस साल पटियाल में किया था.
आशीष के लिए यह मेडल अहम है. उन्होंने अपने जूनियर करियर में सिल्वर मेडल जीतकर सबसे बड़ी सफलता हासिल की है.
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