
दीपावली पर अपने परिवार की महिलाओं और बच्चों के साथ हार्दिक.
अब तक तो आप समझ ही गए होंगे. फिर भी आपको बता दे रहे हैं. नाम है हार्दिक पटेल. वही हार्दिक पटेल, जिसकी चर्चा गुजरात चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बाद सबसे ज्यादा हो रही है. एक शहर के महाविद्यालय के महासचिव पद का चुनाव जीतने वाला ये लड़का आज इतना महत्वपूर्ण कैसे हो गया, इसकी कहानी भी दिलचस्प है.
हार्दिक की बहन हैं मोनिका पटेल. पढ़ाई के दौरान 2015 में मोनिका को राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली छात्रवृत्ति नहीं मिली. इसके बाद हार्दिक ने पटेलों को ओबीसी में शामिल करवाने के लिए एक पाटीदार अनामत आंदोलन समिति बनाई. उस वक्त तक वो पाटीदारों के युवा संगठन 'सरदार पटेल ग्रुप' के सदस्य और वीरमगाम शाखा के अध्यक्ष थे. सरदार पटेल ग्रुप के नेता लालजी पटेल हार्दिक के पाटीदार अनामत आंदोलन के विरोध में थे, जिसे देखते हुए हार्दिक ने सरदार पटेल ग्रुप छोड़ दिया. इसके बाद सरदार पटेल ग्रुप की ओर से आरोप लगाया गया कि हार्दिक पटेल ने सरदार पटेल ग्रुप के दो लाख रुपये नहीं लौटाए हैं. हार्दिक पर एफआईआर भी हुई, जिसे हार्दिक ने बीजेपी का इशारा बताया था.

हार्दिक के बुलावे पर लाखों लोग आंदोलन में शामिल हुए थे.
22 जुलाई 2015 का दिन था. हार्दिक पटेल की अगुवाई में गुजरात में 20 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले पटेल समुदाय के लाखों लोग सड़कों पर उतर आए. 17 अगस्त को सूरत और उसके बाद 25 अगस्त को अहमदाबाद में हार्दिक के समर्थन में जुटी भीड़ ने हार्दिक को बतौर नेता मान लिया था. लगभग 40 दिनों तक आंदोलन चला. कई जगहों पर हिंसा हुई. लोग घायल हुए, गाड़ियों में आग लगा दी गई, कई जगहों पर तोड़-फोड़ हुई. राज्य के गृहमंत्री रजनी पटेल के घर में भी आगजनी हुई, जिसके बाद हार्दिक पर देशद्रोह का केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. हार्दिक को 9 महीने जेल में रहना पड़ा. 14 जुलाई 2016 को जमानत मिल गई. जेल से बाहर आए, तो बीजेपी के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने लगे.
पिता रहे हैं बीजेपी कार्यकर्ता

अपने घर के बड़े-बुजुर्गों के साथ हार्दिक पटेल.
हार्दिक पटेल अहमदाबाद के वीरमगाम के चंदन नगरी गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता का नाम भरतभाई पटेल है, जो गुजरा के कड़ी तालुका के बीजेपी कार्यकर्ता रहे हैं. भरतभाई पटेल एक कारोबारी हैं, जो औद्योगिक प्रतिष्ठानों को पानी की सप्लाई करते हैं. गुजरात में 20 फीसदी की आबादी वाले पटेल समुदाय के लिए आरक्षण मांगने वाले हार्दिक बंदूकों के शौकीन हैं. खेती-बाड़ी के साथ ही टेक्सटाइल, हीरा और फॉर्मास्यूटिकल का कारोबार करने वाले पटेल समुदाय के आंदोलन की वजह से ही 1885 में कांग्रेस की माधवव सिंह सोलंकी सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था. हार्दिक ने जब आंदोलन शुरू किया था तो कहा था-
"पटेल समुदाय के किसी युवा को 90 प्रतिशत नंबरों के साथ भी एमबीबीएस में दाखिला नहीं मिलता, वहीं आरक्षण के सहारे 40-45 फीसद नंबरों से लोग दाखिला और नौकरी पा जाते हैं"हार्दिक ने पाटीदारों के लिए 2015 में आंदोलन शुरू किया था. तब से अब तक दो साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है. चुनाव है, तो इस आंदोलन के जरिए हार्दिक अपना राजनीतिक वजूद भी तलाश रहे हैं. हार्दिक की पैदाइश 20 जुलाई 1993 को हुई थी. इस लिहाज से वो अब भी 25 साल के नहीं हुए हैं. भारतीय संविधान कहता है कि 25 साल से कम उम्र का कोई भी व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता है, इसलिए हार्दिक चुनाव भी नहीं लड़ रहे. लेकिन वो कहते हैं कि मुझे चुनाव नही लड़ना है और चुनाव लड़ने का हमारा स्वार्थ भी नहीं है. हमें अधिकार और न्याय चाहिए. हम अहंकार के सामने लड़ रहे हैं. जीत हमारी होगी.
सोशल मीडिया पर है सक्रियता

ये हार्दिक का ट्विटर अकाउंट है.
हार्दिक पटेल युवा हैं. 24 साल के हैं और टेक्नोसेवी हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और ट्विटर पर खासे सक्रिय हैं. वो लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए जनसभाओं के साथ ही सोशल मीडिया का भी सहारा लेते हैं. हार्दिक पटेल ने पाटीदार अनामत आंदोलन की शुरुआत की थी, तो उनके पास संगठन के नाम पर कुछ नहीं था. इसकी पहली सभा 6 जुलाई 2015 को हुई थी, जिसके प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया गया. इसी की देन थी कि जब 22 जुलाई को हार्दिक ने पूरे गुजरात के पाटीदार लोगों को एक जुट होने को कहा, तो लाखों लोग हार्दिक के समर्थन में उतर आए. उनके कुछ ट्वीट साफ तौर पर उनकी महत्वाकांक्षा को दिखाते हैं.
कांग्रेस से मुलाकात के निकाले जा रहे मायने
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात का अपना तीन दिवसीय दौरा 23 अक्टूबर को शुरू किया. बीजेपी की ओर से दावा किया गया कि हार्दिक पटेल कांग्रेस का समर्थन करने वाले हैं और इसके लिए वो राहुल गांधी से मिले हैं. वहीं हार्दिक ने कहा कि मैं राहुल गांधी से नहीं मिला, लेकिन जब मिलूंगा तो पूरे हिंदुस्तान को बता के जाउंगा.
वहीं 23 तारीख को ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गुजरात के प्रभारी अशोक गहलोत ने हार्दिक पटेल से एक होटल में मुलाकात की थी. इसी के बाद दावा किया गया कि होटल में हार्दिक की मुलाकात राहुल गांधी से हुई है. होटल के सीसीटीवी फुटेज में हार्दिक दिख रहे हैं. इसके बाद अशोक गहलोत ने बीजेपी पर जासूसी करने का आरोप लगाया.
इसके समर्थन में हार्दिक पटेल ने भी ट्वीट किया-
और अब कांग्रेस के साथ डील की बात

पाटीदारों के आरक्षण की मांग को लेकर चर्चा में आए हार्दिक अब हर कीमत पर पाटीदारों के लिए आरक्षण चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने इस चुनाव में कांग्रेस को सशर्त समर्थन देने की बात कही है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हार्दिक ने पाटीदार आरक्षण की मांग पूरी करने, जीतने पर सरकार में भागीदारी और खुद हार्दिक पर लगे राष्ट्रद्रोह का केस हटाने के एवज में समर्थन देने को कहा है. हार्दिक ने ये भी कहा है कि कांग्रेस अभी साफ कर दे कि अगर वो सत्ता में आती है तो संविधान के किस प्रावधान के तहत वो पाटीदारों को आरक्षण देगी. सरकार में पाटीदारों की भागीदारी कितने प्रतिशत की होगी. इसके अलावा हार्दिक ने चुनाव में पाटीदार बहुल इलाकों मे पाटीदार जाति के नेताओं को टिकट देने की मांग की है.
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