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सिडनी स्वीनी के विवादित एड पर महिला एथलीट्स का जवाब, 'खेल में हमने खून-पसीना बहाया है'

अमेरिकी एक्ट्रेस सिडनी स्वीनी के एड को लेकर विवाद खड़ा हो गया. इस एड के जवाब में महिला एथलीट्स ने नया कैंपेन शुरू कर दिया है. कैंपेन में बताया जा रहा है कि स्पोर्ट्स में लड़कियां कैसी दिखती हैं. समझें क्या है पूरा विवाद.

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सिडनी स्वीनी ने एक स्पोर्ट्स एप के लिए एड किया, लेकिन इस एड से महिला एथलीट्स को दिक्कत है. (Photo-AP/Screengrab)

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  • अमेरिकी एक्ट्रेस सिडनी स्वीनी ने स्पोर्ट्स प्रेडिक्शन ऐप Novig के लिए ऐसा विज्ञापन किया जिसमें वे न्यूड होकर स्पोर्ट्स इक्विपमेंट्स से खुद को ढकती नजर आईं, जिससे विवाद पैदा हुआ।
  • विज्ञापन में महिला खिलाड़ियों को सेक्सुअलाइज करने के विरोध में कई महिला एथलीट्स ने अपनी असली स्पोर्ट्स प्रदर्शन की वीडियो पोस्ट कर महिला एथलीट की काबिलियत पर ध्यान देने की मांग की।
  • इस विवाद के बाद यूरोपियन टीवी नेटवर्क ने महिला एथलीट्स की तस्वीरों के लिए नई फोटोग्राफिक गाइडलाइंस जारी कीं ताकि उन्हें खेल के दौरान अप्रिय नजरिए से बचाया जा सके।

सिडनी स्वीनी स्पोर्ट्स में लड़कियां ऐसी दिखती हैं,

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दौड़ती हुईं, 
भागती हुईं, 
पसीना बहाती हुईं, 
चोट खाती हुईंं
पोडियम पर खड़ी हुई, मेडल को चूमती हुईं.

इन दिनों सोशल मीडिया पर आपको ऐसी कई वीडियो नजर आएंगे, जिसमें महिला खिलाड़ी यह कह रही हैं. वह दिखा रही हैं कि महिला एथलीट होने का मतलब क्या होता है? स्पोर्ट्स में महिलाएं वाकई में दिखती कैसी हैं, क्या करती हैं? लेकिन यह सब क्यों? किसके लिए? क्या है यह पूरा विवाद. आपको बताते हैं.

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क्या है पूरा विवाद?

पूरा विवाद अमेरिकी एक्ट्रेस सिडनी स्वीनी के एक हालिया एड कैंपेन से जुड़ा है. उन्होंने स्पोर्ट्स प्रेडिक्शन प्लेटफॉर्म Novig के लिए एड किया है, जो खेलों के प्रेडिक्शन से जुड़ा ऐप है. इस विज्ञापन में एक्ट्रेस बास्केटबॉल, फुटबॉल, टेनिस रैकेट जैसे स्पोर्ट्स इक्यूपेमेंट्स के साथ नजर आ रही हैं. अलग-अलग खेलों से जुड़े सामान के साथ वह वीडियो एड में बार-बार स्पोर्ट्स शब्द का इस्तेमाल करती नजर आई हैं. सिडनी कहती हैं, 

अगर आपको लगता है कि स्पोर्ट्स के बारे में जानते हैं तो साबित कीजिए. चाहे कोई भी स्पोर्ट्स हो. यहां बस आप हैं और स्पोर्ट्स पर आपका टेक.

लेकिन पूरे एड में सिडनी न्यूड नज़र आती है. अपनी बॉडी को स्पोर्ट्स इक्विपेंमेंट्स से खुद को ढकती हुई नजर आईं. और यहीं से विवाद शुरू हुआ. यह एड लोगों को पसंद नहीं आया. इसकी कई वजहें थीं.

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एक वजह यह थी एड में स्पोर्ट्स से ज्यादा किसी और चीज पर फोकस किया गया था. लोगों ने कहा कि स्पोर्ट्स की बात करने के लिए किसी हॉलीवुड एक्ट्रेस को न्यूड दिखाने की जरूरत नहीं थी. एड में स्पोर्ट्स इक्विपमेंट को जिस तरह इस्तेमाल किया, उस पर भी लोगों ने आपत्ति जताई. सबसे कड़ा विरोध स्पोर्ट्स में भी महिलाओं को सेक्सुअलाइज करने पर जताया जा रहा है.

शुरू हुआ नया ट्रेंड

सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हुई कि आखिर हर बार महिलाओं को स्पोर्ट्स में दिखाने के लिए उन्हें सेक्सुलाइज करने की क्या ज़रूरत है? महिला स्पोर्ट्स की कवरेज में भी लुक्स और बॉडी को तवज्जो दी जाती है. लेकिन इस बार अपनी बात रखने के लिए महिला एथलीट्स ने एक अलग तरीका अपनाया जो अब ट्रेंड बन गया है.

सबसे पहले अमेरिका की पूर्व जिमनास्ट ग्रेसी क्रामर ने इस एड के जवाब में रील पोस्ट की. रील में उन्होंने अपनी ट्रेनिंग के वीडियो शेयर किए, अपने NCAA मेडल्स की तस्वीरें शेयर की. वह इस रील में कई अलग-अलग स्पोर्ट्स खेलती हुए नजर आईं.  इस रील के कैप्शन में उन्होंने लिखा,

मुझे नहीं पता सिडनी स्वीनी क्या कर रही थीं, लेकिन स्पोर्ट्स में महिलाएं, ऐसी दिखती हैं.

उन्होंने सिडनी के एड के जवाब में अपनी परफॉर्मेंस दिखाई. वह चाहती थीं कि दुनिया को बताया जा सके महिला खिलाड़ियों की बॉडी सेक्सुलाइज करने के बारे में नहीं है. महिला एथलीट के लिए उनकी बॉडी खेल में उम्दा प्रदर्शन और फिटनेस के लिहाज से अहम है.

इसके बाद कई अलग-अलग देशों के एथलीट इसी अंदाज में आपत्ति जताते हुए सामने आईं. इसमें ओलंपिक मेडलिस्ट साइकिलिस्ट सोफी केपवेल, ऑस्ट्रेलिया की वॉटर पोलो खिलाड़ी टिली कर्न्स, दिग्गज स्विमर लैनी पैलिस्टर, रग्बी प्लेयर सोफी फेला शामिल थीं.

सिर्फ इतना ही नहीं, पहली बार आयोजित हो रही अल्टीमेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी यही एक वाक्य बार-बार सुनाई दिया. स्प्रिंटर एमी हंट 200 मीटर में चौथे स्थान पर रही थीं. रेस के बाद वह हांफ रही थीं. तभी बीबीसी ने माइक उनके सामने रख दिया.  एमी ने कहा,

सिडनी स्वीनी, स्पोर्ट्स में महिलाएं ऐसी दिखती हैं.

सिर्फ इतना ही नहीं. इसके बाद उन्होंने उनके ही इवेंट का गोल्ड जीतने वाली मेलिसा जेफेरसन के टाइमिंग और मेहनत की तारीफ करते हुए कहा,

21.4 सेकंड, मसल्स, मेहनत, पसीना, खून और आंसू. यह है स्पोर्ट्स की महिलाएं.  


इस ट्रेंड पर रील बनाने वाली या एड पर सवाल उठाने वाली एथलीट्स स्पोर्ट्स में महिलाओं के सेक्सुलाइज किए जाने वाली सोच के खिलाफ हैं. महिला एथलीट्स को सिडनी के न्यूड होने से परेशानी नहीं है, उन्हें परेशानी है खेलों की दुनिया में महिलाओं को देखने के नजरिए से. उन्हें लगता है कि जब किसी महिला एथलीट को लुक्स और बॉडी के आधार पर जज किया जाता है, तो उनकी काबिलियत कहीं पीछे छूट जाती है. सोफी कैंपबेल ने अपनी पोस्ट में यह बात कही, 

दुनिया ऐसी होनी चाहिए जब महिलाएं क्या कर सकती हैं उस पर बात की जाए, ना कि वह कैसी दिखती हैं इस पर चर्चा की जाए.

क्यों नाराज हैं महिला एथलीट्स?

सबसे बड़ी चिंता उन लड़कियों को लेकर है, जो खुद को भविष्य में एथलीट के तौर पर देख रही हैं. अगर बार-बार उन्हें स्पोर्ट्स में महिलाओं की पहचान उनके लुक्स और बॉडी के जरिए दिखाई जाएगी तो क्या होगा. उनके दिमाग में, उसकी सोच में, अपने शरीर को लेकर कुछ ऐसे सवाल आएंगे जिसका खेल से कोई लेना-देना नहीं है.  वह अपने टैलेंट की जगह खुद को अपीरियंस के नजरिए से जज करने लगेंगी. एमी हंट ने भी इस बात का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि महिला एथलीट्स पीरियड्स के बीच भी अपनी ट्रेनिंग जारी रखती हैं, जो कि उनकी ताकत को दिखाता है. यही मैसेज वह आने वाली एथलीट्स को देना चाहती हैं. सिडनी के इस विवादित एड ने महिला एथलीट्स को अपनी असली कहानी दुनिया के सामने रखने का मौका दिया. यह कहानियां बता रही हैं कि महिलाएं स्पोर्ट्स में सुंदर दिखने वाली ऑब्जेक्ट नहीं हैं. महिला एथलीट्स दौड़ती हैं, गिरती हैं, चोट खाती हैं उठती हैं और फिर जीतती भी हैं.

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महिला एथलीट्स आजादी चाहती है. वह चाहती हैं कि जब भी वह मैदान पर उतरें तो उनके प्रदर्शन को देखा जाए. उनकी काबिलियत को सराहा जाए. उनके कपड़ों को या उनकी बॉडी को या उन्हें सेक्सुअलाइज तरीके से दुनिया के सामने दिखाया न जाए.

महिलाओं से जुड़े स्पोर्ट्स कवरेज के लिए बनाए गए नए नियम 

यह चिंता सिर्फ एड तक सीमित नहीं है. कई बार फोटोग्राफर्स और बॉडकास्टार्स को भी इसी कारण आलोचना का शिकार होना पड़ा. इसे रोकने के लिए इन दिनों कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं. इसमें हाल ही में यूरोपियन टीवी नेटवर्क द्वारा जारी की गई फोटोग्राफिक गाइडलाइन शामिल हैं. इन गाइडलाइंस में यह तय किया गया कि महिला एथलीट्स के फोटोस किस एंगल और किस तरीके से लिए जाएंगे. महिला एथलीट्स को कई बार अलग एंगल से लिए फोटो और वीडियो की वजह से भी परेशान होना पड़ा है. खेल के दौरान उनकी ऐसी तस्वीरें ली जाती हैं, जो उनके गेम से ज्यादा बॉडी पार्ट्स पर फोकस करता हो. सोशल मीडिया पर इन्हें सेक्सुलाइज तरीके से शेयर किया जाता है. महिला एथलीट्स ने इस फैसले का स्वागत किया था. उनके मुताबिक इससे उन्हें खेलते समय सहजता और  खेल को एंजॉय करने की आजादी महसूस होगी. वह हर समय दिमाग में 100 तरह के सवाल लेकर मैदान पर नहीं उतरेंगी. दौड़ते हुए कैसी लग रही हैं, जंप करते हुए किस एंगल से उन्हें देखा जा रहा है. 

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