इंदौर के होल्कर स्टेडियम में टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज को 14 रनों से मात देकर राहत की सांस भले ही ले ली हो. लेकिन ड्रेसिंग रूम का माहौल जश्न से ज्यादा माथे पर चिंता की लकीरें खींचने वाला होना चाहिए. भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 223 रन बनाए. मैच भी जीत लिया. लेकिन मैदान पर जो दिखा उसने फिर से एक पुरानी बीमारी की याद दिला दी. यह बीमारी है- कैच टपकाने और फील्डिंग में सुस्ती दिखाने की. अगर आज नतीजा भारत के हक में गया, तो इसका मतलब यह कतई नहीं कि सब कुछ चंगा सी.
इंदौर में जीत के पीछे छिपा बड़ा खतरा! वर्ल्ड कप 2027 से पहले डरा रही टीम इंडिया की ये आदत
Ind vs WI : इंदौर में टीम इंडिया ने 223 रन बनाकर वेस्टइंडीज को 14 रन से हरा दिया. लेकिन फील्डिंग की कमजोरी फिर सामने आई. मयंक यादव की गेंद पर अभिषेक शर्मा ने 5 रन पर हेटमायर का कैच टपकाया. 2025 से अब तक भारतीय टीम 79 कैच छोड़ चुकी है.

मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आ सकता था, जब मयंक यादव की तेजतर्रार गेंद पर अभिषेक शर्मा ने शिमरॉन हेटमायर का एक आसान सा कैच टपका दिया. उस वक्त हेटमायर महज 5 रन पर खेल रहे थे. अगर हेटमायर वहां से मैच खींच ले जाते, तो इंदौर में भी रांची जैसा ही सन्नाटा पसर जाता. गनीमत रही कि विंडीज टीम 14 रन पीछे रह गई. वरना जश्न के बजाय फजीहत की हेडलाइंस बन रही होतीं.
अब जरा डॉट्स कनेक्ट करते हैं रांची वाले पिछले मुकाबले से. रांची में भारत ने 249 रन का पहाड़ खड़ा किया था, लेकिन वहां मयंक यादव ने शेरफेन रदरफोर्ड का कैच छोड़ दिया था. तब वो 38 रन पर थे. नतीजा क्या हुआ? रदरफोर्ड और शे होप ने मिलकर 120 रनों की पार्टनरशिप की और भारत जीता हुआ मैच 6 विकेट से हार गया.
इससे पहले, मुल्लांपुर में तीसरे वनडे में भी भारत ने 351 रन बनाए थे. वहां भी कैच छोड़ने के चलते विंडीज ने टारगेट चेज कर लिया था. तब कप्तान शुभमन गिल ने खुद माना था कि कैच टपकाने से टीम का बंटाधार हुआ है.
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आंकड़े डराने वाले हैंअब जरा क्रिकबज के उस आंकड़े पर नजर डालते हैं, जो टीम इंडिया के फैंस को डराने के लिए काफी है. 2025 से अब तक 50 T20I मैचों में भारतीय फील्डर्स ने कुल 79 कैच जमीन पर गिराए हैं. यानी हर मैच में डेढ़ से ज्यादा कैच छूट रहे हैं. इसके अलावा 168 मिसफील्ड्स, 95 छूटे हुए रनआउट के मौके और 10 ओवरथ्रो दर्ज किए गए हैं.
हाल ही में टीम इंडिया के फील्डिंग कोच में बदलाव हुआ है. टी. दिलीप के जाने के बाद अगस्त 2026 में शुभदीप घोष को जिम्मेदारी सौंपी गई. रांची की हार के बाद दिनेश कार्तिक ने साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि अगर फील्डिंग का यह गिरता स्तर नहीं सुधरा, तो बड़े टूर्नामेंट जीतना भूल जाइए. कार्तिक ने यह भी कहा था कि नए कोच शुभदीप घोष पर पेसर्स की फील्डिंग और कैचिंग पोजीशन सुधारने का भारी दबाव रहेगा.
इंदौर में मिली 14 रन की यह जीत दरअसल इस गंभीर मर्ज पर सिर्फ एक पट्टी की तरह है. असली इम्तिहान 2027 के वनडे वर्ल्ड कप में होना है, जो दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में खेला जाना है. 2 अक्टूबर 2027 से शुरू होने वाले इस महाकुंभ में ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान जैसी टीमें ऐसे मौकों को कभी नहीं बख्शेंगी. अगर हेटमायर का छूटा कैच सबक नहीं बना, तो वर्ल्ड कप के नॉकआउट मैचों में यही चूक टीम इंडिया का सपना तोड़ देगी.
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