सेकंड क्लास तो क्या, मैंनें कभी इंटर क्लास में भी सफर न किया था. अब की सेकंड क्लास में सफर का सौभाग्य प्राइज़ हुआ. गाडी तो नौ बजे रात को आती थी, पर यात्रा के हर्ष में हम शाम को स्टेशन जा पहुंचे. कुछ देर इधर-उधर सैर करने के बाद रिफ्रेशमेंट-रूम में जाकर हम लोगों ने भेजन किया. मेरी वेश-भूषा और रंग-ढंग से पारखी खानसामों को यह पहचानने में देर न लगी कि मालिक कौन है और पिछलग्गू कौन.ये किस्सा एक अमीर लड़के और उसके दोस्त का है, जो छुट्टियों में उसके घर जाता है. पूरी कहानी में प्रेमचंद ने क्लास डिफ़रेंस दिखाया था. और ये दिखाया था कि कैसे मौक़ा मिलने पर आदमी खुद को ऊंचा समझ नीचे वाले को दबाने लगता है. खैर ये रही पुरानी कहानी. आज यूट्यूब खोलिए तो ऊपर ही वायरल हो रखा एक वीडियो दिखता है. जाकिर खान का. जाकिर खान जाने माने स्टैंड अप कॉमेडियन हैं. वो बताते हैं कैसे एक छोटे शहर का आदमी पहली बार महंगी जींस के शो रूम में जाता है तो वहां के वर्कर उसके साथ बिहेव करते हैं. साथ में ये अनुभव भी बताया कि आई-फोन लेने जाओ तो कैसा सुलूक होता है. बाकी बातें वीडियो में देख लीजिए. सब यहीं पढ़िएगा क्या? https://www.youtube.com/watch?v=7V6FGF1ffgQ
आई-फोन लेने जाओ तो कमरे में बंद करा के कसम खिलवाते हैं
पहली बार लेने जाओ तो मॉल में कपड़े वाले और महंगे फोन बेचने वाले ऐसा सुलूक करते हैं.
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फोटो - thelallantop
प्रेमचंद की एक कहानी है नशा. उसका एक हिस्सा पढ़िए.
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