फिल्मों के इस रॉबिनहुड का नाम है कॉरी हिन्शेन. कॉरी एशियन फिल्में खूब देखते हैं. एशियन माने जापानी, कोरियन, चाइनीज़ और भारतीय फिल्में. कॉरी इन फिल्मों को अपने यूट्यूब चैनल पर रिव्यू करते हैं. जब से उन्होंने भारतीय फिल्में देखना शुरू किया है, उन्हें कई ऐसी फिल्में मिलीं, जो किसी दूसरी एशियन फिल्म का अवैध रिमेक थीं. माने असल डायरेक्टर या स्टूडियो को एक भी पैसा दिए बिना, थैंक्यू कहे बिना फिल्म फ्रेम बाय फ्रेम उठा ली गई. जैसे 'अज्ञातवासी', 'ज़िंदा' और 'गॉड तुस्सी ग्रेट हो'. इनमें से कुछ की पोल-खोल कॉरी ने अपने यूट्यूब चैनल पीसेज़ ऑफ वर्क पर की भी है.
कुछ दिन पहले कॉरी ने 2011 में आई फिल्म मलयालम 'चापा कुरीशु' देखी. और ये देखकर उनके दिमाग का फ्यूज़ उड़ गया. क्योंकि 'चापा कुरीशु' भी चोरी का माल निकली. फिल्म साउथ कोरियन फिल्म 'हैंडफोन' की नकल है, बिना क्रेडिट. इसके बाद उन्होंने ये वीडियो बना मारा. देखिए-
कॉरी जिस चिढ़ और हताशा के साथ पूछते हैं- 'why do Indian directors do this?', उसे समझने के लिए हमें उनके यूट्यूब चैनल पर जाना चाहिए. चैनल पर एक प्लेलिस्ट है 'indian movie reviews' नाम से. इस प्लेलिस्ट को टटोलने पर हमें कम से कम तीन ऐसी फिल्में मिल जाती हैं जो अवैध रीमेक हैं-

इस लिस्ट में 'रॉकी हैंडसम' को छोड़कर सभी अवैध रीमेक हैं, चोरी का माल हैं.
कॉरी ने इनमें से कई फिल्में आधिकारिक डीवीडी खरीद कर देखी हैं. ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में बैठकर. सबटाइटल चलाकर. और पूरे ध्यान से. ताकि उन्हें विश्व सिनेमा की कसौटी पर कस सकें. और इतनी मेहनत के बाद जब फिल्म चोरी का माल निकलेगी, तो आदमी नाराज़ तो होगा ही. तारीफ इस बात की होनी चाहिए कि कॉरी ने अब इस गंदगी की सफाई करने का मन बना लिया है. उन्होंने अहद कर लिया है कि आइंदा जब भी वो भारतीय डॉयरेक्टर्स की चोरी पकड़ेंगे, उसका एक पोलखोल वीडियो बनाकर अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड कर देंगे.
'इंस्पायर' होने वाले इसे सबक की तरह लेंगे. इसकी उम्मीद की जाती है.
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