टालगो ट्रेन के प्रॉजेक्ट पर फिलहाल सरकारी रोक लग गई है.
250 किलोमीटर/ घंटे तक की रफ्तार. बैठने से लेकर खाने-पीने का वीआईपी इंतजाम. राजधानी और शताब्दी को सेफ्टी से लेकर हर मामले में फेल करने वाली टाल्गो ट्रेन के प्रॉजेक्ट पर फिलहाल ग्रहण लग गया है. सितंबर 2016 में इसका सफल टेस्ट भी हो गया था. मुंबई और दिल्ली के बीच, जिसको ट्रेन ने राजधानी और शताब्दी के 16 घंटे के मुकाबले 12 घंटे में पूरा कर दिया था. सरकार ने इस ट्रेन के कोच को भारत में प्रॉफिट शेयरिंग बेस पर चलवाने का पूरा मन भी मना लिया था. मगर अब बात टेंडर पर आकर अटक गई है. सरकार का कहना है कि वो टाल्गो ट्रेन्स को डायरेक्ट कंपनी से नहीं खरीदेगी. इसके लिए वो बाकायदा टेंडर प्रॉसेस करवाएगी.
इसलिए फंसता दिख रहा है प्रॉजेक्ट अब पेच ये है कि सरकार ने तो टेंडर की बात बोल दी है. मगर जिस तरह की सुविधाएं और फीचर्स स्पैनिश कंपनी टाल्गो दे दी है, वो कोई दे नहीं पाएगा. यही कारण है कि अब तक किसी और कंपनी ने इसमें इंट्रेस्ट नहीं दिखाया है. यही बातें रेलवे के अधिकारी भी बोल रहे हैं. और जब कोई कंपनी नहीं आ रही है तो टाल्गो से कोच लेने पड़ेंगे, मगर सरकार फिलहाल इसके मूड में नहीं दिख रही है. वहीं, इससे पहले जब सरकार ने प्रॉजेक्ट में इंट्रेस्ट दिखाया था तो टाल्गो भारत में आकर ट्रेन बनाने को तैयार था. फिलहाल तो प्रॉजेक्ट पर संकट दिख रहा है.
अब पढ़ो इस टाल्गो ट्रेन में क्या-क्या सुविधाएं हैं