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CM नवीन पटनायक के हाथ 'कंट्रोल' करने वाले इस शख़्स को 'असली CM' क्यों कहा जा रहा है?

कई लोग पांड्यन को नवीन पटनायक का राजनीतिक उत्तराधिकारी तक बताते हैं. वहीं, आलोचक उन्हें ‘ओडिशा के डी-फैक्टो सीएम’ कहते हैं. अमित शाह ने भी कहा था कि ओडिशा मे 'तमिल बाबू' का राज चल रहा है.

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पांड्यन 2000 बैच के IAS अफ़सर हैं. (फ़ाइल फ़ोटो - इंडिया टुडे)

बीते दिनों ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (Odisha CM Naveen Patnaik) का एक वीडियो वायरल हुआ. इसमें मुख्यमंत्री एक चुनावी रैली (Election Rally) को संबोधित कर रहे थे. भाषण देते वक़्त उनका बायां हाथ कांपते हुए दिखा. उनके साथ स्टेज पर माइक लेकर एक शख़्स खड़ा था. वो भाषण के दौरान उनकी मदद करते दिखा. शख़्स की नज़र कांपते हुए हाथ पर पड़ी, तो वो फ़ौरन आगे बढ़ा और उसने नवीन पटनायक के कांपता हाथ को पोडियम के नीचे छिपा दिया. इस एक वीडियो से राज्य की राजनीति में कुछ पर्दे हिलने लगे. भारतीय जनता पार्टी ने मोर्चा खोल दिया, कि वो शख़्स है कौन?  नवीन पटनायक समेत पूरे BJD पर सवाल उठने लगे कि इस शख़्स का ओडिशा और बीजू जनता दल (BJD) की राजनीति में क्या दख़ल है.

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शख़्स का नाम वीके पांड्यन (V K Pandian) है. लंबे वक़्त से सूबे की राजनीति देखने वाले बताते हैं कि पांड्यन लंबे वक़्त से राज्य के सबसे ताक़तवर नौकरशाह रहे (और हैं).

साल 2011 में नवीन पटनायक के निजी सचिव बने. तब से मुख्यमंत्री के आंख-नाक-कान माने जाते हैं. कई लोग तो उन्हें नवीन पटनायक का राजनीतिक उत्तराधिकारी तक बताते हैं. वहीं, आलोचक उन्हें ‘ओडिशा के डी-फैक्टो सीएम’ कहते हैं. जब नवीन का हाथ कांपने वाला वीडियो वायरल हुआ, तो असम के मुखयमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सीधा उन पर निशाना साधा. X पर लिखा,

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"वीके पांडियन नवीन बाबू के हाथों की हरक़तों को भी कंट्रोल कर रहे हैं. मैं ये सोचकर भी कांप जाता हूं कि तमिलनाडु का एक रिटायर्ड पूर्व-नौकरशाह ओडिशा के भविष्य पर किस हद तक कंट्रोल कर रहा है. BJP राज्य के लोगों को ओडिशा का शासन वापस देने के लिए प्रतिबद्ध है."

इससे पहले, अमित शाह ने भी बिना किसी का नाम लिए कहा था कि ओडिशा में एक ‘तमिल बाबू’ शासन कर रहे हैं. लोग राज्य को ‘बाबू राज’ से मुक्त करने के लिए बीजेपी को वोट देंगे.

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हालांकि, इस रिऐक्शन पर नवीन पटनायक ने जवाब दिया है. कहा कि BJP बेमतलब के मुद्दों को मुद्दा बनाने के लिए जानी जाती है.

कौन हैं वीके पांड्यन?

मूलरूप से तमिलनाडु के रहने वाले पांड्यन का जन्म 29 मई, 1974 को हुआ. पहले मदुरै के तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय से कृषि में ग्रैजुएशन किया. फिर नई दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से मास्टर्स. साल 2000 में IAS बन गए. ओडिशा काडर के. अलग-अलग पदों पर रहे. करियर की शुरुआत उन्होंने कालाहांडी ज़िले में बतौर डिप्टी-कलेक्टर की. बाद में वो मयूरभंज और गंजम ज़िले के कलेक्टर रहे. गंजम, नवीन पटनायक का गृह ज़िला है. सूबे की राजनीति बूझने वाले बताते हैं कि इसी के बाद से उनकी नवीन पटनायक से क़रीबी शुरू हुई. 

समय के साथ पांड्यन प्रमोट होते गए. फिर 2011 में नवीन पटनायक के निजी सचिव बने, और तब से ओडिशा की राजनीति का ‘अनिवार्य चैप्टर’ बन गए हैं.

उनकी पत्नी सुजाता कार्तिकेयन भी 2000 बैच की ही IAS हैं. वो सूबे में कमिश्नर (मिशन शक्ति) थीं. 2 मई, 2024 को चुनाव आयोग ने उन्हें ग़ैर-सार्वजनिक विभाग में ट्रांसफ़र करने का आदेश दिया था.

लंबे वक़्त तक ओडिशा के सबसे ताक़तवर नौकरशाह के तौर पर सर्विस देने के बाद वी. के. पांड्यन बीजद में शामिल हुए. (फोटो- X)

पांड्यन पर ये आरोप लगते रहे हैं कि जो भी नवीन पटनायक के क़रीब जाने की कोशिश करता है, पांड्यन किसी भी तरह से उसे साइड-लाइन करवा देते हैं. ऐसे ही एक क़िस्से का ज़िक्र इंडियन एक्सप्रेस के सुजीत बिसोई ने अपनी रिपोर्ट में किया है. लिखते हैं,

"पांड्यन से पहले प्यारीमोहन मोहापात्रा पटनायक के ख़ास होते थे. वो मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकारों में से भी थे और राज्यसभा सांसद भी. वो नवीन पटनायक के पिता बीजू पटनायक के साथ भी काम कर चुके थे. लेकिन मई, 2012 में उन्होंने कथित तौर पर पार्टी में बगावत कर मुख्यमंत्री के तख्तापलट की कोशिश की. नवीन पटनायक तब लंदन के दौरे पर थे. वापस आए और प्यारीमोहन बाहर का रास्ता दिखा दिया. संयोग की बात ये कि जिस दिन मोहापात्रा ने कथित तख्तापलट की कोशिश की, उस दिन वीके पांड्यन का जन्मदिन था."

सुजीत लिखते हैं कि ऐसा ही संजय दास बर्मा, अरुण साहू और बैजयंत पांडा के लिए भी कहा जाता है. 2009 में जीत के बाद संजय को पार्टी का डिप्टी चीफ़ व्हीप बनाया गया था. बाद में 2014 में उन्हें मंत्रीमंडल में शामिल किया गया. 2019 में संजय चुनाव हारे. हालांकि, इसके बावजूद पटनायक ने उन्हें प्लानिंग बोर्ड का डिप्टी चेयरमैन बनाया. लेकिन फिर समय के साथ संजय पावर कॉरिडोर से दूर होते गए.

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अरुण साहू के पास भी पटनायक के भारी भरकम मंत्रालय थे. लेकिन 2022 के कैबिनेट विस्तार में अचानक उनका पत्ता कट गया. बैजयंत पांडा भी एक समय पर बीजेडी के चेहरे के तौर पर जाने जाते थे. लेकिन आज वो भाजपा में हैं.

पटनायक के साथ बैजयंत पांडा. (इंडिया टुडे)

ये तो हुए पांड्यन और नवीन पटनायक के संबंध. मगर राज्य की राजनीति में उनके स्वीकार्य और दख़ल पर जो बातें की जाती हैं, उन्हें कुछ घटनाओं से समझते हैं.

बालासोर में ‘कार्यक्रम’

2 जून, 2023 को ओडिशा के बालासोर में एक भयानक रेल हादसा हुआ था. हादसे में 296 लोगों की मौत हो गई, जबकि 1200 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे. इसके कुछ रोज़ बाद जून में ही बालासोर में पांड्यन का एक ‘कार्यक्रम’ हुआ. इसकी तैयारी में ओडिशा के तमाम मंत्री-संत्री तैनात किए गए थे. हेलिकॉप्टर से आना, सर्किट हाउस में डिनर और विश्राम तक, सबका ख़्याल रखा गया.

अगने दिन अख़बारों में तस्वीरें छपीं, जिनके केंद्र में थे वीके पांड्यन. विपक्षी पार्टी भाजपा और कांग्रेस ने इसे किसी ‘नेता जैसा’ दौरा बताया. साथ ही पांड्यन पर इल्ज़ाम लगे कि वो सरकारी नौकर रहते हुए राजनैतिक गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं. 

 ( फ़ोटो -  फेसबुक/I Support IAS VK Pandian)

दोनों पार्टियों की तरफ़ से केंद्र के डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DOPT) से पांड्यन की शिकायत भी की गई. आरोप लगाया गया कि पांड्यन ने सर्विस कंडक्ट रूल का उल्लंघन किया है. केंद्र ने सूबे के मुख्य सचिव से जांच रिपोर्ट भेजने को कहा. तब ओडिशा के विपक्ष ने यही दलील दी कि मुख्य सचिव की पांड्यन के आगे चलेगी नहीं. ऐसे में वो जांच कैसे कर पाएंगे.

मार्च, 2023 में पांड्यन पर आरोप लगे कि वो ज़िले-ज़िले जाकर जन-सुनवाई कर रहे थे. कहा गया कि पांड्यन लोगों से मिलते, नेताओं की तरह भाषण देते और एलान करते नज़र आए थे. तब वो सर्विस में थे.

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लंबे वक़्त तक ओडिशा के सबसे ताक़तवर नौकरशाह के तौर पर सर्विस देने के बाद पांड्यन 23 अक्टूबर, 2023 को पांड्यन ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वॉलेंटियरी रिटायरमेंट VRS) ले ली. महीने भर बाद 27 नवंबर, 2023 को बीजद में शामिल हो गए. उस दिन BJD के बड़े नेताओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी वहां मौजूद थे. 

कहानी 5T डिपार्टमेंट की

ओडिशा में एक ‘5T’ डिपार्टमेंट है. टीम वर्क, टेक्नोलॉजी, ट्रांस्पेरेंसी, टाइम फॉर ट्रांस्फॉर्मेशन. डिपार्टमेंट मुख्यमंत्री के अधीन आता है. पार्टी में शामिल होने के बाद पांड्यन इसके अध्यक्ष बना दिए गए. इससे पहले वो इसी डिपार्टमेंट के सचिव थे.

अब इस विभाग की सबसे खास बात ये है कि यह एक अम्ब्रेला डिपार्टमेंट है, और राज्य के सारे विभाग इसी के अंतर्गत आ जाते हैं. कथित तौर पर इस वजह से राज्य के बड़े अधिकारी नाराज रहते हैं, लेकिन कर कोई कुछ नहीं सकता (क्योंकि पांड्यन).

1 जून को लोकसभा चुनाव के सातवें और आख़िरी चरण का मतदान होना है. इस पर पांड्यन BJD की संभावनाओं पर भरोसा जता रहे हैं. उनका कहना है कि BJD आख़िरी चरण में 90-95 प्रतिशत सीटें जीतेगी. देखना दिलचस्प होगा कि आख़िर ओडिशा की राजनीति में पांड्यन आगे क्या-क्या खेल करते हैं.

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