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IIT बॉम्बे में नए पंखों की खेप पहुंची, सीलिंग फैन हटाए जा रहे, वजह स्टूडेंट सुसाइड?

IIT बॉम्बे के हॉस्टलों में अब सीलिंग फैन की जगह दीवार पर लगने वाले पंखे लगाए जा रहे हैं. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब 7 महीने में संस्थान के तीन छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आ चुके हैं.

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IIT बॉम्बे के हास्टलों में दीवार वाले पंखे लगाए जा रहे हैं. (फोटो- India Today)

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  • IIT बॉम्बे ने हॉस्टल के सीलिंग पंखों को हटाकर दीवारों पर पंखे लगाने का निर्णय लिया है, जिसकी पहली खेप कैंपस में पहुंच चुकी है।
  • पिछले सात महीनों में तीन छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं के बाद पंखे बदलने का फैसला लिया गया, हालांकि प्रशासन इसे हॉस्टल रिनोवेशन का हिस्सा बताता है।
  • पंखे बदलने की प्रक्रिया हॉस्टल रिनोवेशन का हिस्सा मानी जा रही है, और आने वाले समय में इस योजना के तहत अन्य सुधार भी किए जाएंगे।

पिछले 7 महीने में 3 छात्रों की आत्महत्या के बाद IIT बॉम्बे ने ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या कदम उठाए? खबर है कि संस्थान छात्रों के हॉस्टल के कमरों में लगे पंखे बदलवा रहा है. सीलिंग फैन्स की जगह अब यहां दीवारों पर लगने वाले पंखे लगाए जा रहे हैं. IIT के छात्रों ने बताया कि नए पंखों की पहली खेप भी कैंपस में पहुंच गई है.

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ये सब तब हो रहा है, जब 22 साल के IIT स्टूडेंट साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद संस्थान पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा है. बीटेक सेकेंड ईयर के स्टूडेंट साहिल वाकोडे अपने हॉस्टल के कमरे में मृत मिले थे.

हालांकि, संस्थान ने इससे इनकार किया है कि छात्रों की आत्महत्या के बाद कार्रवाई के तौर पर ये कदम उठाया गया है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, IIT बॉम्बे के सूत्रों ने बताया कि सीलिंग पंखों को बदलने पर लगभग दो महीने से विचार चल रहा था. उसी विचार को अब अंतिम रूप दिया जा रहा है.

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प्रशासन ने कहा, ‘आत्महत्या की वजह से नहीं…’

दरअसल, जुलाई 2026 में संस्थान में पढ़ने वाले सेकेंड ईयर के एक अन्य छात्र ने आत्महत्या की थी. इसके बाद IIT-बॉम्बे प्रशासन ने छात्रों को जो कई आश्वासन दिए थे, उनमें से एक ये भी था कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हॉस्टल के पंखे बदले जाएंगे. लेकिन अब संस्थान के अधिकारी ये बात मानने को राजी नहीं हैं कि पंखे बदलने का फैसला छात्रों की आत्महत्याओं की वजह से लिया गया है. उनका कहना है कि यह हॉस्टलों के रिनोवेशन एक्सरसाइज का हिस्सा है, जिसकी योजना पहले ही बनाई जा चुकी थी. स्टूडेंट्स के सुसाइड से इसका कोई संबंध नहीं है. 

IIT बॉम्बे प्रशासन के मुताबिक,

हॉस्टलों के लिए रिनोवेशन के कई तरह के काम चल रहे हैं. सीलिंग फैन्स को बदलना भी इसी काम का एक हिस्सा है. पंखे बदलने का फैसला प्रशासन ने पहले ही ले लिया था. 

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कोटा में जाली से कवर किए थे पंखे

संस्थान के इस कदम की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि इससे पहले राजस्थान के कोटा में परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की आत्महत्या के कई मामले सामने आए थे. तब वहां छात्रों के कमरों के पंखों को जाली से कवर कर दिया गया था. इसकी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं और जमकर बहस हुई कि क्या छात्रों की आत्महत्या रोकने के लिए यही उपाय पर्याप्त हैं? अब कहा जा रहा है कि IIT बॉम्बे भी वही तरीका अपना रहा है. 

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शरद पवार वाली एनसीपी के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने संस्थान के इस कदम पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि क्या पंखे बदलने से छात्रों की गंभीर समस्याओं का समाधान हो सकता है? यह सोचना कितना बेतुका है कि सीलिंग फैन बदलने से व्यवस्था ठीक हो जाएगी.

7 महीने में तीन आत्महत्या

बता दें कि महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रहने वाले 22 साल के साहिल वाकोडे शुक्रवार, 18 सितंबर को अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे. इससे पहले इसी साल संस्थान के दो और छात्रों की आत्महत्या का मामला सामने आया था. फरवरी 2026 में बीटेक सेकेंड ईयर के ही एक स्टूडेंट ने हॉस्टल में आत्महत्या की थी. जुलाई 2026 में नए सेमेस्टर की शुरुआत होते ही 20 साल के एक BTech सेकंड ईयर के छात्र ने की आत्महत्या की घटना भी सामने आई थी.

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