वेनेजुएला की राजधानी काराकास में मंगलवार, 30 जून को आसमान पूरी तरह लाल हो गया. कुछ दिन पहले आए भूकंप से यहां की कई इमारतें क्षतिग्रस्त हैं. उनकी छतों के ऊपर छाया हुआ ये लाल रंग कुछ लोगों को डरावना लग रहा था. इस लाल आसमान के वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं. कोई इसे 'चमत्कार' बता रहा है. तो कुछ लोग इसे आने वाली किसी बड़ी आफत की चेतावनी कह रहे हैं. लेकिन सच क्या है?
सैकड़ों लाशें मिलने के बीच लाल हो गया वेनेजुएला का आसमान, भूकंप से थर्राए लोग और डर गए
लाल आसमान के वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं. कोई इसे 'चमत्कार' बता रहा है. तो कुछ लोग इसे आने वाली किसी बड़ी आफत की चेतावनी कह रहे हैं. लेकिन सच क्या है? जानते हैं.


सूर्य की किरणें असल में इंद्रधनुष के सात रंगों का मिश्रण होती हैं. सभी रंगों की Wavelength अलग-अलग होती है, मगर ये सब एक साथ यात्रा करते हैं. इसलिए इनका रंग हमारी आंखों को अलग-अलग न नजर आकर, सफेद ही दिखाई देता है. इनमें नीले और बैंगनी रंग की तरंगें (Wavelength) छोटी और एक-दूसरे के बहुत करीब होती हैं. लाल और नारंगी रंग की तरंगें लंबी और ज्यादा फैली हुई होती हैं.
जब सूरज की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती है, तो वह हवा में मौजूद बहुत छोटे-छोटे गैस के कणों, खासकर नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के अणुओं, से टकराती हैं. अब क्योंकि लाल रंग की wavelength लंबी होती है, इसलिए टक्कर से नीली रोशनी लाल रोशनी की तुलना में कहीं ज़्यादा आसानी से हर दिशा में बिखर जाती है. 19वीं सदी के वैज्ञानिक लॉर्ड रेले ने इस प्रक्रिया को समझाया था. आज इसे रेले स्कैटरिंग (Rayleigh Scattering) कहा जाता है.

यही वजह है कि दिन में आसमान हमें नीला दिखाई देता है. क्योंकि नीली रोशनी पूरे आसमान में हर तरफ फैल जाती है. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूरज होराइजन के बहुत नजदीक होता है. इसकी वजह से आसमान काफी नीचे दिखाई देता है. इसलिए उसकी रोशनी को हमारी आंखों तक पहुंचने से पहले हवा की ज्यादा मोटी परत से होकर गुजरना पड़ता है.
इस दौरान नीले रंग की रोशनी रास्ते में ही चारों तरफ बिखर जाती है. हमारी आंखों तक ज़्यादातर लाल और नारंगी रंग की रोशनी ही पहुंचती है. यही वजह है कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आसमान लाल या नारंगी दिखाई देता है.
वेनेजुएला में क्या हुआ था?ऐसे लाल और आग जैसे दिखने वाले सूर्यास्त को वेनेजुएला और कैरेबियन देशों में 'कैंडिलाज़ो' (Candilazo) कहा जाता है. ये शब्द 'कैंडिल' (Candil) से बना है, जो पुराने समय के तेल के दीये को कहा जाता था. सूर्यास्त के समय जब आसमान उसी दीये की तरह गहरे लाल और चमकदार रंग का दिखने लगता है, तो उसे कैंडिलाज़ो कहते हैं.
रिपोर्ट्स हैं कि काराकास में आसमान के लाल रंग दिखने की एक वजह सहारा रेगिस्तान की धूल थी. हर साल गर्मियों में अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान से उठने वाले बेहद बारीक धूल के कण हवाओं के साथ अटलांटिक महासागर पार करके वेनेजुएला तक पहुंच जाते हैं.
ये धूल के कण भी रोशनी को बिखेरते हैं. इससे नीली रोशनी और ज़्यादा बिखर जाती है, जबकि लाल रंग की रोशनी ज़्यादा साफ़ दिखाई देती है. इसी वजह से उस दिन आसमान का लाल रंग इतना गहरा और अलग दिख रहा था.

छह दिन पहले ही वेनेजुएला में भूकंप आया था. इसलिए ऐसे समय में लोगों को ये काफी डरावना लगा. 24 जून को वेनेजुएला में आए दो भूकंपों में करीब दो हजार लोगों की मौत हुई है. काराकास और ला ग्वाइरा में कई इमारतें ढह गईं. इमारतें गिरने से हवा में धूल और मिट्टी के बहुत बारीक कण फैल गए थे. अनुमान है कि इन कणों की वजह से भी आसमान का लाल रंग थोड़ा और गहरा दिखाई दिया हो सकता है.
लेकिन वैज्ञानिक इस बात को लेकर पूरी तरह साफ हैं कि यह लाल आसमान भूकंप से पैदा होने वाली कोई रहस्यमय रोशनी नहीं थी. ये बेहद दुर्लभ घटना होती है, जो बहुत कम समय के लिए और सीमित इलाके में दिखाई देती है.

ये कोई अलौकिक संकेत भी नहीं था और न ही किसी गुप्त हथियार का असर. असल में ये एक सामान्य वैज्ञानिक प्रक्रिया थी. उस समय हवा में धूल की वजह से ये और ज़्यादा साफ़ और गहरे लाल रंग में दिखाई दी.
वीडियो: दुनियादारी: वेनेजुएला में भूकंप ने इतनी तबाही क्यों मचाई?
















