डोनाल्ड ट्रंप ने सात मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका में घुसने पर प्रतिबंध लगा दिया है. ये सात देश हैं इराक, ईरान, सीरिया, यमन, सोमालिया, सूडान और लीबिया. शुक्रवार को ट्रंप ने इस आदेश पर साइन किए. ये बैन फिलहाल चार महीने के लिए है. इसके अलावा पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और सऊदी अरब से वीजा अप्लाई करने वालों की पहले सख्त पड़ताल होगी और उसके बाद ही, अगर मामला अमेरिकी मानकों पर ठीक-ठाक पाया गया तो, उन्हें एंट्री मिलेगी.ट्रंप ने इस सिलसिले में जो एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया है उसका नाम है ‘प्रोटेक्शन ऑफ़ दी नेशन फ्रॉम फॉरेन टेररिस्ट एंट्री इन टू दी यूनाइटेड स्टेट्स’. ट्रंप ने ऑर्डर साइन करने के बाद कहा, “हम इस्लामिक आतंकवादियों को अमेरिका से बाहर रखने के लिए नए नियम बना रहे हैं. हम उन्हें यहां नहीं चाहते. हम ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमारे सैनिकों के लिए ख़तरा बने लोगों को हम हमारे मुल्क में घुसने न दें.”
इसके अलावा सभी तरह के शरणार्थियों की यूएस एंट्री पर भी बैन लगा दिया गया था. न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के फेडरल कोर्ट ने शरणार्थियों के निर्वासन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. अब अमेरिका में रह रहे शरणार्थियों को जबरन बाहर नहीं भेजा जा सकेगा. इससे उन शरणार्थियों को राहत मिली है जो इस फैसले की चपेट में आ कर अमेरिकी एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं. न्यूयॉर्क के जेएफके एयरपोर्ट पर 12 रिफ्यूजीज़ को डिटेन कर के रखा गया था.ट्रंप के इस फैसले के खिलाफ़ पूरे अमेरिका में असंतोष की लहर फ़ैल गई है और लोग इसका जगह जगह विरोध कर रहे हैं.
ट्रंप की इस घोषणा से और इसके तत्काल प्रभाव से दुनियाभर के हवाई अड्डों पर अफरातफरी का माहौल रहा. इन सात देशों के अमेरिका जाने वाले नागरिकों के पास वैलिड वीजा होने के बावजूद उन्हें प्रवेश नकारा गया. कैरो से न्यूयॉर्क जाने वाली इजिप्ट एयर की फ्लाइट में से पांच इराक़ी और एक यमन के नागरिक को उतार दिया गया. बाद में उन्हें उनके देश वापस भेज दिया गया.
ट्रंप के इस कदम की दुनियाभर में आलोचना शुरू हो गई है.
फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक पर लिखा ‘माना हमें देश को सुरक्षित रखना है लेकिन ये हमें उन लोगों पर फोकस करके करना होगा जो असल में देश के लिए ख़तरा हैं. इस क़ानून के दायरे में बेगुनाह लोगों को भी लाने से अमेरिकन्स ‘कम सुरक्षित’ होंगे’. उन्होंने ये भी कहा कि हमें शरणार्थियों और ज़रूरतमंदों के लिए अपने दरवाज़े खुले रखने चाहिए.देखिये मार्क जुकरबर्ग की फेसबुक पोस्ट
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भी ट्रंप के इस कदम की निंदा की है. उन्होंने कहा कि ट्रंप के इस फैसले से प्रतिभाओं के अमेरिका पहुंचने में दिक्कतें आएंगी. इस फैसले पर अफ़सोस जताते हुए उन्होंने अपने लगभग 100 कर्मचारियों को उनके देश लौटने का आदेश दे दिया है.
इसके अलावा पाकिस्तान की मलाला युसुफज़ई ने भी ट्रंप के इस फैसले पर दुःख जताया है. ख़ास तौर से शरणार्थियों के प्रवेश के रोक पर. मलाला ने कहा कि वो इस निर्णय से बहुत दुखी हैं. मलाला बोली “राष्ट्रपति ट्रंप हिंसा और युद्ध पीड़ित देशों से जान बचाकर भाग रहे बच्चों, माताओं और पिताओं के लिए दरवाज़े बंद कर रहे हैं. मैं उनसे अनुरोध करती हूं कि वो दुनिया के सबसे असहाय बच्चों की ओर से मुंह न मोड़े.”डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले से धर्म के नाम पर दुनिया को दो फाड़ करने की मानसिकता को और भी बल मिलेगा. धर्म देख कर सारे काम किए जाने लगे तो वो एक भयावह स्थिति होगी. इस फैसले की आलोचना तो होती रहेगी, ये भी देखना ज़रूरी है कि इसमें इस्लाम के लिए एक गंभीर चेतावनी निहित है. अगर मज़हब के नाम पर खूंरेजी का दौर जारी रहा तो जल्द ही पूरी दुनिया में उनके अलग-थलग पड़ने का ख़तरा मंडरा रहा है. ये वक़्त विरोध और आत्मनिरीक्षण दोनों का है.
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