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नीला-नारंगी, दो रंगों में क्यों है जियो सिम और कौन सा लेना चाहिए

अबे वो फैसन नहीं है... उसके पीछे बड़की बकैती है.

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फोटो - thelallantop

मां कसम अगर जियो का सिम बोल पाता तो अपना इंट्रोडक्शन ऐसे देता, 'माइ नेम इज जियो... रिलायंस जियो.' अपने यहां उसकी डिमांड जेम्स बॉन्ड से कम तो है नहीं. लेकिन, एक बात पता है तुम्हें? अगर जियो सिम बोल पाता तो अपना इंट्रोडक्शन देने के अलावा ये भी बताता कि वो नारंगी और नीले, दो अलग-अलग रंग के कपड़े क्यों पहनता है.

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अब वो नहीं बता सकता तो हमने सोचा कि हम ही बता देते हैं. देशभक्ति के इस दौर में हो सकता है कि लोगों ने इन दोनों रंगों को नरेंदर मोदी और मायावती से जोड़ दिया हो, लेकिन इसके पीछे दूसरा कारण है.

नारंगी वाला जियो सिम

नारंगी खोखला वाले जियो सिम प्रीव्यू ऑफर के लिए डिजाइन किए गए थे. 5 सितंबर से पहले ये सिम सिर्फ जियो के कर्मचारियों और रिलायंस के सेंटर्स पर काम करने वाले लोगों को बांटे गए थे. तब कंपनी ट्रायल कर रही थी. इसके बाद ये सिम लाइफ कंपनी के स्मार्टफोन और जियोफाई राउटर के साथ भी बेचे गए. नारंगी पैकेट वाले जियो सिम में फ्री डेटा और कॉलिंग 31 दिसंबर तक नहीं थी, बल्कि 90 दिनों के लिए थी. यानी अगर आपने 25 अगस्त से सिम यूज करना शुरू कर दिया तो फ्री सर्विसेज सिर्फ 90 दिनों तक चलेंगी, 31 दिसंबर तक नहीं.

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नारंगी पैकेट वाले सिमों में एक आराम ये था कि ये दो घंटे के अंदर एक्टिवेट हो जाते थे. इनमें आपका फोन नंबर पहले से आता था. कंपनी की तरफ से. फोन में डालते ही ये भन्न से एक्टिवेट हो जाते थे.

नीला वाला जियो सिम

नीले रंग के खोखला वाले जियो सिम 5 सितंबर के बाद वेलकम ऑफर के नाम से मार्केट में आए थे. ये तब हुआ जब जियो सिम आम लोगों को फ्री में दिए जाने लगे थे. हर किसी के लिए अवेलबल थे और जनता टूट पड़ी एकदम इन पर. चूंकि ये सिम वेलकम ऑफर के लिए थे, इसलिए इनमें फ्री डेटा और कॉलिंग 31 दिसंबर तक के लिए मिल रहा था. नीले वाले जियो सिम आने के बाद से मार्केट में नारंगी वाले सिम मिलने लगभग बंद ही हो गए. अब हर जगह नीले पैकेट वाले ही मिल रहे हैं.

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इनके साथ एक दिक्कत ये है कि ये eKYC से ऐक्टिवेट होते हैं, अपने आप नहीं. कई बार कई घंटों और कई दिनों तक ऐक्टिवेट ही नहीं होते. इन्हें खरीदने वालों की सबसे बड़ी समस्या यही है. एक तो इत्ती मुश्किल से सिम मिलता है, ऊपर से वो ऐक्टिवेट न हो तो मूड तो भन्नाएगा ही. साथ ही, इसमें यूजर्स अपना नंबर चुन नहीं पाते हैं, क्योंकि वो पहले से नहीं आता है. जब सिम ऐक्टिवेट होता है तो सिस्टम से जो नंबर जेनरेट होता है, वही मिलता है.

कौन सा खरीदें

खरीदें क्या... ज्यादा संभावना है कि नीला वाला ही मिलेगा. अब सोचो कि दो घंटे तक लाइन में खड़े रहकर काउंटर पर पहुंचे और रिलायंस वाले बंदे से बोले कि हम नीला वाला नहीं, नारंगी वाला लेंगे. तो वो सिम तो नहीं ही देगा, भगाएगा अलग. हां, अगर कहीं और से एक्टिवेट हो चुके नारंगी सिम का जुगाड़ हो जाए तो वल्लाह वल्लाह.


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