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3 महीने में 531 जांचें, अब बिहार में तुकाराम मुंढे के बैचमेट फूड सेफ्टी की लड़ाई में कूदे

बिहार के 38 जिलों में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई, 15 प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियोजन और दो लाइसेंस निलंबित. IAS Kumar Ravi और उनके 2005 बैच के साथी Tukaram Mundhe खाद्य सुरक्षा पर सख्ती को लेकर चर्चा में हैं. बिहार में खाने-पीने की चीजों में मिलावट, एक्सपायरी प्रोडक्ट्स और अस्वच्छ तरीके से खाना तैयार करने या रखने के खिलाफ अभियान तेज किया गया है.

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तुकाराम मुंढे के बैचमेट ने बिहार में अभियान शुरू किया है (COURTSEY- ITG)

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  • बिहार में तीन महीनों के भीतर फूड सेफ्टी के तहत 531 जांचें की गईं और 17.32 लाख रुपये कीमत के अवैध फूड प्रोडक्ट्स को जब्त या नष्ट किया गया।
  • खाने में मिलावट, एक्सपायर प्रोडक्ट्स, और अस्वच्छता की समस्याओं के कारण बिहार में खाद्य सुरक्षा अभियान शुरू किया गया है, जिसका नेतृत्व हेल्थ सेक्रेटरी कुमार रवि कर रहे हैं।
  • जांच अभियान के तहत 15 प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई और दो लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, साथ ही अधिकारियों के लिए अनिवार्य फूड सेफ्टी ट्रेनिंग भी शुरू की गई है।

बिहार में तीन महीनों के भीतर 38 जिलों में फूड सेफ्टी से जुड़ी 531 जांचें हुई हैं. इस दौरान 17.32 लाख रुपये की कीमत के फूड प्रोडक्ट्स को जब्त किया गया या नष्ट कर दिया गया. साथ ही सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले आउटलेट्स के खिलाफ कार्रवाई की गई. बिहार के हेल्थ सेक्रेटरी और खाद्य सुरक्षा कमिश्नर कुमार रवि ने यह अभियान चलाया है. खाने की चीजों में मिलावट, एक्सपायर हो चुके प्रोडक्ट्स और अस्वच्छ तरीके से फूड आइटम्स संभालने जैसी समस्याओं से निपटने के लिए ये अभियान शुरू किया गया है. 

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फूड सेफ्टी पर कुछ इसी तरह की कार्रवाई की वजह से महाराष्ट्र के FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे चर्चा में आए थे. अब बिहार में भी ऐसा ही अभियान IAS कुमार रवि के नेतृत्व में चल रहा है. खास बात ये है कि IAS रवि और तुकाराम मुंडे बैचमेट हैं. दोनों 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के सामने एक अतिरिक्त चुनौती यह भी है कि लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाई जाए. साथ ही उपभोक्ताओं को नियमों के उल्लंघन की शिकायत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. विभागीय रिकॉर्ड बताते हैं कि इन तीन महीनों के दौरान अधिकारियों ने 15 प्रतिष्ठानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की और दो लाइसेंस निलंबित कर दिए. हालांकि, ये आंकड़े बताते हैं कि नियमों के पालन को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है, लेकिन अधिकारियों के सामने अब भी यह तय करने की बड़ी चुनौती है कि खाने से जुड़े आउटलेट्स लगातार सुरक्षा मानकों का पालन करें.

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जांच अभियान में क्या-क्या शामिल है?

इस पूरे अभियान के दायरे में दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स, मिठाइयां, तले-भुने फूड आइटम, मसाले और आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली खाने-पीने की चीजें आती हैं. होटलों, रेस्टोरेंट्स, कैटरिंग सर्विसेज, रिटेल दुकानों और ई-कॉमर्स गोदामों में जांच की जा रही है. इन जगहों पर साफ-सफाई, सामान रखने के तरीके और सुरक्षित तरीके से खाना परोसने या संभालने के नियमों की जांच की जा रही है. साथ ही, जांच की रिपोर्ट हर दिन 'फूड सेफ्टी कंप्लायंस सिस्टम' पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है.

इस जांच के दायरे में KFC, मैकडॉनल्ड्स, पिज्जा हट और बारबेक्यू नेशन जैसी बड़ी फूड चेन के साथ-साथ छोटे स्थानीय कारोबार भी शामिल हैं. जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया गया, वहां अधिकारियों ने लैब में जांच के लिए सैंपल लिए हैं. इसके अलावा सुधार के लिए नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.

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अधिकारियों की ट्रेनिंग शुरू

नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए विभाग ने फूड सेफ्टी अधिकारियों के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग शुरू की है. इसमें 14 दिन की शुरुआती ट्रेनिंग और उसके बाद 26 दिन की फील्ड ट्रेनिंग शामिल है. इसके बाद ही उन्हें काम पर तैनात किया जाता है. के रवि खुद इस पूरी कार्रवाई की समीक्षा कर रहे हैं. साथ ही वो व्हाट्सऐप के जरिए आम जनता के लिए भी उपलब्ध हैं. डिस्ट्रिक्ट लेवल के आंकड़ों के मुताबिक, पटना में सबसे ज्यादा 87 बार जांच की गई. इसके बाद रोहतास में 41, सारण में 40 और गोपालगंज में 37 बार जांच हुई है.

अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि इन जांचों से स्थायी सुधार हो. बार-बार नियमों का उल्लंघन न हो और पूरे बिहार में बिकने वाला खाना सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो. इसके लिए नियमित रूप से सैंपल लेना, रैंडम चेकिंग्स करना और समय-समय पर दोबारा निरीक्षण करना बहुत जरूरी होगा.

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