The Lallantop

मनीष सिसोदिया को झटका, याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा- "338 करोड़ का लेनदेन संदिग्ध"

सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी को आदेश दिया है कि ट्रायल छह से आठ महीने में पूरा हो जाना चाहिए.

Advertisement
post-main-image
पिछले आठ महीने से मनीष सिसोदिया जेल में हैं (फाइल फोटो)

दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले में पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने 30 अक्टूबर को सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज कर दी. अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. कोर्ट ने 17 अक्टूबर को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस केस में 338 करोड़ रुपये के लेनदेन को लेकर कई ऐसे पहलू है, जो संदिग्ध साबित होते हैं. इसलिए उनकी याचिका खारिज की जाती है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

सिसोदिया पिछले आठ महीने से जेल में बंद हैं. इसी साल 26 फरवरी को CBI ने लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया था. ये गिरफ्तारी दिल्ली में नई एक्साइज पॉलिसी को लागू करने में हुए कथित घोटाले को लेकर हुई थी. बाद में उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया था. इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच ED कर रही है.

तीन महीने जमानत नहीं मांग पाएंगे!

इंडिया टुडे से जुड़े संजय शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 अक्टूबर को जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस SVN भट्टी की बेंच ने कहा कि ट्रायल छह से आठ महीने में पूरा हो जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि अगर अगले तीन महीने में ट्रायल की रफ्तार धीमी रही तो सिसोदिया फिर से जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं. यानी अगले कम से कम तीन महीने तक सिसोदिया जमानत अर्जी भी नहीं लगा पाएंगे.

Advertisement

मनीष सिसोदिया की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की थी. उन्होंने कोर्ट से कहा था कि सीधे तौर पर सिसोदिया से जुड़ा कोई सबूत नहीं है. इसलिए उन्हें हिरासत में रखने की कोई जरूरत नहीं है. मनु सिंघवी ने ये भी कहा था कि सिसोदिया के भागने का भी कोई खतरा नहीं है, इसलि उन्हें जमानत दी जाए.

वहीं, सुनवाई के दौरान CBI और ED की ओर से पेश हुए ASG एसवी राजू ने कहा था कि नई शराब नीति कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के मकसद से बनाई गई थी. ASG ने दलील दी थी कि एक तरफ शराब नीति बदलने की बात चल रही थी और इसके साथ ही विजय नायर की ओर से रिश्वत मांगी जा रही थी. ASG ने आरोप लगाया कि विजय नायर सिसोदिया की तरफ से काम कर रहे थे.

हालांकि इस पर जस्टिस खन्ना ने जांच एजेंसी से पूछा था कि ये किसका बयान है. जस्टिस खन्ना ने कहा था, 

Advertisement

"यह उनकी राय है. जिरह में दो सवाल होगा और ये केस टिक नहीं पाएगा. यह एक राय है, एक अनुमान निकाला गया है."

नायर आम आदमी पार्टी के कम्यूनिकेशन इनचार्ज थे. शराब घोटाले के मुख्य आरोपियों में उनका नाम भी शामिल है.

सिसोदिया पर आरोप क्या लगे?

दिल्ली में नई एक्साइज पॉलिसी को लागू करने में हुए कथित घोटाले को लेकर CBI ने पिछले साल 17 अगस्त को एक केस दर्ज किया था. शराब नीति में धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी के आरोप में मनीष सिसोदिया समेत 15 लोगों पर मामला दर्ज किया था. इसके बाद CBI ने 19 अगस्त को मनीष सिसोदिया के घर छापेमारी की थी. हालांकि CBI की पहली चार्जशीट में मनीष सिसोदिया का नाम नहीं था.

ये कार्रवाई दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना के आदेश के बाद हुई थी. एलजी ने दिल्ली सरकार की 2021 में लागू की गई नई एक्साइज पॉलिस की सीबीआई जांच करवाने का आदेश दिया था. आरोप लगा कि कोविड महामारी के बहाने लाइसेंस देने में नियमों की अनदेखी की गई. इससे शराब ठेकेदारों के 144 करोड़ रुपये माफ कर दिए गए. शराब लाइसेंस देने में कमीशन लेने का भी आरोप लगा है. चूंकि उस दौरान एक्साइज डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी मनीष सिसोदिया के पास थी इसलिए आरोपों की आंच उनके ऊपर भी आई.

सिसोदिया अपने खिलाफ लगे आरोपों को नकारते रहे हैं. हालांकि CBI का कहना है कि उनके खिलाफ कुछ दस्तावेज और डिजिटल एविडेंस थे. CBI ने मनीष सिसोदिया पर सबूतों को नष्ट करने का भी आरोप लगाया था.

इसके बाद ED ने अपनी चार्जशीट में कमीशनखोरी का आरोप लगाया था. ED ने चार्जशीट में कहा था कि जब ‘गड़बड़ियां’ हुई थीं, तब सिसोदिया ने एक दर्जन फोन का इस्तेमाल किया था. ईडी ने भी उन पर सबूतों को नष्ट करने का आरोप लगाया.

Advertisement