भारत से थाईलैंड घूमने गए तीन भारतीयों के लिए यह ट्रिप डरावने सपने जैसा बन गया. तीनों की किडनैपिंग हो गई. इन तीनों भारतीय टूरिस्ट को किडनैप करने का आरोप पाकिस्तानी और भारतीयों के एक गिरोह पर है. हफ्ते भर से ज्यादा समय तक उन्हें कैद करके रखा गया. पीड़ितों का कहना है कि किडनैपर्स उन्हें खाना और टॉयलेट भी इस्तेमाल नहीं करने देते थे. हालांकि, पुलिस ने सोमवार, 27 जुलाई को तीनों को छुड़ा लिया. पुलिस ने एक भारतीय आरोपी समेत कुछ और आरोपियों को अरेस्ट किया है, जबकि पाकिस्तानियों की तलाश जारी है.
थाईलैंड घूमने गए 3 भारतीय हो गए किडनैप! भारत-पाक गैंग ने बनाया बंधक, मांगी मोटी फिरौती
Thailand घूमने गए तीन Indian Tourist की किडनैपिंग हो गई. पुलिस ने तीनों को एक दो मंजिले घर से आजाद कराया. मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने भारतीय आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. किडनैपिंग में कुछ पाकिस्तानी भी शामिल हैं, जिनकी तलाश जारी है.

आरोपियों ने तीनों भारतीय नागरिकों को सस्ते टूर पैकेज का लालच देकर थाईलैंड बुलाया था. इसके बाद उन्हें अगवा कर लिया और छोड़ने के बदले लाखों की फिरौती मांगी थी. Bangkok Post की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने आरोपियों को एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है. आरोपी थाईलैंड छोड़कर भागने की फिराक में थे.
हाथ-पैर मुंह बाधकर कैद कियाआरोपियों की चंगुल से बचाए गए तीनों भारतीयों की उम्र 23 से 26 साल के बीच में बताई जा रही है. पुलिस ने तीनों को बांग लामुंग जिले के एक घर से आजाद कराया. कथित तौर पर पीड़ितों को दो बेडरूम में रखा गया था. पीड़ितों के हाथ-पैर और मुंह किडनैपर्स ने बांध दिए थे. साथ ही उनके टखनों पर भी चोट के निशान मिले हैं.
पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने 7 दिन का थाईलैंड टूर पैकेज खरीदा था. इसके लिए हरेक ने करीब 2 लाख रुपये जमा किए थे. इसके बाद तीनों 21 जुलाई को पटाया पहुंचे. प्लान के मुताबिक, देर शाम सभी एक फास्ट फूड रेस्टोरेंट पहुंचे थे. वहां बाइक पर भारतीय पहुंचा और बारी-बारी से तीनों को किडनैपिंग वाले घर लेकर गया, जहां उन्हें बंधक बनाकर रखा गया.
पाकिस्तानी और भारतीय नागरिकों पर आरोपपीड़ितों ने बताया कि चार पाकिस्तानी और एक भारतीय नागरिक के गैंग ने उन्हें कैद किया था. कैद के दौरान उन्हें कई दफा उल्टा लटका देते थे और उनके टखनों पर मारते थे. एक इमिग्रेशन अधिकारी ने बताया कि पीड़ितों के परिवार ने मदद के लिए पुलिस से संपर्क किया था.
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शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि ये गिरोह पुलिस से बचने और उन्हें गुमराह करने के लिए दुबई के रजिस्टर्ड नंबर का इस्तेमाल करते थे. हालांकि, पुलिस ने नंबर ट्रैक कर लिया था, लेकिन उससे पहले ही मौके से फरार हो गए.
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