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शी जिनपिंग भारत आ रहे? इस इवेंट में हिस्सा ले सकते हैं

शी जिनपंग साल 2013 से चीन के राष्ट्रपति हैं. वो तीन बार भारत के दौरे पर आ चुके हैं. आखिरी दौरा अक्टूबर 2019 में हुआ था. इसके कुछ समय बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर झड़प हुई.

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शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आ सकते हैं. (इंडिया टुडे)

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  • नई दिल्ली में 12 से 13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होगा, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना है, जो गलवान विवाद के बाद उनकी पहली यात्रा हो सकती है।
  • गलवान घाटी में 2020 के सीमा विवाद और दोनों देशों के राजनयिक रिश्तों में गिरावट के कारण भारत और चीन के बीच बातचीत और शांति बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।
  • इस सम्मेलन और शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से भारत-चीन के रिश्तों में सुधार हो सकता है, साथ ही सीमा विवाद सुलझाने के लिए नई तकनीकी और राजनयिक बातचीत शुरू होने की उम्मीद है।

नई दिल्ली में 12 से 13 सितंबर को ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन होने जा रहा है. इस सम्मेलन में कई देशों के नेता आएंगे. इस लिस्ट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम भी हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो साल 2020 के गलवान सीमा विवाद के बाद ये उनकी पहली भारत यात्रा होगी.

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शी जिनपिंग आएं तो रिश्ते सुधरेंगे

शी जिनपंग साल 2013 से चीन के राष्ट्रपति हैं. वो तीन बार भारत के दौरे पर आ चुके हैं. आखिरी दौरा अक्टूबर 2019 में हुआ था. इसके कुछ समय बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर झड़प हुई.

गलवान घाटी में हुए इस टकराव के बाद दोनों देशों के राजनयिक रिश्ते निचले स्तर तक पहुंच गए थे. उसके बाद से डिप्लोमैटिक प्रयासों से दोनों देशों के रिश्ते सामान्य हुए हैं. लेकिन रिश्तों की गर्मजोशी गायब ही रही है. ऐसे में अगर शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो इससे भारत-चीन के रिश्तों को नई मजबूती मिलने की संभावना है.

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले भारत और चीन अपने रिश्तें को और मजबूती देंगे. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल उससे पहले बीजिंग जा सकते हैं. हालांकि अभी उनके जाने की तारीखों को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

बॉर्डर विवाद सुलझाने के लिए बैठक जल्द

भारत चीन बॉर्डर पर शांति बनाए रखने के लिए साल 2012 में वर्किंग मेकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) का गठन हुआ था. आने वाले हफ्तों में WMCC की भी बैठक होने वाली है. इसके बाद बॉर्डर विवाद पर दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत होगी.

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विशेष प्रतिनिधियों के बीच की बैठक बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत और चीन लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद पर बातचीत आगे बढ़ाने को तैयार हो गए हैं. इसके लिए WMCC के फ्रेमवर्क के तहत एक नए एक्सपर्ट ग्रुप और वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति बनी है. इस सहमति के बाद पहली बार विशेष प्रतिनिधियों की बैठक होने जा रही है.

उम्मीद जताई जा रही है कि इस बातचीत से बॉर्डर मैनेजमेंट पर टेक्निकल और डिप्लोमैटिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही इससे दोनों देशों के बीच इस मसले पर राजनीतिक बातचीत का भी रास्ता बनेगा.

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भारत 12 से 13 सितंबर को BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा. इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी आने की संभावना है. क्रेमलिन पहले ही पुतिन की भारत आने के संकेत दे चुका है. BRICS के सदस्य देश के तौर पर ईरान भी सम्मेलन में हिस्सा लेगा. हालांकि ईरान की तरफ से किस लेवल का प्रतिनिधिमंडल आएगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है.  

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