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एक कपल का मर्डर हुआ, जनता भड़क गई और उनके गुस्से ने इस महिला को देश का राष्ट्रपति बना दिया

इस पार्टी के पास संसद में एक भी सीट नहीं है. लेकिन इनके संघर्ष को पूरे देश ने सलाम किया.

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बाईं तरफ जेन और उनकी गर्लफ्रेंड मार्टिना की फोटो है. उनकी हत्या के बाद स्लोवाकिया में बड़ा जन आंदोलन शुरू हो गया. जुज़ेना भी इस आंदोलन का हिस्सा थीं. यही वो पॉइंट था, जब उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया.
आप अपने विरोधी पर हमलावर हुए बिना भी जीत सकते हैं.शायद लोगों ने सोचा था कि राजनीति में न्याय और निष्पक्षता की बात करना कमज़ोरी की निशानी है. आज हम देख रहे हैं कि असल में ये चीजें हमारी ताकत हैं. 
45 साल की जुज़ेना कैपुटोवा इसी लाइन पर चलकर स्लोवाकिया की पहली महिला राष्ट्रपति बन गई हैं. ऊपर जो लाइन है, वो उन्होंने कही चुनाव जीतने के बाद. वो पॉलिटिक्स में नई हैं. जिस राष्ट्रपति चुनाव ने जुज़ेना को जिताया, उसका बैकग्राउंड है फरवरी 2018 में हुआ एक डबल मर्डर. हत्या हुई थी एक 27 बरस के जवान पत्रकार जेन कुसियाक और उनकी मंगेतर मार्टिना कुसनिरोवा की. 26 फरवरी, 2018 को इन दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वो अपने घर से अंदर मरे मिले. यही डबल मर्डर जुज़ेना को पॉलिटिक्स में लाया इस डबल मर्डर ने स्लोवाकिया में एक मास मूवमेंट शुरू किया. लाखों लोग सड़कों पर उतर आए. जेन एक बहुत बड़ी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट पर काम कर रहे थे. वो स्लोवाकिया के बड़े-बड़े नेताओं और इटली के माफिया गिरोहों के बीच के रिश्ते, उनके कनेक्शन की तफ़्तीश कर रहे थे. उनकी मौत ने लोगों के कॉन्सेंस पर असर किया. जनता के विद्रोह की वजह से प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको को इस्तीफ़ा देना पड़ा. फिको 10 सालों से इस पोस्ट पर थे. अब उसी जन विद्रोह की राह से जुज़ेना राष्ट्रपति बनी हैं. जुज़ेना कहती हैं कि जेन के मर्डर ने उन्हें राजनीति में आने की प्रेरणा दी. जब जुज़ेना के जीतने की खबर आई, तो सबसे पहले वो पहुंची जेन और मार्टिना के मेमोरियल पर मोमबत्ती जलाकर आईं. किसके साथ था मुकाबला? जुज़ेना 15 जून को शपथ लेंगी. इसी दिन मौजूदा राष्ट्रपति आंद्रेज किस्का का कार्यकाल पूरा हो रहा है. चुनाव में जुज़ेना का मुकाबला था मारोस सेफकोविक से. उन्हें नॉमिनेट किया था डायरेक्शन- सोशल डेमोक्रसी पार्टी ने. स्लोवाकिया में इसी पार्टी की सरकार है अभी. पार्टी के मुखिया हैं पूर्व PM रॉबर्ट फिको. हैविवेट वर्सेज़ कॉमनर की लड़ाई थी. जुज़ेना लिबरल प्रोग्रेसिव स्लोवाकिया पार्टी की सदस्य हैं. इस पार्टी के पास संसद में एक भी सीट नहीं है. स्लोवाकिया में असली ताकत प्रधानमंत्री के पास होती है. सरकार चलाना उसी का काम होता है. राष्ट्रपति का पोस्ट वहां कुछ-कुछ वैसा ही है, जैसा हमारे यहां. मगर कुछ बेहद अहम पावर्स होती हैं प्रेजिडेंट के पास. जैसे- जजों की नियुक्ति, सरकार बनाने की दावेदारी को मंजूर या खारिज़ करना. बैकग्राउंड क्या है? जुज़ेना के बैकग्राउंड में है पर्यावरण. वो ऐनवॉयरमेंटल वकील हैं. ऐक्टिविस्ट हैं. 14 साल तक एक केस के पीछे पड़ी रहीं. ये उनके शहर पेज़िनोक में चल रहे एक प्रस्ताविक लैंडफिल के खिलाफ था. लैंडफिल वो जगह होती है, जहां शहर भर का कूड़ा ठिकाने लगाया जाता है. जैसे- दिल्ली का गाज़ीपुर लैंडफिल. इस तरह के लैंडफिल पूरे शहर की हवा, पानी, मिट्टी को जहरीला कर देते हैं. आसपास की आबादी के लिए वो जगह रहने लायक नहीं बचती. जुज़ेना ने अपने शहर में बनने वाले लैंडफिल के खिलाफ मुहिम चलाई. 'ग्रीन नोबेल' इस लंबी मुहिम के बाद 2013 में वो मौका आया, जब स्लोवाकिया के सुप्रीम कोर्ट ने उस लैंडफिल के प्लान को गैरकानूनी बताया. इस फैसले के बैकग्राउंड में था यूरोपियन यूनियन के कोर्ट ऑफ जस्टिस का एक फैसला. जिसमें अदालत ने माना था कि प्रशासन के ऐसे फैसले, जिनका असर पर्यावरण पर पड़ने वाला हो, उनमें जनता को भी अपना पक्ष रखने का अधिकार है. इसी केस की वजह से अप्रैल 2016 में जुज़ेना को गोल्डमैन एनवॉयरमेंटल प्राइज मिला. ये पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले ऐक्टिविस्ट्स का सबसे बड़ा अवॉर्ड होता है. इसको ग्रीन नोबेल भी कहते हैं. गांधी से कौन सी बात मिलती है? जुज़ेना का चुनावी अभियान साफ-सुथरा था. उन्होंने प्रगतिशील मुद्दे उठाए. राजनैतिक सुधारों की बात की. सहिष्णुता, सच्चाई जैसे मूल्यों की बात की. उनके कैंपेन की पिक-अप लाइन थी- स्टैंड अप टू एविल. मतलब, बुराई के खिलाफ उठो. बुराई का मुकाबला करो. गोल्डमैन अवॉर्ड जीतते समय उन्होंने जो भाषण दिया था, उसमें भी ये लाइन थी- स्टैंड अप टू एविल. और जिस शैली में गांधी कहते थे कि आदमी से नहीं, उसकी बुराई से लड़ो उसी शैली में जुज़ेना भी यकीन रखती हैं. चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कहा-
उन चीजों पर ध्यान दीजिए, जो हमें आपस में जोड़ती हैं. निजी हितों से ऊपर उठकर आपसी सहयोग और भागीदारी पर जोर दीजिए. मैं न केवल चुनाव के नतीजों से खुश हूं, बल्कि मुझे इस बात की ज्यादा खुशी है कि बिना लोगों को खुश करने वाली बातें किए बिना भी चुनाव जीता जा सकता है. सच कहकर, बिना आक्रामक हुए और किसी पर निजी हमला किए बिना भी लोगों का सपोर्ट हासिल किया जा सकता है.
स्लोवाकिया में अभी भी समलैंगिक अधिकार और अबॉर्शन जैसी चीजें कानूनी नहीं हैं. जुज़ेना लिबरल सोच की हैं. वो इन चीजों को सपोर्ट करती हैं. उनकी जीत इसलिए भी मायने रखती है कि दुनिया के एक बड़े हिस्से पर राइट विंग पॉलिटिक्स हावी हो रही है. कट्टर मुद्दे ज्यादा तवज्ज़ो पा रहे हैं. बुरी भाषा, छींटाकशी, विरोधियों पर निजी हमले, नाटकीयता ये चीजें ज्यादा तालियां बटोर रही हैं. पॉलिटिक्स से शालीन करेक्टर्स गायब हो रहे हैं.
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