सीवान जेल में रहना ही कानून तोड़ना है
प्रिजन एक्ट, 1894 के सेक्शन 59 के तहत बिहार ने अपना प्रिजन मैनुअल, 2012 में अपडेट किया है. जिसके हिसाब से कोई भी कैदी जो पांच साल से ज्यादा की सजा पाया हुआ हो, उसे सेंट्रल जेलों में ही रखा जाएगा. शहाबुद्दीन जो कि 10 केसों में दोषी साबित हो चुके हैं. और दो मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा भी हो चुकी है. और साथ ही एक केस में 10 साल कैद-ए-बामश्क्कत की भी सजा हो चुकी है. इसलिए शहाबुद्दीन को कायदे से उन आठ में से किसी एक जेल में रखा जाना चाहिए था, जो बिहार में हैं और सीवान जेल उन जेलों में नहीं आती है. पर शहाबुद्दीन को बिहार के जेल कानूनों का उल्लंघन करते हुए एक डिस्ट्रिक जेल में रखा गया. और सारे जिम्मेदार लोग बिना सांस खींचे पड़े रहे. यहां तक कि 2005 में जबसे वो गिरफ्तार हुए हैं तबसे उनको इसी जेल में रखा गया था. दो बार उनको भागलपुर और गया जेल में 6-6 महीने के लिए शिफ्ट भी किया गया, पर आखिरी लोकसभा चुनावों और विधानसभा चुनावों के दौरान. क्योंकि सीवान जेल में उनके रहने से चुनावों की स्थिति गड़बड़ा सकती थी. दोनों ही बार वो इलेक्शन खत्म होते ही चले आए थे सीवान जेल. पिछली बार वो 24 नवंबर को वापस आ गए थे. जैसे ही नीतीश कुमार की सरकार ने महागठबंधन की सरकार का नेतृत्व संभाला था. हर बार वो भागे-भागे सीवान चले आते हैं. एक तर्क शहाबुद्दीन को सीवान जेल में ही रखे जाने के पीछे ये दिया जाता है कि कम से कम 37 केस जिनमें मर्डर, किडनैपिंग और वसूली शामिल हैं शहाबुद्दीन के खिलाफ, सीवान कोर्ट में ही पेंडिंग हैं.टेक्नोलॉजी के दौर में नहीं चलता है ये बहाना
पर शहाबुद्दीन आसानी से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भी अपनी पेशी में भाग ले सकते थे. वैसे भी वो आखिरी बार कोर्ट में 10 दिसम्बर, 2015 को आए थे. जब उनको 2004 के सीवान डबल मर्डर केस में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. चंद्रकेश्वर प्रसाद जिनको सीवान में चंदू बाबू के नाम से ही जाना जाता है, वो इंसान हैं जिन्होंने शहाबुद्दीन के चलते अपने तीन बेटों को खो दिया है. इसलिए चंदू बाबू ने शहाबुद्दीन के जेल से बाहर आते ही उसकी जमानत को चैलेंज किया था सुप्रीम कोर्ट में. ये एक ऐसा निडर कदम था जिसके बाद नीतीश कुमार सरकार भी इस मुद्दे पर कुछ सतर्क दिखी थी. 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की सुनवाई की और ये भी निश्चित किया कि ये खूंखार डॉन फिर से जेल की सलाखों के पीछे हो. जब शहाबुद्दीन सितंबर में छूटा था तो उसके समर्थकों ने उसका बहुत ही भव्य स्वागत, सत्कार किया था. इसके बाद शहाबुद्दीन ने ये बयान देते हुए विरोधियों का मुंह बंद कर दिया था कि बिहार में 22 लाख लोग हैं मैं क्या कर सकता हूं, अगर दो लोग नाखुश हैं. एक सीनियर IPS अफसर ने कहा था कि दरअसल शहाबुद्दीन का कहना था कि ये कुछ लोग हमारा क्या कर लेंगे. वैसे डॉन को उनकी जमानत कैंसिल होने के बाद उनका जवाब मिल गया है. पर तबसे उनके सीवान जेल में रखे जाने पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.ये भी पढ़ें -














