ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता कब होगा? ये सवाल कई महीनों से मिस्ट्री बना हुआ है. कभी अमेरिका की तरफ से पहल होती है तो कभी ईरान की तरफ से. मगर बात हर बार ईरान के ‘एनरिच्ड यूरेनियम’ पर ही आकर अटक जाती है. इस खींचतान में मध्यस्थ देश भी शामिल रहे हैं. पाकिस्तान, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पुल बनने का दावा करता आया है. फिर भी अब तक कुछ हासिल नहीं हो पाया है.
'एक ग्राम यूरेनियम भी... ', ईरान ने अमेरिका को साफ-साफ बोल दिया
ईरान जंग को आठ महीने हो चुके हैं और अब तक शांति समझौता नहीं हो पाया है. एक बार फिर पाकिस्तान ने मध्यस्थता कराने की कोशिश की है. इस बार ईरान ने अमेरिका को साफ-साफ एक मैसेज भेज दिया है.

अब एक बार फिर पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश की है और हाथ आई है एक शर्त. पाक के आर्मी चीफ, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ईरान के आलाकमान से मुलाकात की. इसमें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबाफ शामिल थे. बैठक के बाद ईरान ने साफ़ कर दिया कि एनरिच्ड यूरेनियम का एक ग्राम भी ईरान के बाहर नहीं जाएगा.

ईरानी मीडिया नौर न्यूज़ के मुताबिक, बैठक 20 अक्टूबर को हुई. आसिम मुनीर मध्यस्थता के मकसद से ईरान आए थे. मोहम्मद कालिबाफ ने साफ किया कि अमेरिका ईरान का भरोसा तब तक नहीं जीत सकता, जब तक उसकी सात शर्तें नहीं मान ली जातीं. ये शर्तें पिछले महीने ईरान की तरफ से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज खोलने के लिए रखी गई थीं. इन शर्तों में ईरानी तेल पर सैंक्शन हटाना, होर्मुज में ब्लॉकेड को ख़त्म करना और हर मोर्चे पर जंग रुकवाना शामिल है.
इसके अलावा ईरान के नेशनल सिक्योरिटी कॉउन्सिल के सेक्रेटरी मोहसिन रज़ाई ने अयातुल्लाह मोजतबा ख़ामेनेई का स्टैंड रखा. उन्होंने X पर भी एक पोस्ट किया. पोस्ट में लिखा,
‘ईरान से एक ग्राम भी एनरिच्ड यूरेनियम बाहर नहीं जाएगा. जब तक अमेरिका विश्वास कायम करने के लिए कदम नहीं उठाता, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी. इस प्रक्रिया की शुरुआत ईरान की सभी शर्तों के अनुपालन से होनी चाहिए.’

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ईरान के परमाणु प्रोग्राम को लेकर चल रहा विवाद, वॉशिंगटन के साथ किसी भी संभावित समझौते के रास्ते में बाधा बना हुआ है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने अक्टूबर महीने की शुरुआत में कहा था कि अमेरिका की मांगों को पूरा करने और दोनों देशों के बीच आठ महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए, ईरान को अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमता में "सार्थक" कमी करनी होगी.
पाकिस्तान, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच लंबे समय से मध्यस्थ बना हुआ है. इससे पहले की कोशिशों के चलते जून में एक अंतरिम शांति समझौता हुआ था. लेकिन कुछ हफ्तों बाद ही ईरान और अमेरिका के बीच फिर से लड़ाई शुरू हो गई, जिससे 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम' जल्द ही फेल हो गया. अब दोनों देशों ने बातचीत करने से पहले एनरिच्ड यूरेनियम को लेकर फिर से शर्तें रख दी हैं.
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