अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने फ्रांस में हो रहे दंगों और प्रोटेस्ट को लेकर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर निशाना साधा है. ट्रंप ने फ्रांस में हिंसा के लिए मैक्रों की इमिग्रेशन पॉलिसी को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने दावा किया कि अगर मैक्रों ने उनकी एडवाइस मानी होती, तो फ्रांस में हालात इतने खराब नहीं होते. ट्रंप ने तो यहां तक कह दिया कि पेरिस जल्द ही एक मुस्लिम शहर बनने वाला है. उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में दूसरे देशों से आए प्रवासियों की वजह से फ्रांस की राजधानी की आबादी का नेचर बदल रहा है.
'पेरिस जल्द एक मुस्लिम शहर बनने वाला है,' फ्रांस दंगों को लेकर इमैनुएल मैक्रों पर भड़के ट्रंप
France Protest: डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया कि फ्रांस में प्रवासियों की बढ़ती संख्या की वजह से वहां के हालात बदल गए हैं. ट्रंप के इन बयानों के बीच फ्रांस में हिंसा, लूटपाट और प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

20 अक्टूबर को राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात की. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने काफी समय पहले ही इमैनुएल मैक्रों को फ्रांस में बड़ी संख्या में प्रवासियों को आने देने के खिलाफ चेतावनी दी थी. ट्रंप ने कहा कि मैक्रों उनके दोस्त हैं, लेकिन उन्होंने फ्रांस में पूरी दुनिया के लोगों को आने देने की गलती की है. ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने मैक्रों से कहा था कि वे अपने देश में ऐसा करके बड़ी गलती कर रहे हैं.
ट्रंप बोले- 'पेरिस एक मुस्लिम सिटी बनेगी'पत्रकारों से बात करते हुए डॉनल्ड ट्रंप ने कहा,
"पेरिस जल्द ही एक मुस्लिम शहर बनने वाला है, और ये बात नहीं थी."
उन्होंने दावा किया कि फ्रांस में प्रवासियों की बढ़ती संख्या की वजह से वहां के हालात बदल गए हैं. ट्रंप के इन बयानों के बीच फ्रांस में हिंसा, लूटपाट और प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.
फ्रांस में हालात बिगड़ने के बाद फ्रांसीसी प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू की सरकार पर भी दबाव बढ़ रहा है. सरकार के सामने हिंसा रोकने, कारोबारियों को हुए नुकसान की भरपाई करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है.
फ्रांस में हिंसा के बाद पेरिस, लिली, नीस समेत कई शहरों में लोकल लेवल पर कर्फ्यू लगाया गया. लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी लगाई गई. सरकार ने पूरे पेरिस में एक साथ कर्फ्यू लगाने के बजाय संवेदनशील इलाकों में पाबंदियां लगाने का फैसला किया.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा कि फिलहाल स्थानीय स्तर पर प्रतिबंध लगाना ज्यादा वाजिब है. इस बीच, उन्होंने इमरजेंसी घोषित करने की संभावना से इनकार नहीं किया. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि देश में व्यवस्था बहाल करने का उनका संकल्प पूरी तरह साफ है.
पेरिस पुलिस ने सोमवार, 19 अक्टूबर की रात 8 बजे से राजधानी के कुछ इलाकों में प्रदर्शनों पर रोक लगा दी. वहीं, प्लेस डे ला रिपब्लिक और लेस हॉल्स के आसपास रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लागू किया गया. प्रतिबंधों को लागू कराने के लिए अलग से पुलिसवालों की तैनाती की गई है.
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, हिंसा के दौरान करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि लगभग 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए. शनिवार, 17 अक्टूबर को दिल का दौरा पड़ने से एक प्रदर्शनकारी की मौत भी हो गई.
द फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड रिटेल ने कहा कि हिंसा की वजह से करीब 3,000 दुकानों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है. फेडरेशन ने सरकार से प्रभावित कारोबारियों को मदद पहुंचाने की अपील की.
इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा कीफ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश को संबोधित करते हुए हिंसा और तोड़फोड़ की निंदा की. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता.
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मैक्रों ने पीसफुल प्रोटेस्ट करने वालों की मांगों और हिंसा में शामिल लोगों की एक्टिविटी के बीच फर्क करने पर भी जोर दिया. उन्होंने फिलहाल देश में आपातकाल घोषित नहीं किया है, लेकिन लोकल एडमिनिस्ट्रेशन को जरूरत पड़ने पर प्रदर्शन रोकने के अधिकार देने की बात कही है.
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